संसद में आज: सरकार ने माना कि हरियाणा में भूजल की स्थिति चिंताजनक है

आज पांच फरवरी, 2026 को राज्यसभा व लोकसभा में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, वन, जल, शहरी विकास और ऊर्जा से जुड़े कई अहम विषयों को लेकर सदन में उठाए गए सवालों पर जानकारी दी गई।
हरियाणा में भूजल दोहन 136 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिससे जल संरक्षण और प्रबंधन की गंभीर आवश्यकता स्पष्ट होती है।
हरियाणा में भूजल दोहन 136 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिससे जल संरक्षण और प्रबंधन की गंभीर आवश्यकता स्पष्ट होती है।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • गुजरात के रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में फरवरी 2025 से एक बाघ देखा गया, जिसकी सुरक्षा के लिए राज्य सरकार सक्रिय है।

  • भारत में 2010 से मीथेन उत्सर्जन स्थिर है, जबकि कुल ग्रीनहाउस गैसों में इसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है।

  • साल 2020-21 से 2024-25 के बीच 97,050 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों हेतु डायवर्ट की गई।

  • कॉप 30 में भारत ने अनुकूलन वित्त को 2035 तक तीन गुना बढ़ाने और उसे अनुदान आधारित बनाने का समर्थन किया।

  • हरियाणा में भूजल दोहन 136 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिससे जल संरक्षण और प्रबंधन की गंभीर आवश्यकता स्पष्ट होती है।

गुजरात में बाघों की उपस्थिति

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि गुजरात के रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में फरवरी 2025 से लगातार एक बाघ को देखा जा रहा है। यह गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि बाघ जैव विविधता के संरक्षण का प्रतीक माने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने बाघ की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें बाघ की नियमित निगरानी, उसके रहने के क्षेत्र का संरक्षण, शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना और बाघ की आवाजाही के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाघ सुरक्षित वातावरण में रह सके।

पराली जलाने से मीथेन उत्सर्जन

सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) का एक पक्ष है। इसके तहत भारत समय-समय पर राष्ट्रीय संचार (एनसीएस) और द्विवार्षिक अपडेट रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

इन रिपोर्टों के अनुसार, साल 2010 से भारत में कुल मीथेन उत्सर्जन लगभग स्थिर बना हुआ है। हालांकि कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में मीथेन की हिस्सेदारी 2010 में 19.28 प्रतिशत से घटकर 2020 में 13.32 प्रतिशत हो गई है।

भारत की चौथी द्विवार्षिक अपडेट रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने से 2020 में केवल 2.8 लाख टन मीथेन उत्सर्जन हुआ, जो देश के कुल मीथेन उत्सर्जन का केवल 1.49 प्रतिशत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पराली जलाना मीथेन उत्सर्जन का एक छोटा कारण है, हालांकि इसके अन्य पर्यावरणीय प्रभाव जरूर हैं।

वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग

वन भूमि को लेकर सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान 97,050.30 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी कार्यों के लिए उपयोग में लाई गई

यह कार्य वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत किया गया। इस प्रक्रिया में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाता है।

कॉप-30 शिखर सम्मेलन में भारत का रुख

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कॉप-30 सम्मेलन में भारत ने अनुकूलन वित्त को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया। सदन में उत्तर देते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने 2035 तक वैश्विक अनुकूलन वित्त को 2025 के स्तर से तीन गुना बढ़ाने के निर्णय का समर्थन किया।

सिंह के मुताबिक, भारत ने यह भी कहा कि विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को दिया जाने वाला अनुकूलन वित्त अपर्याप्त है। भारत का मत है कि यह वित्त नया, अतिरिक्त, अनुमानित, मुख्य रूप से अनुदान आधारित और विकासशील देशों के लिए सुलभ होना चाहिए।

दिल्ली में क्लाउड सीडिंग प्रयोग

क्लाउड सीडिंग को लेकर सदन में उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग पर एक पायलट परियोजना शुरू की गई।

यह परियोजना दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और आईआईटी कानपुर के सहयोग से चलाई जा रही है। इसका नाम “दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण न्यूनीकरण के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक का प्रदर्शन और मूल्यांकन” है। इस परियोजना को 10 मई 2025 को कैबिनेट की स्वीकृति मिली और अब तक 37.93 लाख रुपये की पहली किस्त आईआईटी कानपुर को दी जा चुकी है।

अमृत 2.0 योजना

सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय में मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में बताया कि अमृत 2.0 योजना एक अक्टूबर, 2021 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य शहरों को जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत देशभर के 2,484 शहरी निकायों में 3,528 जल आपूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 1.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

इसके अलावा, 255 शहरों में 583 सीवरेज और सेप्टेज परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है, जिससे सीवेज उपचार क्षमता में बड़ा सुधार होगा।

हरियाणा में भूजल दोहन

भूजल दोहन को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि साल 2025 के आकलन के अनुसार हरियाणा में भूजल की स्थिति चिंताजनक है

राज्य में कुल भूजल दोहन स्तर 136.75 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 143 आकलन इकाइयों में से 91 इकाइयां अत्यधिक दोहन की श्रेणी में हैं और छह इकाइयां गंभीर श्रेणी में आती हैं। यह स्थिति जल संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाती है।

देश में बिजली की बढ़ती मांग

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने लोकसभा में बताया कि देश में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच बिजली की खपत में लगभग 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि आर्थिक विकास और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को दर्शाती है।

संसद में दी गई सभी जानकारियों को लेकर सरकार का दावा है कि वह पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, शहरी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन नीतियों और योजनाओं का उद्देश्य देश के विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है।

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