

मेडागास्कर में डायमंड मेंढकों की सात नई प्रजातियां मिलीं, जिससे इस समूह की कुल ज्ञात प्रजातियों की संख्या बढ़कर 27 हुई।
वैज्ञानिकों ने पुराने संग्रहालय नमूनों से डीएनए लेकर मेंढकों की पहचान की और दशकों पुरानी वर्गीकरण संबंधी उलझनों को सुलझाया।
नई प्रजातियों की पहचान में डीएनए, शरीर की बनावट, हड्डियों और मेंढकों की आवाज का संयुक्त रूप से अध्ययन किया गया।
नई खोज से मेडागास्कर के जंगलों में संरक्षण क्षेत्रों को मजबूत और विस्तारित करने की योजनाओं को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार मिला।
वैज्ञानिकों का कहना है कि मेडागास्कर में डायमंड मेंढकों की कई और अनजान प्रजातियां अभी खोज और पहचान का इंतजार कर रही हैं।
मेडागास्कर के घने जंगलों और पत्तियों के नीचे छिपकर रहने वाले डायमंड मेंढकों की दुनिया वैज्ञानिकों की सोच से कहीं ज्यादा विविध है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने इन मेंढकों की सात नई प्रजातियों की पहचान की है। ये सभी मेंढक रोम्बोफ्राइन समूह से संबंधित हैं। इस खोज के बाद इस समूह में पहचानी गई प्रजातियों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी मेडागास्कर में कई ऐसी प्रजातियां हो सकती हैं, जिनकी औपचारिक पहचान नहीं हुई है। यह खोज केवल नई प्रजातियों के नाम रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण की योजनाओं को भी मदद मिल रही है।
पत्तियों के नीचे छिपा रहता है जीवन
डायमंड मेंढकों को ढूंढना आसान नहीं है। इनकी कई प्रजातियां अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जंगल की जमीन पर गिरी पत्तियों के नीचे बिताती हैं। जब वे बाहर आती हैं, तब भी कई प्रजातियां एक-दूसरे जैसी दिखाई देती हैं। इसी वजह से लंबे समय तक वैज्ञानिक इनके बीच के अंतर को पहचान नहीं पाए।
इन मेंढकों के शरीर का आकार भी अलग-अलग हो सकता है। कुछ मेंढक गोल और छोटे शरीर वाले होते हैं, जबकि कुछ के पैर लंबे होते हैं और वे काई वाले इलाकों में रहने के लिए बेहतर ढंग से अनुकूलित हैं। कुछ प्रजातियों के शरीर पर भूरे रंग के साथ नारंगी, सफेद या काले निशान भी दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर पर छिपे चमकीले रंग शिकारियों को अचानक डराने में मदद कर सकते हैं।
12 साल की मेहनत से सुलझी पुरानी पहेली
इस खोज के पीछे वैज्ञानिकों ने करीब 12 साल तक काम किया। इस दौरान मेडागास्कर में कई अभियानों के दौरान ऐसे मेंढक मिले, जो पहले से ज्ञात प्रजातियों से अलग दिखाई दिए। वैज्ञानिकों को समझ आ गया कि इनमें से कुछ नई प्रजातियां हो सकती हैं, लेकिन उनकी सही पहचान करना आसान नहीं था।
समस्या यह थी कि पुराने वैज्ञानिक नामों को आज मिलने वाले मेंढकों और उनके डीएनए से सही तरीके से जोड़ना मुश्किल था। कई दशक पहले जिन नमूनों के आधार पर प्रजातियों का नाम रखा गया था, उनके बारे में पर्याप्त आनुवंशिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
इसी समस्या को हल करने में आधुनिक डीएनए तकनीक ने बड़ी भूमिका निभाई। यह अध्ययन ‘वर्टिब्रेट जूलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
पुराने संग्रहालय नमूनों से मिला महत्वपूर्ण डीएनए
शोधकर्ताओं ने संग्रहालयों में सुरक्षित रखे पुराने मेंढकों के नमूनों से भी डीएनए हासिल किया। इस तरह पुराने नमूनों की आनुवंशिक जानकारी की तुलना आज मिले नए मेंढकों से की गई। इस प्रक्रिया को ‘म्यूजियोमिक्स’ कहा जाता है।
इसके साथ वैज्ञानिकों ने मेंढकों की बाहरी बनावट, हड्डियों की संरचना और उनकी आवाज का भी अध्ययन किया। इन सभी जानकारियों को एक साथ देखने से वैज्ञानिक यह पता लगाने में सफल हुए कि कौन-सा मेंढक किस प्रजाति से संबंधित है।
वैज्ञानिकों के लिए उन पुराने नमूनों का महत्व बहुत ज्यादा था, जिनका इस्तेमाल मूल रूप से प्रजातियों का वैज्ञानिक नाम तय करने के लिए किया गया था। इन नमूनों के डीएनए ने कई वर्षों से चली आ रही पहचान की उलझन को दूर करने में मदद की।
नई पहचान से संरक्षण को मिलेगी मदद
मेडागास्कर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता वाले क्षेत्रों में शामिल है। यहां कई ऐसे पौधे और जानवर पाए जाते हैं, जो दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में नहीं मिलते। लेकिन जंगलों की कटाई और उनके छोटे-छोटे हिस्सों में बंटने के कारण इन प्रजातियों पर खतरा बढ़ रहा है।
डायमंड मेंढकों की कई प्रजातियों के बारे में अभी भी बहुत कम जानकारी है। वैज्ञानिकों को यह तक पूरी तरह पता नहीं है कि वे कितनी संख्या में हैं, उनका प्रजनन कैसे होता है और उन्हें किस तरह के जंगल की जरूरत है। ऐसी जानकारी के बिना किसी प्रजाति के लिए सही संरक्षण योजना बनाना मुश्किल होता है।
नई खोज का असर संरक्षण योजनाओं में दिखाई भी देने लगा है। मार्च 2026 में मेडागास्कर के जैव विविधता 30×30 कार्यक्रम के तहत आयोजित एक संरक्षित क्षेत्र योजना कार्यशाला में नई पहचानी गई कुछ प्रजातियों, जिनमें रोम्बोफ्राइन क्वेंटिनी भी शामिल है, की जानकारी का इस्तेमाल नए और बड़े संरक्षित क्षेत्रों के प्रस्ताव तैयार करने में किया गया।
खोज अभी खत्म नहीं हुई
वैज्ञानिकों का कहना है कि मेडागास्कर के जंगलों में अभी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है। सात नई प्रजातियों की पहचान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन संभव है कि कई और डायमंड मेंढक अभी भी वैज्ञानिक पहचान का इंतजार कर रहे हों।
शोधकर्ताओं के अनुसार, हर नई प्रजाति लाखों वर्षों के अलग विकासक्रम की कहानी अपने साथ लेकर चलती है। इसलिए इन छोटे और छिपकर रहने वाले मेंढकों की पहचान केवल वैज्ञानिक जानकारी बढ़ाने का काम नहीं है, बल्कि यह मेडागास्कर के तेजी से घटते जंगलों और वहां मौजूद अनोखे जीवन को बचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।