

लगभग नौ फीसदी औषधीय पौधों की प्रजातियां अत्यधिक कटाई, अवैध व्यापार, जलवायु परिवर्तन व आवास नुकसान के कारण विलुप्त होने के कगार पर हैं।
दुनिया भर में 30,000 औषधीय और सुगंधित पौधे स्वास्थ्य, परंपरा और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विकासशील देशों में 70 से 95 फीसदी लोग अपनी शुरुआती स्वास्थ्य सेवा के लिए पारंपरिक चिकित्सा और जंगली पौधों पर निर्भर हैं।
वन्यजीव और औषधीय पौधों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, आजीविका और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
विश्व वन्यजीव दिवस हर साल तीन मार्च को मनाया जाता है। साल 2026 में यह दिन आज मंगलवार को मनाया जा रहा है। यह दिन हमें जानवरों और पौधों के महत्व के बारे में जागरूक करता है। वन्यजीव हमारे जीवन, पर्यावरण और भविष्य के लिए बहुत जरूरी हैं। इस दिन का उद्देश्य लोगों को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करना है।
विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की थीम
औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, परंपरा और आजीविका का संरक्षण है। यह थीम उन पौधों पर ध्यान देती है जो दवाइयों, पारंपरिक उपचार और रोजमर्रा के उपयोग में आते हैं। ये पौधे लाखों लोगों की आय का साधन भी हैं।
औषधीय पौधों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े
दुनिया भर में लगभग 30,000 पौधों की प्रजातियां औषधीय या सुगंधित मानी जाती हैं। लगभग 50,000 जंगली प्रजातियां अरबों लोगों की जरूरतों को पूरा करती हैं।
दुनिया में उपयोग होने वाले औषधीय पौधों में से लगभग नौ फीसदी प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे में हैं। लगभग पांच में से एक व्यक्ति जंगली पौधों, शैवाल और फंगस पर भोजन और आय के लिए निर्भर है।
विकासशील देशों में 70 से 95 फीसदी लोग शुरुआती स्वास्थ्य सेवा के लिए पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि पौधे हमारे जीवन का कितना बड़ा हिस्सा हैं।
पौधों पर बढ़ते खतरे
आज औषधीय और सुगंधित पौधों पर कई प्रकार के खतरे मंडरा रहे हैं। अत्यधिक कटाई: जरूरत से ज्यादा तोड़ने और बेचने से कई पौधे तेजी से कम हो रहे हैं। खेती का विस्तार: जंगलों को साफ कर खेती की जा रही है, जिससे प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
भूमि उपयोग में बदलाव: शहरों और उद्योगों के विस्तार से पौधों के रहने की जगह कम हो रही है।
जलवायु परिवर्तन: तापमान में वृद्धि और अनियमित बारिश से पहाड़ी और आर्द्रभूमि क्षेत्रों के पौधे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अगर समय रहते इन खतरों को नहीं रोका गया, तो कई महत्वपूर्ण पौधे हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की पहल
विश्व वन्यजीव दिवस की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने तीन मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में घोषित किया।
यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि तीन मार्च 1973 को वन्य जीव और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
सीआईटीईएस एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो यह सुनिश्चित करता है कि जंगली जानवरों और पौधों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार उनकी प्रजातियों को नुकसान न पहुंचाए।
क्यों जरूरी है संरक्षण?
औषधीय पौधे केवल दवाइयों के लिए ही नहीं, बल्कि आजीविका और परंपराओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। लाखों ग्रामीण परिवार इन पौधों को बेचकर आय कमाते हैं। आयुर्वेद, यूनानी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां इन्हीं पौधों पर आधारित हैं। कई छोटे उद्योग सुगंधित तेल और जड़ी-बूटियों पर निर्भर हैं।
यदि ये पौधे खत्म हो गए, तो स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और संस्कृति पर बुरा असर पड़ेगा।
हम क्या कर सकते हैं?
हर व्यक्ति छोटे-छोटे कदम उठाकर प्रकृति की रक्षा कर सकता है।
जंगली पौधों को बिना जरूरत न तोड़ें।
पौधारोपण करें।
जैव विविधता के बारे में जागरूकता फैलाएं।
स्थानीय और टिकाऊ उत्पादों का उपयोग करें।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लें।
छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
विश्व वन्यजीव दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे से जुड़े हैं। आंकड़े साफ बताते हैं कि हजारों पौधों की प्रजातियां खतरे में हैं और करोड़ों लोग उन पर निर्भर हैं।
अगर हम आज संरक्षण के लिए कदम उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ हवा, सुरक्षित भोजन और प्राकृतिक दवाइयां मिलती रहेंगी। वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे तो धरती स्वस्थ रहेगी, और धरती स्वस्थ रहेगी तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।