जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई से खतरे में सांपों का जीवन, जानें भारतीय सांपों की खासियतें

विश्व सर्प दिवस: धरती के प्राचीन जीवों की रक्षा और संरक्षण का संदेश, सांपों की अनोखी दुनिया, लंबी उम्र और पर्यावरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जानकारी
भारत में 300 से अधिक सांप प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें किंग कोबरा और पाइथन प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
भारत में 300 से अधिक सांप प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें किंग कोबरा और पाइथन प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • विश्व सर्प दिवस पर दुर्लभ सांप प्रजातियों के संरक्षण, शोध और पर्यावरण संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाती है।

  • भारत में 300 से अधिक सांप प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें किंग कोबरा और पाइथन प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।

  • सांपों की लंबी उम्र, अनोखी जीवनशैली और विकास यात्रा वैज्ञानिकों को पृथ्वी के इतिहास को समझने में सहायता करती है।

  • जंगलों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और मानव संघर्ष के कारण कई सांप प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।

  • सांप पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास बचाना जरूरी है।

हर साल 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य सांपों के बारे में लोगों को जागरूक करना और उनके संरक्षण के लिए प्रयासों को बढ़ावा देना है। वन्यजीव विशेषज्ञ इस दिन सांपों की उन दुर्लभ प्रजातियों का अध्ययन करते हैं, जो आज भी धरती पर मौजूद हैं। ये जीव वैज्ञानिकों को विकासवाद, पर्यावरण में बदलाव और पृथ्वी के इतिहास को समझने में मदद करते हैं।

भारत में सांपों का विशेष महत्व है। यहां सांपों को केवल वन्यजीव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि कई स्थानों पर उनकी पूजा भी की जाती है। भारत में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कुछ बेहद जहरीली तो कुछ बहुत बड़ी और दुर्लभ हैं।

सांपों की अनोखी दुनिया

सांप लंबे शरीर वाले, बिना पैरों के मांसाहारी सरीसृप हैं। ये सर्पेंटिस समूह से जुड़े होते हैं। दुनिया में सांपों की 4,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। ये अंटार्कटिका, आइसलैंड, आयरलैंड और न्यूजीलैंड को छोड़कर लगभग हर बड़े भू-भाग में पाए जाते हैं।

सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं, यानी इनके शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है। इनके शरीर पर मौजूद विशेष प्रकार की चमड़ी की परतें इन्हें सुरक्षा प्रदान करती हैं। भारत में सांपों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और वैज्ञानिक अभी भी कई प्रजातियों का अध्ययन कर रहे हैं।

भारत के कुछ प्रमुख लंबे जीवन वाले सांप

किंग कोबरा: दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप

किंग कोबरा भारत के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमय सांपों में से एक है। यह पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी घाट के जंगलों में पाया जाता है। यह दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप माना जाता है।

किंग कोबरा की खास बात यह है कि यह मुख्य रूप से दूसरे सांपों को अपना भोजन बनाता है। अच्छी परिस्थितियों में यह कैद में लगभग 30 साल तक जीवित रह सकता है। जंगलों में इसका जीवनकाल वातावरण और भोजन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

फोटो साभार: आईस्टॉक

इंडियन रॉक पाइथन: शांत स्वभाव वाला विशाल सांप

इंडियन रॉक पाइथन भारत में पाए जाने वाले बड़े बिना जहर वाले सांपों में से एक है। यह घास के मैदानों, जंगलों और आर्द्र क्षेत्रों में रहता है। यह अपने शिकार को पकड़ने के लिए अपने मजबूत शरीर से उसे जकड़ लेता है।

उचित देखभाल मिलने पर यह सांप कैद में 30 से 40 साल तक जीवित रह सकता है। यह भारत की लंबी उम्र वाली सांप प्रजातियों में शामिल है।

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बर्मीज पाइथन: जंगलों का बड़ा निवासी

बर्मीज पाइथन मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में पाया जाता है। यह एक बड़ा और शक्तिशाली सांप है, लेकिन आमतौर पर इंसानों से दूर रहना पसंद करता है। सही वातावरण मिलने पर यह कैद में 30 से 40 साल तक जीवित रह सकता है।

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भारतीय कोबरा: हर परिस्थिति में जीवित रहने वाला सांप

भारतीय कोबरा अपनी फैली हुई फन के कारण आसानी से पहचाना जाता है। यह पूरे भारत में पाया जाता है और अक्सर बिलों, दीमक के टीले और घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों में छिपा रहता है।

कैद में यह 30 साल से अधिक समय तक जीवित रह सकता है। हालांकि, जंगलों का नष्ट होना और सड़क दुर्घटनाएं इसके लिए बड़े खतरे हैं।

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सांप लंबे समय तक कैसे जीवित रहते हैं?

सांपों का शरीर धीमी गति से ऊर्जा का उपयोग करता है। उन्हें ज्यादा भोजन की जरूरत नहीं होती और वे लंबे समय तक बिना खाए भी रह सकते हैं। जंगलों की तुलना में कैद में सांप अधिक समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि वहां उन्हें शिकारियों, बीमारियों और मौसम की कठिन परिस्थितियों से सुरक्षा मिलती है।

सांपों का संरक्षण क्यों जरूरी है?

आज कई सांप प्रजातियां जंगलों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवास खत्म होने के कारण खतरे में हैं। सांप पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे चूहों और अन्य जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

विश्व सर्प दिवस हमें याद दिलाता है कि सांप डरने वाले जीव नहीं, बल्कि प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जंगलों की रक्षा और इंसानों व सांपों के बीच संघर्ष को कम करके ही इन अद्भुत जीवों को बचाया जा सकता है।

सांपों से जुड़े रोचक तथ्य

दुनिया का सबसे छोटा सांप बारबाडोस थ्रेड स्नेक माना जाता है, जिसकी लंबाई लगभग चार इंच होती है। वहीं ग्रीन एनाकोंडा दुनिया के सबसे भारी सांपों में शामिल है और रेटिकुलेटेड पाइथन सबसे लंबे सांपों में से एक है। विश्व सर्प दिवस हमें इन प्राचीन जीवों को समझने और उनकी रक्षा करने का संदेश देता है।

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