प्रदूषण

पर्यटन, पर्वतारोहण, खेती और कचरे से निकलने वाले प्लास्टिक कण हिमालयी पर्यावरण में लगातार पहुंच रहे हंं और प्रदूषण बढ़ा रहे।
इलेस्ट्रेशन: याेगेंद्र आनंद
चेम्बरमबक्कम झील; फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स
पोस्टर: देवीश्री, एमिटी यूनिवर्सिटी हरियाणा
मेरठ में बिना अनुमति के चल रही लेदर फैक्ट्री, संयुक्त समिति ने रिपोर्ट में किए गंभीर खुलासे
ग्लोबल साउथ से समुद्र में पहुंचने वाले नदी-जनित माइक्रोप्लास्टिक का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा आता है, अध्ययन का अहम खुलासा।
उत्तर प्रदेश के महोबा में एक स्टोन क्रशिंग यूनिट से उठती धूल; प्रतीकात्मक तस्वीर: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
टिड्डे पीएफओएस जैसे खतरनाक ‘फॉरएवर केमिकल’ को पर्यावरण में मिलने वाली बेहद कम मात्रा में भी पहचानने में सक्षम पाए गए।
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