

इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग से बोर्नियन ओरांग उटान की आधी से ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
धुएं के कारण ओरांग उटान पर शारीरिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनकी ऊर्जा जरूरत और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़े हैं।
सुमात्रा और बोर्नियो में गिबन की पांच प्रजातियों के आवास भी आग और जहरीले धुएं से प्रभावित हुए हैं।
इंडोनेशिया में अब तक 100 वन्यजीव बचाए गए, जिनमें 53 ओरांग उटान शामिल हैं, सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने भविष्य की आग रोकने के लिए पीटभूमि संरक्षण, जलभराव, वनों की रक्षा और पुनर्स्थापन पर जोर दिया।
इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। कई इलाकों में कई हफ्तों से आग जल रही है। इससे जंगलों में रहने वाले जानवरों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सबसे ज्यादा चिंता दुनिया के बेहद दुर्लभ और संकटग्रस्त जानवर बोर्नियन ओरांग उटान को लेकर है।
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के अनुसार, जिन इलाकों में आग लगी है, वहां बोर्नियो की करीब 52 प्रतिशत ओरांग उटान आबादी रहती है। इनमें ओरांग उटान की बची हुई 20 बड़ी आबादियों में से 13 भी शामिल हैं। ऐसे में जंगलों की आग इस प्रजाति के भविष्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।
धुएं से भी हो रहा नुकसान
जंगलों में लगी आग का नुकसान केवल पेड़ों और जमीन तक सीमित नहीं है। आग से निकलने वाला धुआं भी जानवरों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। आईयूसीएन के अनुसार, धुएं से भरे वातावरण में रहने वाले ओरांग उटान के शरीर और व्यवहार में बदलाव देखे गए हैं।
धुएं के दौरान ओरांग उटान ज्यादा खाने और आराम करने के बावजूद शरीर में जमा वसा का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण शरीर पर बढ़ा हुआ दबाव हो सकता है। धुएं और खराब वातावरण के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।
ओरांग उटान के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि वे पहले ही जंगलों के कटने और प्राकृतिक आवास कम होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
गिबन भी आग और धुएं की चपेट में
ओरांग उटान के अलावा जंगलों की आग का असर गिबन की कई प्रजातियों पर भी पड़ रहा है। संरक्षण संगठन के अनुसार, सुमात्रा और बोर्नियो में रहने वाली गिबन की पांच प्रजातियों के आवास भी आग से प्रभावित हुए हैं।
गिबन और दूसरे वन्यजीव उसी धुएं में सांस ले रहे हैं, जिसमें आसपास रहने वाले लोग सांस ले रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। आग के कारण उनके जंगल नष्ट होने के साथ-साथ उनके रोजमर्रा के व्यवहार में भी बदलाव आता है। भोजन ढूंढने, सुरक्षित जगह पर रहने और दूसरे जानवरों के साथ सामान्य व्यवहार करने में उन्हें परेशानी हो सकती है।
100 जानवरों को बचाया गया
आग के बीच वन्यजीवों को बचाने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार तक करीब 100 जानवरों को बचाया गया था। इनमें 53 ओरांग उटान शामिल थे। हालांकि संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आग लगने के बाद जानवरों को बचाना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लंबे समय तक काम करने की जरूरत है।
दलदली जमीन और जंगल बचाने पर जोर
संरक्षण विशेषज्ञों ने पीट भूमि यानी ऐसी दलदली जमीन, जिसमें बड़ी मात्रा में कार्बन जमा रहता है, को बचाने और उसमें पानी बनाए रखने पर जोर दिया है। इन क्षेत्रों के सूखने पर उनमें आग तेजी से फैल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों की कटाई और जमीन से पानी निकालने की समस्या को भी कम करना जरूरी है। जिन जंगलों में आग लग चुकी है, उन्हें दोबारा दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल करने से बचाना और वहां जंगल को फिर से विकसित करना भी महत्वपूर्ण है।
आग से प्रभावित क्षेत्र के आंकड़ों में अंतर
इंडोनेशिया सरकार के अनुसार, जनवरी से जुलाई के बीच देश में दो लाख दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन आग से प्रभावित हुई। वहीं, नुसंतारा एटलस परियोजना ने जनवरी से अगस्त के बीच करीब नौ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आग लगने का अनुमान लगाया है।
दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर है। इसका कारण आंकड़े जुटाने के तरीके और समय की अलग-अलग अवधि हो सकती है। लेकिन दोनों ही आंकड़े बताते हैं कि जंगलों की आग बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर रही है।
संरक्षण के लिए लंबे प्रयास की जरूरत
इंडोनेशिया में लगी जंगलों की आग ने एक बार फिर दिखाया है कि जंगलों की रक्षा केवल पेड़ों को बचाने तक सीमित नहीं है। जंगल पर निर्भर ओरांग उटान, गिबन और दूसरे वन्यजीवों का भविष्य भी इससे जुड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव अभियान के साथ-साथ जंगलों की आग को रोकने, पीट भूमि को सुरक्षित रखने, जंगलों की कटाई कम करने और जले हुए क्षेत्रों को फिर से हरा बनाने पर लगातार काम करना होगा। इससे न केवल वन्यजीवों को सुरक्षित जगह मिलेगी, बल्कि भविष्य में आग और उसके धुएं से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।