

फरवरी में वैश्विक खाद्य कीमतों में उछाल देखा गया, जिससे पिछले पांच महीनों की गिरावट थम गई।
एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं और वनस्पति तेलों की बढ़ती मांग ने पनीर और चीनी की कीमतों में गिरावट के प्रभाव को पीछे छोड़ दिया।
अनाज और मांस की कीमतों में भी वृद्धि हुई, जबकि डेयरी उत्पादों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में फरवरी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पिछले पांच महीनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं, अधिकतर वनस्पति तेलों और कई प्रकार के मांस की कीमतों में बढ़ोतरी ने पनीर और चीनी की कीमतों में आई गिरावट के असर को पीछे छोड़ दिया।
एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक फरवरी में औसतन 125.3 अंक रहा। यह जनवरी के संशोधित स्तर की तुलना में 0.9 प्रतिशत अधिक है, हालांकि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में यह अभी भी 1.0 प्रतिशत कम है। यह सूचकांक दुनिया भर में कारोबार होने वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हर महीने होने वाले बदलाव को दिखाता है।
एफएओ के अनुसार अनाज मूल्य सूचकांक जनवरी की तुलना में 1.1 प्रतिशत बढ़ा। वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही। यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में पाला पड़ने की खबरों और रुस तथा व्यापक काला सागर क्षेत्र में जारी परिवहन की दिक्कतों का भी असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मोटे अनाज की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी हुई, जबकि एफएओ का ऑल राइस प्राइस इंडेक्स पिछले महीने की तुलना में 0.4 प्रतिशत बढ़ा। इसकी वजह बासमती और जापोनिका किस्म के चावल की लगातार बनी मांग है।
वनस्पति तेल
वनस्पति तेलों के मामले में फरवरी में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। एफएओ का वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक जनवरी की तुलना में 3.3 प्रतिशत बढ़ा और जून 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतें वैश्विक आयात मांग मजबूत रहने और दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसमी रूप से कम उत्पादन के कारण बढ़ीं।
सोयाबीन तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई, क्योंकि अमेरिका में जैव ईंधन को बढ़ावा देने वाली नीतियों की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं कैनोला (रेपसीड) तेल की कीमतें कनाडा से आयात की संभावित मांग के कारण संभलीं, जबकि सूरजमुखी तेल की कीमतों में अर्जेंटीना से निर्यात आपूर्ति बढ़ने के चलते कुछ नरमी आई।
मांस
मांस मूल्य सूचकांक जनवरी के मुकाबले 0.8 प्रतिशत बढ़ा। भेड़ के मांस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, जबकि गोमांस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह चीन और अमेरिका से मजबूत आयात मांग बताई गई है। सूअर और पोल्ट्री मांस की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी हुई।
डेयरी उत्पाद
डेयरी उत्पादों का मूल्य सूचकांक फरवरी में 1.2 प्रतिशत घट गया। इसका मुख्य कारण पनीर की कीमतों में गिरावट रही। हालांकि स्किम्ड और फुल क्रीम मिल्क पाउडर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से आयात मांग मजबूत रही। मक्खन की कीमतों में भी जून 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद पहली बार मासिक बढ़ोतरी देखी गई।
चीनी
चीनी का मूल्य सूचकांक जनवरी की तुलना में 4.1 प्रतिशत गिर गया। फरवरी 2025 के मुकाबले इसमें 27.3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी वजह मौजूदा सीजन में वैश्विक स्तर पर चीनी की पर्याप्त आपूर्ति रहने की उम्मीद बताई गई है।
गेहूं की कीमतें
एफएओ ने 2026 के लिए गेहूं उत्पादन का प्रारंभिक अनुमान भी जारी किया है। इसके मुताबिक वैश्विक उत्पादन में करीब 3 प्रतिशत गिरावट आ सकती है और यह लगभग 81 करोड़ टन रहने का अनुमान है, हालांकि यह अभी भी पिछले पांच वर्षों के औसत से ऊपर रहेगा।
रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ, यूनाइटेड स्टेट्स और रूस में किसान कम कीमतों के कारण सर्दियों में बोए जाने वाले गेहूं का रकबा घटा सकते हैं। वहीं भारत में सरकारी प्रोत्साहन के कारण रिकॉर्ड बुवाई हुई है, जिससे उत्पादन का अनुमान सकारात्मक है। पाकिस्तान में भी हालात अच्छे रहने की उम्मीद है, जबकि चीन में भी उत्पादन के आसार सामान्य से बेहतर बताए गए हैं।
मक्का
एफएओ की ‘सीरियल सप्लाई एंड डिमांड ब्रीफ’ के अनुसार भूमध्य रेखा के दक्षिणी हिस्सों में मक्का उत्पादन का शुरुआती अनुमान भी सकारात्मक है। बढ़े हुए रकबे और अनुकूल मौसम के कारण अर्जेंटीना व ब्राजील में उत्पादन औसत से अधिक रहने की संभावना है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में बड़े पैमाने पर बुवाई के कारण 2026 में लगातार दूसरे साल अच्छी मक्का फसल का अनुमान है, हालांकि कुछ प्रांतों में अनियमित मौसम के कारण पैदावार 2025 के स्तर से थोड़ी कम रह सकती है।
अनाज उत्पादन
एफएओ ने 2025 के लिए वैश्विक अनाज उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 3,029 मिलियन टन कर दिया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5.6 प्रतिशत अधिक और अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
2025-26 में दुनिया में अनाज की खपत का अनुमान भी बढ़ाकर 2,943 मिलियन टन कर दिया गया है। इसमें गेहूं, मोटे अनाज और चावल की खपत बढ़ने की संभावना है। नए आकलन के अनुसार सीजन के अंत तक दुनिया में अनाज का भंडार बढ़कर लगभग 940.5 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर स्टॉक-टू-यूज अनुपात 31.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
एफएओ के अनुसार 2025-26 के विपणन वर्ष (जुलाई से जून) में दुनिया में अनाज का कुल व्यापार लगभग 501.7 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले 12 महीनों की तुलना में 3.5 प्रतिशत अधिक होगा और अब तक के रिकॉर्ड में दूसरा सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।