वैज्ञानिकों ने सुलझाई पृथ्वी के जलचक्र की गुत्थी

समस्थानिकों की मदद से वैज्ञानिक पृथ्वी के जल चक्र, मौसमी बदलाव और भविष्य की जलवायु को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं
वैज्ञानिकों ने पानी में मौजूद समस्थानिकों की मदद से उसकी वैश्विक यात्रा को पहचानने का नया और प्रभावी तरीका खोजा।
वैज्ञानिकों ने पानी में मौजूद समस्थानिकों की मदद से उसकी वैश्विक यात्रा को पहचानने का नया और प्रभावी तरीका खोजा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने पानी में मौजूद समस्थानिकों की मदद से उसकी वैश्विक यात्रा को पहचानने का नया और प्रभावी तरीका खोजा।

  • आठ जलवायु मॉडलों को मिलाकर एन्सेम्बल पद्धति से अधिक सटीक और भरोसेमंद परिणाम प्राप्त किए गए।

  • अध्ययन में 1979 से 2023 तक के 45 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

  • शोध से वातावरण में बढ़ती जलवाष्प और वैश्विक तापमान के बीच स्पष्ट संबंध सामने आया।

  • एल नीनो, एनएओ और एसएएम जैसे जलवायु तंत्रों का पानी की उपलब्धता पर गहरा प्रभाव पाया गया।

पृथ्वी पर पानी हमेशा घूमता रहता है। यह समुद्र, नदियों और झीलों से भाप बनकर ऊपर उठता है। फिर बादल बनता है और बारिश या बर्फ के रूप में धरती पर वापस आता है। इस पूरी प्रक्रिया को जल चक्र कहा जाता है। जल चक्र जीवन के लिए बहुत जरूरी है। अगर यह चक्र रुक जाए, तो धरती पर जीवन संभव नहीं होगा।

अब वैज्ञानिकों ने पानी की इस यात्रा को समझने का एक नया और शक्तिशाली तरीका खोजा है। वे पानी के अंदर छिपे छोटे-छोटे संकेतों की मदद से उसकी चाल को पहचान रहे हैं।

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समस्थानिक क्या होते हैं?

पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है। इन दोनों तत्वों के परमाणु अलग-अलग रूपों में पाए जाते हैं। कुछ हल्के होते हैं और कुछ थोड़े भारी। इन्हें समस्थानिक (आइसोटोप) कहा जाता है।

जब पानी भाप बनता है या बादल बनकर ठंडा होता है, तब हल्के और भारी समस्थानिक अलग-अलग तरीके से व्यवहार करते हैं। इसी कारण उनके अनुपात में थोड़ा बदलाव आ जाता है। यही बदलाव एक खास “पहचान” या “फिंगरप्रिंट” की तरह काम करता है।

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वैज्ञानिक इन समस्थानिकों को मापकर यह समझ सकते हैं कि पानी कहां से आया और किस रास्ते से गुजरा। यह तरीका पानी की एक-एक बूंद की यात्रा को समझने में मदद करता है।

मौसम को समझने में मदद

समस्थानिकों की मदद से वैज्ञानिक यह जान सकते हैं कि नमी कैसे एक जगह से दूसरी जगह जाती है। इससे तूफान, बाढ़ और सूखे जैसी घटनाओं को समझना आसान हो जाता है।

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आज दुनिया जलवायु परिवर्तन की समस्या का सामना कर रही है। तापमान बढ़ रहा है और मौसम के पैटर्न बदल रहे हैं। ऐसे समय में यह जानना जरूरी है कि पानी का चक्र कैसे बदल रहा है। समस्थानिकों की मदद से वैज्ञानिक भविष्य के मौसम का बेहतर अनुमान लगा सकते हैं।

जलवायु मॉडल और उनकी चुनौती

वैज्ञानिक मौसम और जलवायु को समझने के लिए कंप्यूटर मॉडल का उपयोग करते हैं। कुछ मॉडल पहले से ही समस्थानिकों को शामिल करते थे। लेकिन अकेला कोई भी मॉडल पूरी तरह सही परिणाम नहीं दे पाता था।

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पानी का वैश्विक स्तर पर घूमना बहुत जटिल प्रक्रिया है। इसमें तापमान, हवा की दिशा, समुद्र की सतह का तापमान और कई अन्य बातें शामिल होती हैं। इसलिए एक ही मॉडल से सही निष्कर्ष निकालना कठिन था।

एन्सेम्बल तरीका क्या है?

इस समस्या को हल करने के लिए जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका अपनाया। उन्होंने आठ अलग-अलग जलवायु मॉडलों को एक साथ जोड़ा। इस तरीके को “एन्सेम्बल” कहा जाता है।

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इन सभी मॉडलों में एक जैसे हवा और समुद्र के तापमान के आंकड़े डाले गए। फिर 1979 से 2023 तक के 45 वर्षों का अध्ययन किया गया। इससे यह पता चला कि अलग-अलग मॉडल कैसे काम करते हैं और उनका औसत परिणाम कितना सही है।

बेहतर और भरोसेमंद परिणाम

जब सभी मॉडलों के परिणामों को मिलाया गया, तो उनका औसत वास्तविक दुनिया के आंकड़ों से काफी मेल खाता था। बारिश, बर्फ, जलवाष्प और उपग्रह से मिले डेटा में जो समस्थानिक पैटर्न दिखाई दिए, वे एन्सेम्बल मॉडल में भी साफ दिखाई दिए।

यह किसी एक मॉडल से ज्यादा सटीक साबित हुआ। इससे वैज्ञानिकों का विश्वास बढ़ा कि यह तरीका भविष्य में भी उपयोगी रहेगा।

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बड़े जलवायु तंत्रों से संबंध

अध्ययन में यह भी पाया गया कि पिछले 30 वर्षों में वातावरण में जलवाष्प की मात्रा बढ़ी है। इसका सीधा संबंध बढ़ते वैश्विक तापमान से है।

इसके अलावा पानी की गति का संबंध कुछ बड़े जलवायु तंत्रों से भी जुड़ा है। जैसे एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ), नॉर्थ अटलांटिक ऑसिलेशन (एनएओ) और साउदर्न एन्युलर मोड (एसएएम)। ये तंत्र दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और सूखे को प्रभावित करते हैं।

अरबों लोगों की खेती, पीने का पानी और जीवन इन जलवायु प्रणालियों पर निर्भर करता है। इसलिए इन्हें समझना बहुत जरूरी है।

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भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम

जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: एटमॉस्फियर में प्रकाशित यह अध्ययन दुनिया में पहली बार इस तरह किया गया है, जहां कई समस्थानिक आधारित मॉडलों को एक साथ जोड़ा गया। इससे वैज्ञानिकों को जल चक्र की अधिक स्पष्ट और सटीक तस्वीर मिली है।

अब वे बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि अतीत में जलवायु कैसे बदली और भविष्य में क्या हो सकता है। इससे सरकारों और समाज को बाढ़, सूखे और अन्य चरम मौसम की घटनाओं के लिए तैयारी करने में मदद मिलेगी।

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पानी के छोटे-छोटे परमाणुओं में छिपे संकेत आज बड़े जलवायु रहस्यों को समझने की चाबी बन गए हैं। समस्थानिकों की मदद से वैज्ञानिक पानी की हर बूंद की यात्रा का पता लगा सकते हैं।

यह नई तकनीक जलवायु परिवर्तन को समझने और भविष्य की योजना बनाने में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। विज्ञान की यह खोज हमें प्रकृति को और बेहतर तरीके से समझने की दिशा में एक बड़ा कदम देती है।

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