90 फीसदी प्रोस्टेट कैंसर ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया: अध्ययन

यह अध्ययन प्रोस्टेट कैंसर में माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति और इससे स्वास्थ्य को होने वाले खतरों का पता लगता है
अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं, स्वस्थ ऊतक की तुलना में मात्रा अधिक पाई गई।
अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं, स्वस्थ ऊतक की तुलना में मात्रा अधिक पाई गई।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं, स्वस्थ ऊतक की तुलना में मात्रा अधिक।

  • माइक्रोप्लास्टिक छोटे प्लास्टिक कण हैं, जो भोजन, हवा और त्वचा के माध्यम से शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।

  • कैंसर वाले ऊतक में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा लगभग 2.5 गुना अधिक है, जो सूजन और संभावित जीन परिवर्तन से जुड़ सकती है।

  • अध्ययन में केवल 10 मरीजों के नमूने शामिल थे, इसलिए बड़े और विस्तृत शोध की आवश्यकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

  • भविष्य में शोध का उद्देश्य यह जानना है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में कैसे व्यवहार करता है और कैंसर विकास में योगदान देता है।

हाल ही में एक नए अध्ययन में पता चला है कि अत्यंत छोटे प्लास्टिक के कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है, अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर के ट्यूमर में पाए गए हैं। यह अध्ययन न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय (एनयाईयू) लैंगोन हेल्थ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था। उन्होंने पाया कि कैंसर वाले ट्यूमर में स्वस्थ प्रोस्टेट ऊतक की तुलना में अधिक माइक्रोप्लास्टिक मौजूद थे।

माइक्रोप्लास्टिक शरीर में कैसे प्रवेश करते हैं?

हमारे रोजमर्रा के जीवन में प्लास्टिक का उपयोग बहुत अधिक होता है - जैसे कि खाद्य कंटेनर, पैकेजिंग, कॉस्मेटिक उत्पाद और अन्य सामान। ये प्लास्टिक समय के साथ छोटे-छोटे कणों में टूट जाते हैं।

  • खाने के साथ निगलना

  • हवा से सांस के माध्यम से लेना

  • त्वचा के संपर्क में आना

इन तरीकों से माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं। पिछले अध्ययनों में ये कण रक्त, मूत्र, प्रमुख अंगों और यहां तक कि प्लेसेंटा में भी पाए गए हैं।

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अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश प्रोस्टेट कैंसर ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं, स्वस्थ ऊतक की तुलना में मात्रा अधिक पाई गई।

कैसे किया गया अध्ययन?

इस अध्ययन में 10 प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों के ऊतकों (टिशू) के नमूनों का विश्लेषण किया गया। जिससे 90 फीसदी कैंसर वाले ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए। 70 फीसदी स्वस्थ ऊतक में भी माइक्रोप्लास्टिक मौजूद थे। कैंसर वाले ऊतक में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा लगभग 2.5 गुना अधिक थी (40 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम बनाम 16 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम)।

वैज्ञानिकों ने 12 सबसे सामान्य प्लास्टिक अणुओं पर गौर किया। प्लास्टिक का व्यापक उपयोग होने के कारण, उन्होंने अल्यूमीनियम, कपास और अन्य प्लास्टिक रहित सामग्री का इस्तेमाल करके नमूनों को संदूषण से बचाया। सभी परीक्षण विशेष कंट्रोल रूम में किए गए।

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माइक्रोप्लास्टिक और सूजन का संबंध

अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में लंबे समय तक सूजन पैदा कर सकते हैं। जब शरीर किसी विदेशी पदार्थ से लगातार प्रभावित होता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय रहता है। समय के साथ यह ऊतक को नुकसान पहुंचा सकता है और जीन में बदलाव कर सकता है, जिससे कैंसर विकसित हो सकता है।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा कि अगला कदम यह समझना है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर के अंदर कैसे व्यवहार करता है और क्या यह सीधे कैंसर का कारण बन सकता है

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अध्ययन का महत्व

यह अध्ययन पश्चिमी देशों में पहली बार प्रोस्टेट ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक का सीधा मापने वाला है। इससे पहले माइक्रोप्लास्टिक और हृदय रोग या डिमेंशिया के बीच संबंध के संकेत मिले थे, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर से सीधे जुड़ाव पर शोध बहुत कम था।

शोध में कहा गया है कि इस पायलट अध्ययन से यह अहम संकेत मिलता है कि माइक्रोप्लास्टिक का सम्पर्क प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।

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सावधानी और भविष्य का शोध

अध्ययन में केवल छोटा नमूना (10 रोगी) शामिल थे, इसलिए बड़ी संख्या में अध्ययन करना आवश्यक है। भविष्य में शोधकर्ताओं का उद्देश्य यह जानना है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में कैसे फैलते हैं। क्या ये सीधे कैंसर को बढ़ावा देते हैं या सूजन के माध्यम से योगदान करते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नियामक उपायों की आवश्यकता है ताकि लोग प्लास्टिक के संपर्क से सुरक्षित रहें।

माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में आसानी से पहुंच सकते हैं और कैंसर वाले ऊतक में अधिक मात्रा में जमा हो सकते हैं।

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अध्ययन यह दिखाता है कि पर्यावरणीय प्रदूषण और प्लास्टिक के सम्पर्क में आने से प्रोस्टेट कैंसर के खतरे से जुड़ा हो सकता है।

हालांकि अभी तक सीधा कारण और प्रभाव स्थापित नहीं हुआ है, यह चेतावनी है कि माइक्रोप्लास्टिक को सीमित करना चाहिए।

सावधानी बरतें: प्लास्टिक कंटेनर और पैकेजिंग के उपयोग को कम करना, प्राकृतिक और प्लास्टिक रहित विकल्पों का चयन करना भविष्य में स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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