गर्म होती धरती के कारण भीषण सूखे के आसार, खाद्य सुरक्षा खतरे में

गर्म होती पृथ्वी में बसंत की सूखी मिट्टी से फसलें प्रभावित होंगी, यूरोप व अमेरिका समेत दुनिया भर में सूखे का प्रकोप बढ़ेगा।
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • गर्म होती धरती में मिट्टी जल्दी सूखती है और बारिश के बावजूद यूरोप व अमेरिका समेत दुनिया भर में फसलें सूखे से प्रभावित होती हैं।

  • बसंत ऋतु में मिट्टी की नमी कम होने से गर्मियों में गंभीर कृषि सूखे आते हैं, फसल उत्पादन घट सकता है।

  • पश्चिमी यूरोप, मध्य यूरोप, पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, उत्तरी दक्षिणी अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका सबसे अधिक सूखे के जोखिम वाले क्षेत्र हैं।

  • किसानों को सूखा सहिष्णु फसलें उगानी होंगी और जल प्रबंधन सुधारना होगा, ताकि भविष्य में फसलें सुरक्षित रह सकें।

  • जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके कारण हमारे कृषि क्षेत्र गंभीर खतरे में हैं। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया कि कैसे जलवायु परिवर्तन फसलों की सिंचाई और मिट्टी की नमी को प्रभावित कर रहा है। उनके शोध के अनुसार, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में फसलों के लिए सूखे के खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं, भले ही सालाना बारिश की मात्रा पहले से ज्यादा हो।

मिट्टी की नमी और सूखे का संबंध

वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्म मौसम में मिट्टी और पौधों से पानी बहुत तेजी से वाष्पित हो जाता है। इसका मतलब है कि खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है और बारिश के अतिरिक्त पानी से भी उसे पूरा नहीं भरा जा सकता। खासकर बसंत ऋतु में यह स्थिति ज्यादा गंभीर होती है। बसंत में मिट्टी की नमी जितनी कम होगी, गर्मियों में उतना ही गंभीर सूखा आएगा

यह भी पढ़ें
मिट्टी के सूखने और गर्म होने की घटनाओं में भारी वृद्धि, पौधों और जीवों पर संकट
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

यानी, अगर बसंत में खेतों की मिट्टी सूखी है, तो गर्मियों में फसलें पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित होंगी। यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले के अध्ययन अक्सर सालाना बारिश के औसत पर ध्यान देते थे, जिससे फसलों के लिए वास्तविक खतरे का पता नहीं चलता था।

सबसे प्रभावित क्षेत्र

नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, दुनिया के कुछ प्रमुख कृषि क्षेत्र सूखे के लिए सबसे संवेदनशील हैं। इनमें पश्चिमी यूरोप, मध्य यूरोप, पश्चिमी उत्तर अमेरिका और उत्तरी दक्षिणी अमेरिका शामिल हैं।

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग के चलते दक्षिण पूर्व एशिया में लगातार बढ़ेगी लू की घटनाएं: अध्ययन
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

दक्षिण अफ्रीका : ये क्षेत्र दुनिया की प्रमुख खाद्य उत्पादन क्षेत्रों में आते हैं। इसका मतलब है कि अगर यहां सूखे की घटनाएं बढ़ती हैं, तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

इतिहास से सीख

यूरोप में हाल के कुछ बड़े सूखे, जैसे 2003, 2010 और 2018 में, देखा गया कि ये सूखे बसंत या प्रारंभिक गर्मियों में सूखी मिट्टी के कारण बढ़े। इसका मतलब है कि मौसमी पैटर्न को समझना बहुत जरूरी है।

यह भी पढ़ें
मरुस्थलीकरण से मुकाबले के लिए जलवायु के अनुकूल खेती है समाधान
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

कृषि पर प्रभाव

भले ही बारिश का औसत बढ़े, गर्म मौसम में मिट्टी का तेजी से सूखना फसलों के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। इस स्थिति में किसानों को नए उपाय अपनाने होंगे -

  • सूखा सहिष्णु फसलें: ऐसी फसलें जो कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ सकें।

  • सिंचाई और जल प्रबंधन: पानी का सही उपयोग करना और खेतों में मिट्टी की नमी बनाए रखना।

यह भी पढ़ें
बिगड़ने की कगार पर पहुंचा प्रकृति का संतुलन: ग्लोबल टिपिंग प्वाइंट रिपोर्ट की चेतावनी
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

जलवायु परिवर्तन और समाधान

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम कम उत्सर्जन वाले समाधानों का पालन करें, तो सूखे की घटनाओं की बढ़ती संख्या को कम किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह रोक पाना मुश्किल है। इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के साथ-साथ किसानों को नई तकनीक और फसल संरक्षण उपायों पर भी ध्यान देना होगा।

यह अध्ययन हमें स्पष्ट रूप से दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन केवल बारिश कम होने का मामला नहीं है। बढ़ता तापमान मिट्टी और पौधों से पानी तेजी से सोखता है और फसलों के लिए सूखे की स्थिति पैदा करता है। यूरोप और पश्चिमी उत्तर अमेरिका जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्र विशेष रूप से जोखिम में हैं।

यह भी पढ़ें
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आएंगे छोटी अवधि में और अधिक भयानक तूफान
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

किसानों और नीति निर्माताओं को अब समय रहते उपाय करने होंगे। हमें सूखा सहिष्णु फसलें उगाने और जल प्रबंधन में सुधार करने पर जोर देना होगा। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन कम करना और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करना भी जरूरी है।

इस तरह, यदि हम वैज्ञानिक अनुसंधान के सुझावों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें, तो हम आने वाले वर्षों में फसलों को सूखे के खतरों से बचा सकते हैं और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in