जल

मालधारियों में  विपरीत परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता होती है
जली करंज के रास्ते में बने वायु कूपक। दाएं: आजकल लोग कूपकों को ही कुएं की तरह प्रयोग करने लगे हैं, जिनके नीचे सालभर साफ पानी बहता ही रहता है।
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भील आदिवासियों ने अपने इलाके की बनावट के मद्देनजर पहाड़ी सोतों को मोड़कर अपने खेतों को सींचने की पाट प्रणाली विकसित की है। यह जल प्रबंध का व्यावहारिक और पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल तरीका है
सांची के तीसरी सदी ई.पू. के बौद्ध स्मारकों वाली जगह पर तीन प्राचीन तालाब हैं। एक पहाड़ी के ऊपर है और दो उससे आधा किमी. नीचे। कभी पहाड़ी की ढलान इनके प्राकृतिक आगोर का काम करती थी । इस तस्वीर में एक शानाब दिख रहा है
शहडोल खदान मामला: एनजीटी ने अल्ट्राटेक सीमेंट को आसपास के गांवों में भूजल रिचार्ज के दिए निर्देश
चेन्नई शहर में मंदिरों से लगे 39 तालाब अर्थात कुलम हैं जिनमें बरसात का पानी भरता है। इनसे भी बाढ़ पर रोक लगाने और भूजल का स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। सोमंगलम तालाब चेन्नई के अड्सार बेसिन के ऊपरी हिस्से में स्थित है। सोमंगलम कुलम को इसी से पानी मिलता है
आपातानी लोग धान की खेती के साथ उसी खेत में अक्सर मछली पालन भी करते हैं। खेत की मेड़ आमतौर पर आधा मीटर ऊंची होती है। मछलियों के लिए खेत के बीच में एक गड्ढा खोद दिया जाता है, ताकि खेत का पानी सूखने पर भी वे जिंदा रह जाएं
अंग्रेजों के शासन से पहले था भारत में 'जल गणराज्य', अंग्रेजों ने किया बर्बाद
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