जब कोई भाषा मरती है, तो सिर्फ शब्दों का अंत नहीं होता; उसके साथ मूक हो जाता है सदियों पुराना ज्ञान, लोरी गाती मां की ममता, लोककथाओं की मिठास और उस माटी का इतिहास जो कभी इन बोलियों में रचा बसा था।

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