

ललितपुर के छिल्ला गांव में स्टोन क्रशर के कारण पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हो रहा है, जिससे मकानों में दरारें और स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो रहे हैं।
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है और एक संयुक्त समिति गठित की है जो दो सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
आरोप है कि स्टोन क्रशर में पत्थर तोड़ने के लिए जमीन में ड्रिलिंग कर अत्यधिक मात्रा में विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इलाके में लगातार कंपन महसूस हो रही है। स्थिति यह है कि स्कूल बिल्डिंग और कई मकानों में दरारें आ गई हैं।
उत्तर प्रदेश में ललितपुर की महरोनी तहसील के छिल्ला गांव में चल रहे एक स्टोन क्रशर पर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 5 फरवरी 2026 को संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।
ट्रिब्यूनल ने राज्य के मुख्य सचिव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन) को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके साथ ही ललितपुर के जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और त्रिदेव स्टोन क्रशर से भी अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
एनजीटी ने मामले की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है। इस समिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलाधिकारी कार्यालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
विस्फोटकों के भारी इस्तेमाल से कंपन और दरारें
अधिकरण ने निर्देश दिया कि समिति दो सप्ताह के भीतर बैठक कर साइट का दौरा करे, तथ्यों की पुष्टि करे और कानून के अनुसार सुधार के लिए जरुरी कदम उठाए।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि स्टोन क्रशर में पत्थर तोड़ने के लिए जमीन में ड्रिलिंग कर अत्यधिक मात्रा में विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इलाके में लगातार कंपन महसूस हो रही है। स्थिति यह है कि स्कूल बिल्डिंग और कई मकानों में दरारें आ गई हैं।
आशंका जताई गई है कि यदि यह गतिविधि जारी रही तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
उड़ती धूल से बढ़ रहा सांसों पर खतरा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि क्रशर खुले में चल रहा है, जिससे उड़ती धूल आसपास के लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही है। ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। चिंता की बात यह भी है कि स्टोन क्रशर स्टेट हाईवे से मात्र 210 मीटर की दूरी पर स्थित है, जो नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि संयुक्त समिति की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या प्रशासन पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई कर ग्रामीणों की जान, स्वास्थ्य और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाता है।
एनजीटी पहुंचा मेरठ कॉलेज परिसर में पेड़ों को अवैध रूप से काटने का मामला, जांच समिति गठित
मेरठ कॉलेज परिसर और उससे सटे जाफरा बाग में बड़ी संख्या में पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला 5 फरवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उठाया।
ट्रिब्यूनल ने इस गंभीर आरोप की वास्तविक स्थिति की जांच और सुधार के लिए जरूरी कदम सुझाने के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है, ताकि पर्यावरण नियमों के अनुसार सही कार्रवाई की जा सके।
एनजीटी के आदेशानुसार इस समिति में उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मेरठ के जिलाधिकारी और मेरठ के प्रभागीय वन अधिकारी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ट्रिब्यूनल ने समिति को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर मौके का निरीक्षण करने, वास्तविक स्थिति की पुष्टि करने और कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई सुझाने को कहा है।
समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपनी होगी। साथ ही रिपोर्ट की प्रति संबंधित अधिकारियों को भी भेजनी होगी, ताकि पर्यावरण कानूनों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत जरूरी कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
यह मामला एनजीटी में एक आवेदन के जरिए लाया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि मेरठ कॉलेज परिसर और उससे जुड़े जाफरा बाग में हजारों हरे पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कॉलेज की प्रबंधन समिति के सचिव पर आरोप है कि उन्होंने परिसर से 100 से अधिक और जाफरा बाग से 1,000 से ज्यादा पेड़ कटवाकर गैर-कानूनी तरीके से बेच दिए।
आवेदक विजित तलियान ने अपने आवेदन के समर्थन में मेरठ के जिलाधिकारी को की गई शिकायतों की प्रतियां और समाचार पत्रों की कतरनें भी संलग्न की हैं। अब एनजीटी की जांच यह तय करेगी कि मेरठ के इस ऐतिहासिक परिसर में पेड़ों की कटाई केवल लापरवाही थी या पर्यावरण कानूनों का खुला उल्लंघन।
महाराष्ट्र: उम्ब्राज में खुले में कचरा जलाने का आरोप, एनजीटी ने पुणे पीठ भेजा मामला
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने उम्ब्राज गांव में कथित अवैध ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े मामले को पश्चिमी पीठ, पुणे स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। मामला महाराष्ट्र के सतारा जिले के कराड तालुका का है। इस मामले में अब 25 फरवरी 2026 को पुणे पीठ सुनवाई करेगी।
आवेदक का कहना है गांव में आवासीय इलाकों के पास कचरा खुले में डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, उस कचरे को खुले स्थानों पर जलाया भी जा रहा है, जिससे उठने वाला धुआं और बदबू घरों के भीतर तक पहुंच रही है। इससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत द्वारा मृत पशुओं और पोल्ट्री अपशिष्ट को भी उसी क्षेत्र में डंप किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
एनजीटी के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की सुनवाई तेजी से होगी और गांववासियों को प्रदूषण व स्वास्थ्य संकट से राहत मिल सकेगी।