कचरा प्रबंधन में मिसाल बना त्रिपुरा: सभी शहरी निकायों से खत्म हुआ वर्षों से जमा कचरा

कचरा प्रबंधन में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद त्रिपुरा अब 1,200 करोड़ रुपये की सीवेज परियोजना के जरिए जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की तैयारी में है।
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सारांश
  • देश में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अब राज्यों की सक्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। त्रिपुरा ने वर्षों से जमा कचरे को पूरी तरह समाप्त कर और मजबूत कचरा प्रसंस्करण क्षमता विकसित कर शहरी स्वच्छता का नया मानक स्थापित किया है, जबकि 1,200 करोड़ रुपये की सीवेज परियोजना के जरिए वह जल स्रोतों की सुरक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

  • दूसरी ओर, गौतमबुद्ध नगर में अवैध भूजल दोहन पर सख्ती दिखाते हुए प्रशासन ने 14 बोरवेल सील कर दिए हैं। ये कदम बताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि धरातल पर कठोर कार्रवाई का रूप ले रहा है।

पूर्वोत्तर की भौगोलिक और संसाधन संबंधी चुनौतियों के बावजूद त्रिपुरा ने ठोस कचरा और सीवेज प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

इस बारे में राज्य सरकार द्वारा 10 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत एक्शन टेकन रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा के सभी 20 शहरी स्थानीय निकायों में अब किसी भी तरह का लेगेसी वेस्ट (वर्षों से जमा पुराना कचरा) नहीं बचा है। राज्य ने सॉलिड वेस्ट और सीवेज मैनेजमेंट में मौजूदा खामियों को भरने के लिए लगातार मिलकर कोशिशें की हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्रतिकूल मौसम और सीमित संसाधनों जैसी पूर्वोत्तर राज्यों की चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने कचरा और सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

हर दिन पैदा हो रहा 352.75 टन कचरा, क्षमता 537.1 टन

सभी शहरी निकायों ने अनुपालन रिपोर्ट में जानकारी दी है कि राज्य के सभी वार्डों में घर-घर से शत प्रतिशत गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जा रहा है। 13 शहरी निकायों ने यह भी बताया है कि पुराने कचरे को हटाकर कितनी जमीन पुनः हासिल की गई है और जियो-कोड भी प्रस्तुत किया है।

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यह भी सामने आया है कि अब राज्य का कोई भी शहरी निकाय ताजा कचरा खुले में नहीं फेंक रहा। सभी शहरी निकाय अपने कचरे को कंपोस्टिंग और प्रोसेसिंग केंद्रों में भेज रहे हैं। साथ ही मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) केंद्रों में कचरे को प्रोसेस कर रहे हैं।

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया है कि राज्य के 20 शहरी निकायों में हर दिन 352.75 टन कचरा पैदा होता है, जबकि उसे प्रोसेस करने की कुल क्षमता 537.1 टन प्रतिदिन है। यानी राज्य के पास जरूरत से ज्यादा कचरा प्रोसेसिंग क्षमता मौजूद है और इस क्षेत्र में कोई कमी नहीं है।

अगरतला में बन रहे पांच आधुनिक एसटीपी

सीवेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अगरतला नगर निगम में 39.5 एमएलडी क्षमता के पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जा रहे हैं। ये प्लांट आधुनिक एसबीआर (सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर) और एमबीबीआर (मूविंग बेड बायोफिल्म रिएक्टर) पर आधारित होंगे तथा नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन सिस्टम के जरिए उनसे जोड़े जाएंगे।

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राज्य सरकार नालों और जलाशयों में बिना साफ किया सीवेज जाने से रोकने के लिए भूमिगत सीवर पाइपलाइन नेटवर्क भी विकसित करेगी। इस परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की सहायता से करीब ₹1200 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित है, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी भी शामिल होगी। कुल राशि का करीब एक-तिहाई हिस्सा भूमिगत सीवर पाइपलाइन नेटवर्क स्थापित करने पर खर्च किया जाएगा, ताकि सीवेज सीधे खुले नालों में न जाए।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमिगत सीवेज प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जो फंड की उपलब्धता और विभिन्न शहरी क्षेत्रों की व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, सेप्टिक टैंकों के ओवरफ्लो को स्टॉर्म वाटर ड्रेनों में जाने से रोकने के लिए सोख पिट्स भी बनाए जाएंगे, जिससे प्राकृतिक नालों और जल स्रोतों के प्रदूषण को रोका जा सके।

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वर्षों से जमा कचरे को पूरी तरह खत्म कर और कचरा प्रसंस्करण क्षमता मजबूत बनाकर त्रिपुरा ने शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब राज्य का अगला लक्ष्य आधुनिक सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर नालों और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना है।

गौतमबुद्ध नगर में भूजल चोरी पर सख्ती, 14 बोरवेल सील

उत्तर प्रदेश भूजल विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में अवैध रूप से भूजल दोहन कर रहे 55 वाहन धुलाई केंद्रों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। भूजल विभाग ने इन केंद्रों को 3 सितंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर भूजल दोहन के लिए वैध एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

भूजल विभाग की कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद कई केंद्र निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। हालांकि उचित सूचना और सुधार का अवसर देने के लिए उन्हें दो बार नोटिस भेजे गए।

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इसके बाद 8 दिसंबर 2025 को की गई जांच में 14 अवैध बोरवेल सील कर दिए गए, जो बिना वैध एनओसी के चलते पाए गए और नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। विभाग ने बताया कि बाकी नियमों का उल्लंघन करने वाले बोरवेलों को सील करने की कार्रवाई जारी है।

इसके अलावा, नियमों का पालन न करने वाले वॉशिंग सेंटरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि लगातार उल्लंघन के लिए उन पर दो से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना क्यों न लगाया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की लगातार निगरानी की जा रही है और तय समयसीमा में नियमों का पालन नहीं होने पर कानून के तहत आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह जानकारी भूजल विभाग की 15 दिसंबर 2025 की कार्रवाई रिपोर्ट में दी गई है, जिसे 10 अप्रैल 2026 को एनजीटी की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

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