जलवायु में बदलाव व बारिश करवाने में अहम भूमिका निभाते हैं सूक्ष्म जीव

सूक्ष्म जीव जैसे बैक्टीरिया और फंगस बादलों में बर्फ बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर बारिश और जलवायु चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं
बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्म जीव वातावरण में बर्फ बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करके बारिश की संभावना बढ़ा सकते हैं।
बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्म जीव वातावरण में बर्फ बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करके बारिश की संभावना बढ़ा सकते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्म जीव वातावरण में बर्फ बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करके बारिश की संभावना बढ़ा सकते हैं।

  • बादलों में सुपरकूल्ड पानी मौजूद रहता है जो बहुत कम तापमान पर भी बिना जमे तरल अवस्था में बना रह सकता है।

  • बर्फ बनने के लिए धूल, धुआं और जैविक कण जैसे छोटे “बीज” आवश्यक होते हैं जो पानी को जमने में मदद करते हैं।

  • कुछ बैक्टीरिया और फंगस विशेष प्रोटीन छोड़ते हैं जो पानी को कम तापमान पर भी तेजी से बर्फ में बदल सकते हैं।

  • ये जैविक कण हवा के माध्यम से बादलों तक पहुंचकर प्राकृतिक बारिश चक्र और जलवायु प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।

धरती पर मौजूद बहुत छोटे जीव जैसे बैक्टीरिया और फंगस के बारे में एक दिलचस्प बात सामने आई है। हाल के कुछ शोधों के अनुसार ये सूक्ष्म जीव हवा और बादलों में जाकर बारिश बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि वे सीधे “बारिश” नहीं बनाते हैं, लेकिन वे बादलों में बर्फ बनने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं, जिससे बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।

बादल और बारिश कैसे बनती है

बारिश समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि बादल कैसे काम करते हैं। आसमान में बादल पानी की बहुत छोटी-छोटी बूंदों से बने होते हैं। ऊंचाई पर तापमान बहुत कम होता है, लेकिन पानी हमेशा तुरंत जमता नहीं है। कई बार पानी माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक भी तरल अवस्था में रह सकता है। इसे “सुपरकूल्ड वॉटर” कहा जाता है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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बारिश अक्सर बर्फ बनने की प्रक्रिया से शुरू होती है। जब बादलों में मौजूद पानी की बूंदें बर्फ के रूप में जमने लगती हैं, तो वे धीरे-धीरे बड़ी होकर भारी हो जाती हैं और नीचे गिरती हैं। नीचे आते समय वे पिघल जाती हैं और बारिश के रूप में जमीन पर पहुंचती हैं।

बर्फ बनने के लिए “बीज” की जरूरत

बादलों में पानी को बर्फ में बदलने के लिए एक “बीज” की जरूरत होती है। यह बीज बहुत छोटा कण होता है जिस पर पानी जमना शुरू करता है। धूल, धुआं और समुद्री नमक जैसे कण यह काम कर सकते हैं, लेकिन वे बहुत प्रभावी नहीं होते। इसलिए वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसे प्राकृतिक कणों की खोज कर रहे हैं जो बर्फ बनने की प्रक्रिया को आसानी से शुरू कर सकें।

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बैक्टीरिया की भूमिका

कुछ बैक्टीरिया जैसे स्यूडोमोनास सिरिंज में एक खास तरह के प्रोटीन पाए जाते हैं जिन्हें आइस-न्यूक्लिएटिंग प्रोटीन कहा जाता है। ये प्रोटीन पानी को बहुत कम तापमान, जैसे माइनस 2 डिग्री सेल्सियस पर भी जमने में मदद कर सकते हैं। ये बैक्टीरिया पौधों की पत्तियों पर पाए जाते हैं और हवा के जरिए बादलों तक पहुंच सकते हैं।

इस तरह ये बैक्टीरिया बादलों में बर्फ बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं और बारिश की संभावना बढ़ा सकते हैं

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फंगस की नई खोज

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ फंगस, जैसे फ्यूजेरियम और मोर्टिएरेला, भी ऐसे ही प्रोटीन बनाते हैं जो बर्फ बनने में मदद करते हैं। यह खोज बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि फंगस अपने प्रोटीन को मिट्टी में छोड़ देते हैं, जिससे वे आसानी से हवा में मिल सकते हैं।

ये फंगस बैक्टीरिया की तुलना में और भी छोटे और पानी में घुलनशील प्रोटीन बनाते हैं, जो बर्फ बनने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। जब हवा चलती है, तो ये सूक्ष्म कण ऊपर बादलों तक पहुंच जाते हैं।

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बारिश का प्राकृतिक चक्र

जब ये फंगस या बैक्टीरिया के कण बादलों में पहुंचते हैं, तो वे पानी को जल्दी बर्फ में बदलने में मदद करते हैं। बर्फ के कण बड़े होकर गिरने लगते हैं और बारिश होती है। बारिश से जमीन गीली होती है, जिससे जंगल और मिट्टी में फंगस को बढ़ने में मदद मिलती है। इस तरह एक प्राकृतिक चक्र बन सकता है जिसमें मिट्टी, जीव और बारिश एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

वैज्ञानिक महत्व

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि बहुत छोटे जीव भी जलवायु और मौसम पर असर डाल सकते हैं। अगर जंगलों को काट दिया जाए या मिट्टी की जैव विविधता खत्म हो जाए, तो यह प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आ सकता है।

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कुछ वैज्ञानिक यह भी सोच रहे हैं कि इन प्राकृतिक प्रोटीन का उपयोग भविष्य में कृत्रिम बारिश या क्लाउड सीडिंग में किया जा सकता है। अभी तक क्लाउड सीडिंग में चांदी आयोडाइड जैसे रसायनों का उपयोग होता है, लेकिन जैविक प्रोटीन एक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हो सकते हैं।

हालांकि बैक्टीरिया और फंगस सीधे बारिश नहीं बनाते, लेकिन वे बादलों में बर्फ बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करके बारिश की संभावना बढ़ा सकते हैं। यह खोज हमें बताती है कि पृथ्वी का वातावरण और जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। छोटे-छोटे जीव भी बड़े प्राकृतिक चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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