डीजल बस और ट्रक चलाने वाले ड्राइवर कहते हैं कि तय आठ घंटे की शिफ्ट, वातानुकूलित केबिन और गियरलेस वाहन से उनके स्वास्थ्य और काम-काज के संतुलन में सुधार हुआ है

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