

18 मार्च 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर बेहद असमान नजर आई। पंजाब का औद्योगिक शहर मंडी गोबिंदगढ़ अचानक देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक एक दिन में 135 अंकों की छलांग लगाते हुए 285 पर पहुंच गया। पीएम2.5 के ऊंचे स्तर के कारण यहां प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1800 फीसदी अधिक दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
इसके विपरीत जम्मू-कश्मीर के पंपोर-श्रीनगर में एक्यूआई महज 27 रहा और यहां की हवा देश में सबसे साफ दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 247 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के केवल 13 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि बड़ी संख्या में शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 कण प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं।
दिल्ली, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहर भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो दर्शाता है कि उत्तर भारत के कई औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण का दबाव लगातार बना हुआ है।
विश्लेषण के मुताबिक 18 मार्च 2026 को देश में मंडी गोबिंदगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई 150 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 135 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि मंडी गोबिंदगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पंपोर-श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 247 दर्ज किया गया। हालांकि आज 13 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 234 पर पहुंच गया है। लेकिन चिंता की बात है कि सिंगरौली में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 189 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 232 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 43 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 250 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 213 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 18 मार्च 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 13 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 43.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 5.4 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 533 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बहादुरगढ़ (279) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (259) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गाजियाबाद चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 251 और 247 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
नोएडा (243) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (239), सिंगरौली (234) और दिल्ली (232) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बागपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, भागलपुर, मुजफ्फरनगर, फरीदाबाद, भिवाड़ी, नंदेसरी, हाजीपुर, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरपुर, नारनौल, मंडीदीप, आगरा, पंचगांव, समस्तीपुर, कोटा, खुर्जा, वातवा, सोनीपत, लखनऊ, रोहतक, पटना, जयपुर, कानपुर, बर्नीहाट , करनाल, यमुना नगर, गुम्मिडीपूंडी, इंदौर, अंबाला आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, टोंक, सवाई माधोपुर, बल्लभगढ़, भीलवाड़ा, ग्वालियर, सीकर, पीथमपुर, अहमदाबाद, धनबाद, पाली, वृंदावन, बाड़मेर, बद्दी, दमोह, करौली, देवास, जोधपुर, सिरसा, बारां, धौलपुर, प्रतापगढ़, गांधीनगर, झालावाड़, कटनी, पानीपत, सहरसा, जलगांव, कुरुक्षेत्र, नागौर, चूरू, नासिक, वडोदरा, अलवर, बूंदी, उदयपुर, बांसवाड़ा, बीकानेर, भिवंडी, सासाराम, अमृतसर, चित्तौड़गढ़, पिंपरी-चिंचवाड़, लुधियाना, रतलाम, अकोला, अंकलेश्वर, बेलापुर, भावनगर, डूंगरपुर, पटियाला, अगरतला, छपरा, जैसलमेर, राजकोट, जालौर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 13 फीसदी यानी महज 32 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, अमरावती (आंधप्रदेश), बागलकोट, बारीपदा, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, नाहरलागुन, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, थूथुकुडी, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 108 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भिवानी, भुवनेश्वर, बोईसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, जींद, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 88 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बूंदी, बर्नीहाट , छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, देवास, धनबाद, धौलपुर, डूंगरपुर, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हिसार, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मुजफ्फरपुर, नागौर, नारनौल, नासिक, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजकोट, रतलाम, रोहतक, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरसा, सोनीपत, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, वृंदावन, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 19 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बहादुरगढ़, भागलपुर, भिवाड़ी, बुलंदशहर, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, हापुड़, मंडी गोबिंदगढ़, मुजफ्फरनगर, नंदेसरी, नोएडा, सिंगरौली, टोंक शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से महज 32 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 17 मार्च को यह आंकड़ा 115 दर्ज किया गया था।
88 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 पर पहुंच गया। वहीं कल मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई 150 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 135 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 247 तक पहुंच गया। वहीं आज सिंगरौली में एक्यूआई 234 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से सूचकांक में 13 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 189 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 232 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 43 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 250 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 213 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 18 मार्च को गाजियाबाद चौथे स्थान पर है, वहीं बहादुरगढ़ (279) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (259) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 152, गाजियाबाद में 258, गुवाहाटी में 80, गुरूग्राम में 251, नोएडा में 243, ग्रेटर नोएडा में 247 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 83 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 134, चेन्नई में 54, चंडीगढ़ में 72, हैदराबाद में 72, जयपुर में 128 और पटना में 130 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 32 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंधप्रदेश), बागलकोट, बारीपदा, बैरकपुर, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, हल्दिया, हुबली, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, लातूर, मदिकेरी, नाहरलागुन, पंपोर, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, थूथुकुडी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भिवानी, भुवनेश्वर, बोईसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, जींद, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, महाद, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मैसूरु, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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