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डीआरसी में 20 जुलाई तक इबोला के 2,473 पुष्ट मामले दर्ज हुए, जबकि संक्रमण पांच प्रांतों तक फैल चुका है।
Dayanidhi
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कांगो में बढ़ती हिंसा से इबोला नियंत्रण अभियान प्रभावित, उत्तरी किवु में सुरक्षा संकट के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और राहत कार्यों की रफ्तार हुई धीमी
रुद्रथ अविनाशी और अवंतिका गोस्वामी
Rudrath Avinashi
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ऊर्जा परिवर्तन का मुद्दा महज समिति उत्सर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का विषय बन चुका है
भट्ठों पर काम आमतौर पर जून-जुलाई तक चलता है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता मजदूरों की कमाई को और अस्थिर बना देती है। फोटो: मीनाक्षी अंबेडकर
Minakshi Ambedakar
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कानूनों और कागजी सुरक्षा के बावजूद गुजरात के ईंट-भट्टों पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता बंधुआनुमा श्रम, अनौपचारिक कर्ज, बाल मजदूरी और शिक्षा से वंचित होते बच्चे विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं
फोटो: आईस्टॉक
DTE Staff
3 min read
डाउन टू अर्थ के एक सर्वे में लगभग 88 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उन्हें जलवायु बदलती हुई महसूस हो रही है। वहीं 67 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि इसका असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने लगा है
हंगर वाच की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि हर 20 में से एक परिवार को अक्सर रात का खाना खाये बगैर सोना पड़ा। फोटो: अमित शंकर
DTE Staff
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संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने रूसी-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए देशों से खाद्य उत्पादन बढ़ाने और निर्यात बंद नहीं करने का आह्वान किया
Photo : Wikimedia Commons
Dayanidhi
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किसान नैनो तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करके फसल की उपज में वृद्धि कर सकते हैं। इससे दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
भोजन की बर्बादी से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 10 प्रतिशत तक योगदान और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है।
Dayanidhi
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विश्व सफाई दिवस: खाने की बर्बादी रोकने से साफ शहर, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर खाद्य व्यवस्था की ओर बढ़ेगा दुनिया का कदम
विविध खाद्य स्रोत और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग संकट के दौरान भोजन की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Dayanidhi
4 min read
आपदा के बाद भूख बढ़ना तय नहीं, मजबूत खाद्य व्यवस्था, बेहतर तैयारी, विविध आपूर्ति स्रोत, तकनीक और सामुदायिक सहयोग से खाद्य संकट का असर घटाया जा सकता है।
दुनिया एक तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी, सूखे और अनिश्चित मौसम का सामना कर रही है, तो दूसरी तरफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में खाद्य बाजारों में कीमतों का बढ़ना केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं है, यह करोड़ों परिवारों की रसोई और खाने की थाली पर बढ़ता दबाव है। फोटो: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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मौसम की मार, अल नीनो, युद्ध और व्यापार में आ रही बाधाओं ने खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि चीनी की कीमतों में करीब 12 फीसदी का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
भारत खाद्य तेल की घरेलू जरूरत का करीब 56 प्रतिशत आयात करता है, आत्मनिर्भरता के लिए सरसों उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
Dayanidhi
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सरसों की नई हाइब्रिड किस्मों से बढ़ेगा तेल उत्पादन, वैज्ञानिकों ने खोजा परागण रोकने वाले जीन का रहस्य, आत्मनिर्भरता की उम्मीद हुई मजबूत
उर्वरक आयात पर खतरनाक निर्भरता: भू-राजनीतिक झटकों के बीच भारत की खाद्य सुरक्षा पर बढ़ता जोखिम
Shagun
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भारत उर्वरक की अपनी 70 प्रतिशत जरूरतों के लिए वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है, जिससे इसकी खाद्य सुरक्षा पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल का खतरा मंडराता रहता है
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