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भट्ठों पर काम आमतौर पर जून-जुलाई तक चलता है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता मजदूरों की कमाई को और अस्थिर बना देती है। फोटो: मीनाक्षी अंबेडकर
Minakshi Ambedakar
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कानूनों और कागजी सुरक्षा के बावजूद गुजरात के ईंट-भट्टों पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता बंधुआनुमा श्रम, अनौपचारिक कर्ज, बाल मजदूरी और शिक्षा से वंचित होते बच्चे विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं
फोटो: आईस्टॉक
DTE Staff
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डाउन टू अर्थ के एक सर्वे में लगभग 88 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि उन्हें जलवायु बदलती हुई महसूस हो रही है। वहीं 67 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि इसका असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने लगा है
हंगर वाच की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि हर 20 में से एक परिवार को अक्सर रात का खाना खाये बगैर सोना पड़ा। फोटो: अमित शंकर
DTE Staff
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संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने रूसी-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए देशों से खाद्य उत्पादन बढ़ाने और निर्यात बंद नहीं करने का आह्वान किया
Photo : Wikimedia Commons
Dayanidhi
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किसान नैनो तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करके फसल की उपज में वृद्धि कर सकते हैं। इससे दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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होर्मुज तनाव, महंगे ईंधन और मौसम की मार का असर अब सीधे लोगों की थाली तक पहुंच गया है, जिससे दुनिया भर में कमजोर तबके के लिए दो वक्त की रोटी तक जुटाना मुश्किल होता जा रहा है
File Photo: Agnimirh Basu
Raju Sajwan
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एफएओ ने आगाह किया कि किसान पहले से ही बहुत कम मुनाफे पर खेती कर रहे हैं। वर्तमान संकट की वजह से वे खेती छोड़ने या दिवालिया होने को मजबूर हो सकते हैं
Photo: Agnimirh Basu
DTE Staff
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संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट से पिछले पांच माह से खाद्य कीमतों में गिरावट का सिलसिला थम गया है
विश्व में लगभग 73.3 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा से प्रभावित हैं, जिनके लिए दलहन सस्ता, टिकाऊ और पोषक समाधान प्रदान करते हैं।
Dayanidhi
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विश्व दलहन दिवस: वैश्विक आंकड़े दर्शाते हैं कि बढ़ती दलहन खपत, खाद्य सुरक्षा, पोषण सुधार और पर्यावरण संरक्षण में भूमिका निभा रही है
फोटो: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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दुनिया में दूध और चीनी के दाम घटने से महंगाई का दबाव कुछ कम हुआ है, हालांकि तेल और चावल की बढ़ती कीमतें चुनौती बनी हुई हैं
जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन कम करना जरूरी है, लेकिन सूखे के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
Dayanidhi
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गर्म होती पृथ्वी में बसंत की सूखी मिट्टी से फसलें प्रभावित होंगी, यूरोप व अमेरिका समेत दुनिया भर में सूखे का प्रकोप बढ़ेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
Lalit Maurya
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वैश्विक स्तर पर 119 खाद्य श्रृंखलाओं के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इंसान समेत शीर्ष शिकारी जीवों पर भी इन ‘फॉरएवर केमिकल्स’ का खतरा मंडरा रहा है
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Down to Earth- Hindi
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