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प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर तापमान इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो सीमित सहनशक्ति वाले कीट सबसे पहले प्रभावित होंगे और इसका असर पूरी पारिस्थितिकी पर पड़ेगा।
तेजी से पिघलती ध्रुवों पर जमा बर्फ; फोटो: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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जैसे-जैसे आर्कटिक-अंटार्कटिक में जमा बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे वहां हजारों वर्षों से छिपे सूक्ष्मजीव तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। इनकी बढ़ती गतिविधि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहा ...
फाइल फोटो: प्रदीप साहा/सीएसई
सीएसई की नई किताब "सांसों का आपातकाल" के पहले अध्याय में भारत में बढ़ते प्रदूषण के लिए ग्लोबल वार्मिंग व ब्लैक कार्बन की वजह से गंगा के तटीय मैदानों पर दिख रहे असर का विश्लेषण किया गया है
पानी की लगातार बढ़ती किल्लत; फोटो: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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डे जीरो अब कोई भविष्य की समस्या नहीं, यह केप टाउन, चेन्नई जैसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले ही दस्तक दे चुका है
वैज्ञानिकों ने खोजा कार्बन चक्र का नया पहलू, जो पृथ्वी को अत्यधिक ठंडक की ओर धकेल सकता है।
Dayanidhi
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नया वैज्ञानिक शोध बताता है कि पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणाली कभी-कभी ज्यादा ठंडक लाकर हिमयुग जैसी स्थिति बना सकती है।
ग्लोबल वार्मिंग से फसलों की पैदावार में भारी गिरावट: सदी के अंत तक 24 फीसदी नुकसान का अंदेशा
Lalit Maurya
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तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से रोजाना प्रति व्यक्ति 120 कैलोरी तक कम भोजन; किसानों के अनुकूलन के बावजूद बना रहेगा खतरा
स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है अच्छी नींद; फोटो: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पाया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते 'स्लीप एपनिया' के मामले बढ़कर दोगुने हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा
डाइमिथाइल सल्फाइड फाइटोप्लांकटन नामक सूक्ष्म समुद्री जीवों द्वारा बनाई जाती है। जब हवा में छोड़ी जाती है, तो यह कणों (एरोसोल) में बदल जाती है जो बादलों को बनाने में मदद करते हैं।
Dayanidhi
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डाइमिथाइल सल्फाइड को कभी-कभी कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) का "कूल ट्विन" कहा जाता है क्योंकि इसका ग्रह पर ठंडा प्रभाव पड़ता है, जबकि सीओ2 एक ग्रीनहाउस गैस है जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेवार है
Himalaya
Lalit Maurya
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अध्ययन से पता चला है कि जलवायु में जिस तेजी से बदलाव आ रहा है पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़-पौधे उनके साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं
अध्ययन के मुताबिक, दुनिया भर में आग लगने से हर साल लगभग 50,000 मौतें और 1,70,000 लोग घायल होते हैं।
Dayanidhi
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अध्ययन के मुताबिक, वाहनों में आग लगने की घटनाओं में 11.6 फीसदी की वृद्धि और बाहरी आग में 22.2 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।
अत्यधिक ऊंचाई वाले पर्वतों में बदलाव बारिश के पैटर्न में बदलाव के बजाय बढ़ते तापमान के कारण होते हैं, जो क्षेत्र में जल भंडारण और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर भयंकर तरीके से प्रभाव डालते हैं।
Dayanidhi
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जिन इलाकों में बारिश अधिक होती है इसके और बढ़ने का अनुमान है, जो गर्मियों और शरद ऋतु के दौरान एशिया के अत्यधिक ऊंचाई वाले पर्वतों के 80 फीसदी से अधिक हिस्से को कवर करेगा।
नब्बे प्रतिशत से अधिक भारतीय ग्लोबल वार्मिंग से चिंतित!
Anil Ashwani Sharma
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येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सेंटर फॉर वोटिंग ओपिनियन एंड ट्रेंड्स इन इलेक्शन रिसर्च का सर्वेक्षण
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