

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेणुका नदी के पास अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रशर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जांच समिति के गठन का आदेश दिया है।
समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी होगी। याचिका में आरोप है कि क्रशर बिना वैधानिक मंजूरी के चल रहा है, जिससे वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण हो रहा है। मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले का है।
आरोप है कि यह स्टोन क्रशर बिना अनिवार्य वैधानिक मंजूरियों, जैसे पर्यावरण स्वीकृति, स्थापना की अनुमति और संचालन की सहमति के चल रहा है।
अवैध स्टोन क्रशिंग से क्षेत्र में गंभीर वायु और ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। साथ ही जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ रहा है। इसकी वजह से कृषि भूमि का क्षरण हुआ है और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ा है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुधन के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की केंद्रीय पीठ ने 28 जनवरी 2026 को रेणुका नदी के पास संचालित स्वैन स्टोन क्रशर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त जांच समिति के गठन का आदेश दिया है। यह आदेश अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रशर को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले का है।
एनजीटी के निर्देशानुसार इस समिति में सूरजपुर के जिला कलेक्टर और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति को साइट का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का विवरण ट्रिब्यूनल को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होनी है।
इस बाबत दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह स्टोन क्रशर बिना अनिवार्य वैधानिक मंजूरियों, जैसे पर्यावरण स्वीकृति, स्थापना की अनुमति और संचालन की सहमति के चल रहा है। इतना ही नहीं, यह क्रशर आवासीय इलाकों के बेहद करीब और रेणुका नदी के किनारे स्थित है, जो आसपास के करीब 18 गांवों के लिए पीने के पानी और सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।
आवेदन के मुताबिक, अवैध स्टोन क्रशिंग से क्षेत्र में गंभीर वायु और ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। साथ ही जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ रहा है। इसकी वजह से कृषि भूमि का क्षरण हुआ है और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ा है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुधन के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जिला प्रशासन और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जो वैधानिक जिम्मेदारियों की गंभीर उपेक्षा को दर्शाता है।
कागजों में मंजूरी नहीं, जमीन पर निर्माण: एनजीटी पहुंचा राजारहाट हाउसिंग प्रोजेक्ट मामला
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट, न्यू टाउन में एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बिना किसी पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के बनाया जा रहा है। यह मामला 27 जनवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ के समक्ष सामने आया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘ओइटिका’ नामक इस परियोजना का निर्माण पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए किया जा रहा है। निर्माण गतिविधियों के कारण इलाके में मौजूद एक जल स्रोत का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही परियोजना के लिए बिना अनुमति के भूजल का दोहन भी किया जा रहा है।
आवेदक ने इस संबंध में संबंधित विभागों से शिकायतें कीं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने पश्चिम बंगाल के पर्यावरण विभाग, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी और 'ओइटिका’ वेलफेयर सोसायटी सहित अन्य पक्षों से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।