भारत उर्वरक की अपनी 70 प्रतिशत जरूरतों के लिए वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है, जिससे इसकी खाद्य सुरक्षा पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल का खतरा मंडराता रहता है
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, 1 अक्टूबर 2024 तक केवल 16 लाख मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध था। यह कुल आवश्यकता का केवल 29 प्रतिशत है