संसद में आज: भारत में सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण क्षमता 1,72,592 मेगावाट तक पहुंची

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज, 18 मार्च, 2026 को संसद के दोनों सदनों में उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के मंत्रियों के द्वारा जानकारी दी गई।
नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर उपकरण निर्माण को बढ़ावा, देश में सौर पीवी क्षमता 1,72,592 मेगावाट तक पहुंची।
नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर उपकरण निर्माण को बढ़ावा, देश में सौर पीवी क्षमता 1,72,592 मेगावाट तक पहुंची।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत 3164.70 करोड़ रुपये आवंटित, जिसमें से 2839.10 करोड़ रुपये फरवरी 2026 तक जारी किए गए।

  • नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सौर उपकरण निर्माण को बढ़ावा, देश में सौर पीवी क्षमता 1,72,592 मेगावाट तक पहुंची।

  • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अंतर्गत 1500 करोड़ रुपये की योजना ई-वेस्ट से लिथियम, कोबाल्ट जैसे खनिजों के पुनर्चक्रण हेतु शुरू।

  • फेम-द्वितीय योजना के तहत 912.50 करोड़ रुपये से देशभर में 9,159 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जनवरी 2026 तक स्थापित किए गए।

  • सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराकर भूख से मृत्यु के मामलों से इनकार किया।

सौर ऊर्जा ग्रिड अवसंरचना के लिए धन आवंटन, जारी और उपयोग

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। इसी बीच सदन में उठे एक सवाल के लिखित जवाब में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार देश में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम योजनाएं चला रही है। इनमें से एक प्रमुख योजना ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (जीईसी) है। इस योजना का उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना और उसे विभिन्न राज्यों तक पहुंचाना है।

इस योजना के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पहले चरण को लागू किया जा रहा है। यह परियोजना विशेष रूप से उन राज्यों में चल रही है जहां नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता अधिक है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने कुल 3164.70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है, जो कुल परियोजना लागत का 40 फीसदी है। नाइक ने कहा कि 28 फरवरी 2026 तक 2839.10 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। हालांकि इस राशि के पूर्ण उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।

स्वदेशी सौर उपकरण निर्माण

सदन में स्वदेशी सौर उपकरण को लेकर पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस दिशा में मंत्रालय द्वारा कई नीतियां बनाई गई हैं।

इन नीतियों का मुख्य उद्देश्य देश में ही सौर उपकरण जैसे सोलर पैनल का निर्माण बढ़ाना है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी। सरकार ने कंपनियों को देश में कहीं भी अपने निर्माण संयंत्र स्थापित करने की अनुमति दी है।

1 मार्च 2026 को जारी मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची (एएलएमएम) के अनुसार, भारत में सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण क्षमता 1,72,592 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। मंत्री ने कहा कि यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनाने में मदद करेगा।

ई-वेस्ट से महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण हेतु प्रोत्साहन योजना

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए एक नई योजना शुरू की है। यह योजना राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अंतर्गत लागू की गई है।

इस योजना के तहत 1500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य ई-वेस्ट, पुराने लिथियम-आयन बैटरियों और अन्य स्क्रैप से महत्वपूर्ण खनिजों का पुनर्चक्रण करना है। इस योजना की शुरुआत दो अक्टूबर, 2025 को की गई थी और आवेदन की अंतिम तिथि एक अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है।

इस योजना के माध्यम से लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की प्राप्ति की जाएगी, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरियों के लिए जरूरी हैं। दुबे ने कहा यह योजना भारत को आत्मनिर्भर बनाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में सहायक होगी।

देश में भूख से मौत के मामले

देश में भूख से मौत को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभानिया ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से भूख से मौत का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

बांभानिया ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की 75 फीसदी और शहरी क्षेत्रों की 50 फीसदी आबादी को लाभ मिलता है। लोगों को चावल, गेहूं और मोटा अनाज बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (टीपीडीएस) के माध्यम से लागू की जाती है। इससे देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

जलवायु के अनुकूल रणनीतियां

जलवायु परिवर्तन आज एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसके प्रभाव जैसे गर्मी की लहरें, अनियमित बारिश और जल संकट बढ़ते जा रहे हैं। इस सब को लेकर सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। ये संस्थान विभिन्न राज्यों और जिलों में जलवायु के खतरों को कम करने के उपायों पर काम कर रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले जैसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। सिंह ने कहा कि इन प्रयासों से लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने में मदद मिल रही है।

बायो-कोयला उत्पादन

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में बताया कि भारत सरकार ऊर्जा के क्षेत्र में विविधता लाने के लिए बायो-कोयला और बायोमास आधारित ईंधनों को बढ़ावा दे रही है। कोयला मंत्रालय ने “मिशन कोकिंग कोल” के तहत कई पहलें शुरू की हैं। इस मिशन का उद्देश्य घरेलू कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ाना और उसकी गुणवत्ता में सुधार करना है।

कोल इंडिया लिमिटेड इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही है। वर्तमान में कोल इंडिया लिमिटेड के पास 10 कोकिंग कोल वॉशरी हैं, जिनकी कुल क्षमता 18.35 मिलियन टन प्रति वर्ष है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 24 लाख टन धुला हुआ कोकिंग कोयला उत्पादन किया। दुबे ने कहा कि यह पहल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगी।

राजमार्गों पर ईवी चार्जिंग अवसंरचना का विकास

चार्जिंग स्टेशन को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ा रही है। भारी उद्योग मंत्रालय ने फेम-द्वितीय चरण की योजना के तहत 912.50 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

गडकरी ने कहा इस योजना के तहत पूरे देश में 9,332 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। एक जनवरी, 2026 तक 9,159 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 40-60 किमी पर चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना बनाई है। अब तक 68 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। यह पहल इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को आसान बनाएगी।

भारत टैक्सी सेवा की स्थिति

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, सहकारिता मंत्री शाह ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू की है, जिसे “भारत टैक्सी” कहा जाता है। यह देश का पहला सहकारी आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य ड्राइवरों को मालिकाना हक देना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

यह सेवा वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कुछ शहरों जैसे अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में उपलब्ध है। यह योजना रोजगार बढ़ाने और लोगों को सस्ती यातायात सेवा प्रदान करने में मदद करेगी।

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