केरल के पलक्कड़ जिले में अवैध पत्थर खनन का मामला, एनजीटी ने कहा चेन्नई पीठ करेगी सुनवाई

याचिका के मुताबिक पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) और खनन परमिट में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन किया जा रहा है।
एनजीटी का आदेश
एनजीटी का आदेश
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केरल के पलक्कड़ जिले में अवैध पत्थर खनन और पर्यावरणीय नियमों के गंभीर उल्लंघन को लेकर याचिका दाखिल की गई है। याची का आरोप है कि ना सिर्फ पर्यवारणीय स्वीकृति में दिए गए नियमों का उल्लंघन है बल्कि अवैध खनन के जरिए आस-पास गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण भी फैलाया जा रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने याचिका पर गौर करने के बाद इस मामले को चेन्नई में स्थित एनजीटी पीठ को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।

यह मामला हुसैन द्वारा एनजीटी के पब्लिक ग्रिवेंस पोर्टल पर दायर शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ओटप्पलम तालुक करिंकल क्वैरी ऑपरेटर्स इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड द्वारा केरल के पलक्कड़ जिले में पट्टांबी तालुक स्थित नागलास्सेरी गांव में स्थित खदान में पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है।

याचिका के मुताबिक पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) और खनन परमिट में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन किया जा रहा है। साथ ही स्वीकृत माइनिंग प्लान के अनुसार बेंच-कटिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

याचिका में आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के विपरीत रात के समय खनन और परिवहन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। साथ ही अत्यधिक विस्फोटकों का उपयोग, जिससे आसपास के घरों में दरारें और संरचनात्मक नुकसान हो रहा है।

याची के मुताबिक, खनन और परिवहन से गंभीर धूल एवं वायु प्रदूषण भी पैदा हो रहा है। साथ ही आवासीय क्षेत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा दूरी के मानकों का उल्लंघन भी किया जा रहा है।

पीठ में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) और डॉ. ए. सेंथिल वेल (विशेषज्ञ सदस्य) शामिल थे। पीठ ने 10 मार्च को कहा कि हालांकि मामला प्रधान पीठ में दर्ज किया गया था लेकिन घटना का क्षेत्राधिकार चेन्नई स्थित दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ के अंतर्गत आता है।

इसलिए न्यायाधिकरण ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि आवश्यक आदेश प्राप्त करने के बाद मामले को 27 मार्च 2026 को चेन्नई स्थित दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

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