देशभर के क्रिकेट स्टेडियमों में भूजल के अत्यधिक दोहन पर एनजीटी सख्त, मांगा जवाब

जवाब न देने के लिए दिल्ली, पुणे, जयपुर, हैदराबाद, कानपुर, लखनऊ, इंदौर, धर्मशाला, राजकोट, रायपुर, कटक और मुंबई के 12 स्टेडियम पर पांच हजार रुपए का जुर्माना
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
Published on

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में भूजल के निरंतर और अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की है। दरअसल कई बड़े स्टेडियम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित होने वाले पानी के बजाए खेल मैदान की देखभाल के लिए भूजल का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

एनजीटी के चेयरमैन और जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव व एक्सपर्ट मेंबर डॉ ए. सेंथिल वेल की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ ने ऐसे सभी स्टेडियम को भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

एनजीटी का यह आदेश केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की रिपोर्ट के बाद आया।

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के अनुसार, कई बड़े स्टेडियम अभी भी पिच और हरित क्षेत्र की सिंचाई के लिए भूजल का उपयोग कर रहे हैं, जबकि उनके नजदीकी क्षेत्रों में शोधित अपशिष्ट जल (एसटीपी ट्रीटेड वाटर) उपलब्ध है।

मिसाल के तौर पर मोहाली स्थित आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम द्वारा प्रतिमाह लगभग 6,000 किलोलीटर भूजल का उपयोग किया जा रहा है। पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि स्टेडियम के नजदीक एसटीपी से उपलब्ध शोधित जल होने के बावजूद भूजल का इस्तेमाल करना पर्यावरणीय नियमों की अवहेलना है।

वहीं, एनजीटी ने नागपुर, कोलकाता के ईडन गार्डन्स, लाहली, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी के स्टेडियमों को छह सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने और वैकल्पिक जल स्रोत अपनाने के उपायों की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने इनके अलावा दिल्ली, पुणे, जयपुर, हैदराबाद, कानपुर, लखनऊ, इंदौर, धर्मशाला, राजकोट, रायपुर, कटक और मुंबई के 12 स्टेडियम व संघों द्वारा लगातार आदेशों के बावजूद रिपोर्ट न देने पर प्रत्येक पर 5,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

स्टेडियम को यह जुर्माना दो सप्ताह के भीतर एनजीटी बार एसोसिएशन के सचिव के पास जमा करना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को होगी।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in