

पंजाब के रूपनगर से ओडिशा के कटक तक पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दो मामलों ने जमीनी स्तर पर नियमों के पालन और निगरानी की चुनौतियों को सामने रखा है।
रूपनगर में 171 स्टोन क्रशरों की जांच में केवल 10 पूरी तरह नियमों के अनुरूप मिले, जबकि 72 नियमों का उल्लंघन कर रहे थे और 60 में आंशिक अनुपालन पाया गया।
25 क्रशर बंद मिले और चार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई। एनजीटी में सुनवाई के दौरान क्षेत्र में अवैध खनन जारी रहने का आरोप भी सामने आया।
दूसरी ओर, ओडिशा के कटक जिले की हाटा पोखरी की सफाई के बाद प्रशासन ने जलाशय की नियमित निगरानी शुरू की है। हालांकि, तटबंध के एक हिस्से पर अतिक्रमण का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण उसे हटाने की कार्रवाई फिलहाल अटकी हुई है।
पोखरी की सुरक्षा के लिए दीवार और तारबंदी की योजना बनाई गई है। साथ ही घर-घर कचरा एकत्र करने, आठ सामुदायिक कंपोस्ट पिट और चार नए पिट बनाने की तैयारी की गई है।
दोनों मामले बताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सफाई या नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है।
पंजाब के रूपनगर जिले में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे स्टोन क्रशरों का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने पहुंच गया है। 9 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जिले में चल रहे क्रशरों की पर्यावरणीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठे हैं।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने 7 अगस्त 2026 को एनजीटी में एक एडिशनल स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कुल 171 स्टोन क्रशरों की जांच की गई।
इनमें से 25 क्रशर बंद पाए गए, जबकि 72 नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इसके अलावा 60 क्रशर आंशिक रूप से नियमों का पालन करते मिले। वहीं केवल 10 क्रशर ही पूरी तरह नियमों के अनुरूप पाए गए।
अवैध खनन के लगे आरोप
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नियमों के उल्लंघन के मामले में चार स्टोन क्रशरों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई है। आंकड़े बताते हैं कि जांच किए गए क्रशरों में से करीब 77 फीसदी या तो बंद थे, नियमों का उल्लंघन कर रहे थे या फिर आंशिक रूप से ही पालन कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि रूपनगर क्षेत्र में अवैध खनन अब भी जारी है। इस पर पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की जांच की जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
रूपनगर में स्टोन क्रशरों और अवैध खनन से जुड़े मामलों का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। अनियंत्रित खनन से पहाड़ियों, मिट्टी, जलस्रोतों और आसपास रहने वाले लोगों के जीवन पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे में एनजीटी के सामने पेश किए गए ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिले में पर्यावरणीय नियमों के पालन की निगरानी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ओडिशा: हाटा पोखरी की सफाई के बाद बढ़ी निगरानी, अतिक्रमण हटाने में कानूनी अड़चन
ओडिशा के कटक जिले के नियाली तहसील के पुबाखंडा मौजा स्थित तालाब (हाटा पोखरी) और उसके तटबंध की सफाई कर दी गई है। जलाशय की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रशासन नियमित निगरानी भी कर रहा है। हालांकि, पोखरी के तटबंध के एक हिस्से पर हुआ अतिक्रमण अभी भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
9 सितंबर 2026 को इस बारे में कटक के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, पोखरी के तटबंध के एक हिस्से पर अतिक्रमण किया गया है। इस जमीन को लेकर पहले से ही अतिक्रमण का मामला चल रहा है।
नियाली के तहसीलदार ने अतिक्रमणकारी को जमीन खाली करने का नोटिस भी जारी किया था। लेकिन अतिक्रमणकारी ने इस कार्रवाई के खिलाफ ओडिशा हाईकोर्ट में मामला दायर कर दिया है। मामला लंबित होने के कारण फिलहाल तहसीलदार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं कर सके हैं।
कचरा प्रबंधन को मजबूत करने की तैयारी
नियाली के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के मुताबिक, नियाली ग्राम पंचायत में घर-घर से ठोस कचरा इकट्ठा करने के लिए तीन महिला स्वयं सहायता समूहों को लगाया गया है। एकत्र कचरे को नियाली ग्राम पंचायत में मौजूद कम्युनिटी कंपोस्ट गड्ढों में ले जाकर रखा जा रहा है।
फिलहाल पंचायत में आठ कम्युनिटी कंपोस्ट पिट उपलब्ध हैं। बढ़ती जरूरत को देखते हुए ग्राम पंचायत ने ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत चार और कम्युनिटी कंपोस्ट पिट बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया है।
पोखरी की सुरक्षा के लिए बनेगी दीवार और तारबंदी
हाटा पोखरी को अतिक्रमण और अन्य दबावों से बचाने के लिए उसके पश्चिमी हिस्से में दीवार और तारबंदी करने की भी तैयारी है। इसके लिए करीब 4 लाख रुपए का अनुमान तैयार किया गया है और जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए नियाली के बीडीओ ने 28 जुलाई 2026 को कटक जिला परिषद के मुख्य विकास अधिकारी-सह-कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजकर 1.2 लाख रुपए के बजट प्रावधान को लागू करने का अनुरोध किया है।
यह राशि कचरे को सेग्रीगेशन शेड से कटक नगर निगम के मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) केंद्रों तक पहुंचाने पर खर्च की जानी है। इसके लिए पंचायती राज एवं पेयजल विभाग, ओडिशा से धनराशि जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।
हाटा पोखरी की सफाई और नियमित निगरानी से जलाशय को संरक्षित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा है, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब हाईकोर्ट में लंबित मामले के फैसले पर निर्भर है।