वैज्ञानिकों ने खोजा पीले मंकीफ्लावर का रहस्य; समुद्र की खारी हवाओं में भी नहीं मुरझाता यह पौधा

खारे पानी से बचने का अनोखा हुनर: समुद्र किनारे उगने वाला पीला मंकीफ्लावर नमक को रोककर और सहकर भी रखता है खुद को हरा-भरा
तटीय पीला मंकीफ्लावर खारी समुद्री हवाओं में भी जीवित रहता है, जबकि कई दूसरे पौधे नमक के कारण मुरझा जाते हैं।
तटीय पीला मंकीफ्लावर खारी समुद्री हवाओं में भी जीवित रहता है, जबकि कई दूसरे पौधे नमक के कारण मुरझा जाते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • तटीय पीला मंकीफ्लावर खारी समुद्री हवाओं में भी जीवित रहता है, जबकि कई दूसरे पौधे नमक के कारण मुरझा जाते हैं।

  • वैज्ञानिकों ने पाया कि समुद्र किनारे के पौधों की पत्तियों में अंदरूनी पौधों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम सोडियम होता है।

  • तटीय मंकीफ्लावर नमक को पत्तियों में प्रवेश करने से रोकता है और अंदर पहुंचने पर भी उसे बेहतर ढंग से सहन करता है।

  • शोध के अनुसार, पौधा देर से फूलता है, जिससे तेज हवाओं और समुद्री नमक के अधिक संपर्क से बचने में मदद मिलती है।

  • वैज्ञानिक अब इसके जिम्मेदार जीन खोज रहे हैं, जिनसे भविष्य में नमक सहने वाली फसलें विकसित करने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका के ओरेगन और कैलिफोर्निया के समुद्री तटों पर एक छोटा-सा पौधा बेहद कठिन परिस्थितियों में भी हरा-भरा रहता है। इसका नाम पीला मंकीफ्लावर है। समुद्र से आने वाली तेज और खारी हवाएं जहां दूसरे पौधों को नुकसान पहुंचाती हैं, वहीं यह पौधा इन परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रहता है। अब वैज्ञानिकों ने यह समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कि आखिर यह पौधा नमक से खुद को कैसे बचाता है।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डेविड लोरी और उनकी टीम ने इस पौधे की अलग-अलग जगहों पर पाई जाने वाली किस्मों का अध्ययन किया। शोध से पता चला कि समुद्र के पास रहने वाले मंकीफ्लावर में नमक से बचने की खास क्षमता विकसित हो गई है। यह शोध अमेरिकन जर्नल ऑफ बॉटनी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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समुद्र के किनारे जीवन आसान नहीं

समुद्र के पास रहने वाले पौधों को लगातार नमक का सामना करना पड़ता है। तेज हवाओं के साथ समुद्र का खारा पानी पौधों की पत्तियों पर जम जाता है। यह नमक पौधों के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। इससे उनकी पत्तियां सूख सकती हैं, पौधों की वृद्धि रुक सकती है और कई बार पौधा मर भी सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र के किनारे तेज हवा चलने पर खारे पानी की महीन बूंदें काफी दूर तक पहुंच जाती हैं। वहां मौजूद पौधों की पत्तियों पर नमक की एक परत तक जम सकती है। इसके बावजूद पीला मंकीफ्लावर इन परिस्थितियों में लंबे समय तक जीवित रहता है।

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प्रयोगशाला में बनाया ‘साल्टमोबाइल’

इस रहस्य को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने अपनी प्रयोगशाला में समुद्र के किनारे जैसी परिस्थितियां बनाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने एक खास उपकरण तैयार किया, जिसे उन्होंने मजाकिया अंदाज में ‘साल्टमोबाइल’ नाम दिया।

यह एक छोटी गाड़ी जैसी व्यवस्था थी, जिसमें एयरब्रश और समुद्री पानी की बोतलें लगाई गई थीं। इसकी मदद से पौधों पर समुद्री पानी की बारीक बूंदों का छिड़काव किया गया। वैज्ञानिकों ने ओरेगन और कैलिफोर्निया के पांच तटीय और पांच अंदरूनी इलाकों से मंकीफ्लावर के पौधे लिए। इन पौधों पर खारे पानी का छिड़काव किया गया और बाद में उनकी पत्तियों में मौजूद सोडियम की मात्रा मापी गई।

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तटीय पौधों की पत्तियों में कम नमक

परिणाम काफी दिलचस्प थे। समुद्र के किनारे पाए जाने वाले पौधों की पत्तियों में अंदरूनी इलाकों के पौधों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम सोडियम पाया गया

इससे वैज्ञानिकों को पता चला कि तटीय मंकीफ्लावर अपने पत्तों के अंदर नमक जाने से बेहतर तरीके से रोकते हैं। हालांकि वैज्ञानिक यह पता नहीं लगा पाए कि पत्तियों की कौन-सी खास बनावट इस काम में मदद करती है। उन्होंने पत्तियों के छिद्रों और पानी की बूंदों के व्यवहार जैसी कई चीजों की जांच की, लेकिन इनमें से कोई भी अंतर नमक को रोकने की क्षमता की पूरी व्याख्या नहीं कर सका।

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नमक अंदर पहुंच जाए तो भी मुकाबला

शोध में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। यदि नमक किसी तरह तटीय पौधों की पत्तियों के अंदर पहुंच भी जाता है, तो ये पौधे उसे ज्यादा अच्छी तरह सहन कर लेते हैं।

वैज्ञानिकों ने पत्तियों के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर उन्हें अलग-अलग नमक वाले घोल में रखा। इस प्रयोग में तटीय पौधों के पत्तों में नुकसान के संकेत अंदरूनी पौधों की तुलना में देर से दिखाई दिए। इसका मतलब है कि इन पौधों के पास नमक से बचने के लिए दो तरह की सुरक्षा है। वे पहले नमक को अंदर जाने से रोकते हैं और अगर नमक अंदर पहुंच जाए तो उसे सहन करने की क्षमता भी रखते हैं।

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फूल खिलने का समय भी बचाता है

एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि तटीय मंकीफ्लावर मौसम में थोड़ी देर से फूल और बीज बनाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। उस समय समुद्र के किनारे हवाएं अपेक्षाकृत कम तेज होती हैं। इस तरह पौधे नमक की सबसे तेज मार से बच जाते हैं।

भविष्य में फसलों के लिए मददगार हो सकता है शोध

वैज्ञानिक अब उन जीनों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से तटीय मंकीफ्लावर नमक को रोकने और सहन करने में सक्षम हुए हैं।

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इस शोध का महत्व केवल समुद्र के किनारे रहने वाले पौधों तक सीमित नहीं है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर, तेज तूफान और समुद्री पानी का जमीन में पहुंचना भविष्य में कई पौधों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। इसके अलावा सड़कों पर इस्तेमाल होने वाला नमक भी कई पौधों को नुकसान पहुंचाता है।

ऐसे में मंकीफ्लावर की प्राकृतिक क्षमता को समझकर वैज्ञानिक भविष्य में ऐसी फसलें विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं, जो अधिक नमकीन वातावरण में भी अच्छी तरह उग सकें। यह छोटा-सा पौधा आने वाले समय में खेती और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी सीख दे सकता है।

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