27 वर्षों के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बेतरतीब शहरीकरण, झीलों पर अतिक्रमण और सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी ने बेंगलुरु के प्राकृतिक जलचक्र को तोड़ दिया है।

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