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वैश्विक तापमान तेजी से बढ़ रहा है, 2015 के बाद वृद्धि दर लगभग दो गुना हो गई, रिकॉर्ड गर्म साल सामने आए।
फोटो: विकास चौधरी/ सीएसई
ग्लेशियर के पिघलने से नदियों के जल स्रोत, पर्यावरण संतुलन और पहाड़ी क्षेत्रों की सुरक्षा पर भविष्य में असर पड़ सकता है।
दुनिया की 97 फीसदी कॉफी उत्पादन करने वाले देशों में तापमान वृद्धि ने पैदावार और गुणवत्ता पर बहुत ज्यादा बुरा असर डाला।
कागजी नहीं, कारगर हैं जलवायु नीतियां: कैसे सख्ती से घटा 300 करोड़ टन उत्सर्जन
पौधों, कीटों और जानवरों के बीच रिश्ते बेहद खास और नाजुक होते हैं। ऐसे में समय का थोड़ा-सा भी बदलाव पूरे खाद्य जाल को प्रभावित कर सकता है; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
अल नीनो का मौसम प्रभाव: दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया सूखे, अमेरिका दक्षिणी हिस्से, पेरू और इक्वाडोर में अधिक बारिश होगी।
रवलीन कौर - पत्रकार, कोकराझार
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