भारत में बिजली से चलने वाले परिवहन के बढ़ते उपयोग के बीच, पटना और लखनऊ का अनुभव दिखाता है कि शहरी आवाजाही का भविष्य केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुरक्षित, सुलभ और समावेशी परिवहन पर भी निर्भर करेगा

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