जंगलों के सफाए से लेकर इंसानों से बढ़ते संघर्ष के कारण विलुप्ति के कगार पर पहुंचे ओरांग उटान

अंतर्राष्ट्रीय ओरांग उटान दिवस: जंगलों की कटाई, अवैध शिकार और इंसानों से बढ़ता संघर्ष ओरांग उटान के अस्तित्व पर संकट बढ़ा रहा है, संरक्षण के लिए जंगल बचाना जरूरी है।
ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है।
ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • जंगलों की कटाई से ओरांग उटान का प्राकृतिक आवास तेजी से घट रहा है, जिससे उनके अस्तित्व पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

  • अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार के कारण बड़ी संख्या में ओरांग उटान मारे जाते हैं या उनके बच्चों को पकड़ लिया जाता है।

  • खाने की तलाश में खेतों तक पहुंचने वाले ओरांग उटान इंसानों के संघर्ष का शिकार बनते हैं और कई बार हिंसा झेलते हैं।

  • तीनों ओरांग उटान प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं, जबकि उनकी धीमी प्रजनन दर संख्या बढ़ाने में बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  • ओरांग उटान को बचाने के लिए जंगलों की सुरक्षा, पुनर्वास, अवैध शिकार पर रोक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है।

दुनिया भर में हर साल 19 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय ओरांग उटान दिवस मनाया जाता है। ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है। वे औजारों का इस्तेमाल कर सकते हैं, समस्याओं को हल कर सकते हैं और अपने साथियों के साथ मजबूत सामाजिक संबंध बनाते हैं। वे दुख और बिछड़ने जैसी भावनाओं को भी महसूस करते हैं।

लेकिन आज यही जीव तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रहा है। जंगलों के काटे जाने, अवैध शिकार, वन्यजीवों का व्यापार और इंसानों के साथ बढ़ता संघर्ष उनके अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

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ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है।

दुनिया में ओरंगुटान की तीन प्रजातियां

आज ओरांग उटान की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें सुमात्राई ओरांग उटान, बोर्नियन ओरांग उटान और तपानुली ओरांग उटान शामिल हैं। तीनों प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं।

तपानुली ओरांग उटान को अलग प्रजाति के रूप में साल 2017 में पहचाना गया था। इसकी संख्या करीब 700 मानी जाती है। इतनी कम संख्या इसे दुनिया के सबसे दुर्लभ बड़े वानरों में शामिल करती है।

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ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है।

ओरांग उटान मुख्य रूप से इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो द्वीप के वर्षावनों में रहते हैं। वे अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर बिताते हैं और दुनिया के सबसे बड़े पेड़ों पर रहने वाले स्तनधारी माने जाते हैं।

जंगलों का काटा जाना सबसे बड़ा खतरा

ओरांग उटान के लिए सबसे बड़ी समस्या उनके प्राकृतिक घर का खत्म होना है। वर्षावनों के बड़े हिस्से को खनन, पाम ऑयल, रबर और कागज उद्योग के लिए साफ किया जा रहा है। कई जगह जंगलों को काटकर या जलाकर वहां बड़े पैमाने पर एक ही फसल उगाई जाती है।

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ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है।

इससे केवल ओरांग उटान ही नहीं, बल्कि हजारों दूसरे जीव भी प्रभावित होते हैं। जंगल छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाते हैं। ऐसे अलग-अलग जंगलों में ओरांग उटान के लिए भोजन और सुरक्षित रहने की जगह कम होती जाती है।

अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार

जंगल कम होने के साथ ओरांग उटान इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच जाते हैं। इसी दौरान शिकारी उन्हें आसानी से निशाना बना लेते हैं। छोटे ओरांग उटान को पालतू जानवर के रूप में बेचने के लिए पकड़ लिया जाता है।

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कई मामलों में बच्चे को पकड़ने के लिए उसकी मां को मार दिया जाता है। इस तरह अवैध वन्यजीव व्यापार एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरी प्रजाति के भविष्य को नुकसान पहुंचाता है।

इंसानों से बढ़ता संघर्ष

जंगलों में भोजन की कमी होने पर ओरांग उटान खेतों में पहुंच जाते हैं। किसान उन्हें फसलों के लिए खतरा मान सकते हैं। इसके कारण कई ओरांग उटान हिंसा का शिकार होते हैं। उन्हें पीटा जाता है, गोली मारी जाती है या जाल में फंसाया जाता है। यह समस्या केवल वन्यजीव संरक्षण की नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका से भी जुड़ी है। इसलिए समाधान में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी है।

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धीमी प्रजनन दर बढ़ाती है खतरा

ओरांग उटान के लिए स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वे बहुत धीमी गति से प्रजनन करते हैं। सुमात्राई ओरांग उटान की मादा के दो बच्चों के बीच औसतन करीब नौ साल का अंतर हो सकता है। इसलिए किसी एक प्रजनन करने वाली मादा की मौत भी पूरी आबादी के लिए बड़ा नुकसान है।

बचाने के लिए पूरे जंगल को बचाना होगा

ओरांग उटान को बचाने के लिए केवल घायल या अनाथ जानवरों को बचाना पर्याप्त नहीं है। उनके प्राकृतिक जंगलों को सुरक्षित करना सबसे जरूरी है। संरक्षित क्षेत्रों की रक्षा, जंगलों की बहाली और गश्ती दलों की तैनाती से अवैध कटाई और शिकार को रोका जा सकता है।

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ओरांग उटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान और समझदार जीवों में गिने जाते हैं। इंसानों से उनका डीएनए करीब 97 प्रतिशत तक मिलता है।

संकट में फंसे ओरांग उटान को बचाकर उनका इलाज और पुनर्वास भी किया जाता है। जब वे जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्रों में वापस छोड़ा जा सकता है।

इसके साथ स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ना भी जरूरी है। लोगों को शिक्षा, रोजगार और वैकल्पिक आजीविका के अवसर मिलें, तो वे जंगलों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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ओरांग उटान बचेंगे तो जंगल भी बचेंगे

ओरांग उटान की रक्षा केवल एक प्रजाति को बचाने की कोशिश नहीं है। उनके जंगल हजारों दूसरे पौधों और जीवों का घर हैं। यही जंगल स्थानीय लोगों को पानी, भोजन और आजीविका भी देते हैं।

इसलिए ओरांग उटान को बचाने का सबसे प्रभावी रास्ता उनके पूरे प्राकृतिक संसार को बचाना है। अगर जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो ओरांग उटान के साथ-साथ असंख्य दूसरी प्रजातियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। आज उठाए गए कदम ही तय करेंगे कि आने वाली पीढ़ियां ओरांग उटान को केवल तस्वीरों में देखेंगी या उन्हें अपने प्राकृतिक जंगलों में जीवित भी देख पाएंगी।

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