जल

आंध्र प्रदेश में तिरुपति के निकट त्रिचानूर स्थित मंदिर का तालाब। दक्षिण भारत के राजवंशों ने मंदिरों समेत दूसरी संस्थाओं-व्यक्तियों को तालाब बनवाने और उसका रखरखाव करने के लिए प्रोत्साहित किया था
File Photo by Amit Shanker/CSE
कजा गांव का एक तालाब, जिसमें  ‘कुल’ का पानी आकर जमा होता है और  जरूरत के अनुसार इसमें से पानी लिया जाता है
मालधारियों में  विपरीत परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता होती है
जली करंज के रास्ते में बने वायु कूपक। दाएं: आजकल लोग कूपकों को ही कुएं की तरह प्रयोग करने लगे हैं, जिनके नीचे सालभर साफ पानी बहता ही रहता है।
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भील आदिवासियों ने अपने इलाके की बनावट के मद्देनजर पहाड़ी सोतों को मोड़कर अपने खेतों को सींचने की पाट प्रणाली विकसित की है। यह जल प्रबंध का व्यावहारिक और पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल तरीका है
सांची के तीसरी सदी ई.पू. के बौद्ध स्मारकों वाली जगह पर तीन प्राचीन तालाब हैं। एक पहाड़ी के ऊपर है और दो उससे आधा किमी. नीचे। कभी पहाड़ी की ढलान इनके प्राकृतिक आगोर का काम करती थी । इस तस्वीर में एक शानाब दिख रहा है
शहडोल खदान मामला: एनजीटी ने अल्ट्राटेक सीमेंट को आसपास के गांवों में भूजल रिचार्ज के दिए निर्देश
Read More
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in