

पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए लद्दाख और दिल्ली, दोनों मामलों में जवाबदेही तय करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
लद्दाख में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन पर अधूरी और आदेशों के अनुरूप न होने वाली रिपोर्ट पर ट्रिब्यूनल ने नाराजगी जताते हुए विस्तृत कंप्लायंस एफिडेविट मांगा है, वहीं दिल्ली के गाजीपुर बूचड़खाने में तैयार होने के बावजूद चालू न हो पाए गोबर सुखाने के प्लांट पर भी एनजीटी ने एक महीने के भीतर प्रगति रिपोर्ट तलब की है।
इन दोनों मामलों से साफ है कि ट्रिब्यूनल अब पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े मामलों में देरी, लापरवाही और अधूरी जानकारी को गंभीरता से ले रहा है और अगली सुनवाई में सख्त समीक्षा की तैयारी में है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 30 मार्च 2026 को लद्दाख प्रशासन से ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन की स्थिति पर विस्तृत कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। अधिकरण ने कहा है कि हलफनामे में सभी जानकारी तालिका के रूप में दी जाए, जैसा कि 1 सितंबर 2025 के आदेश में निर्धारित किया गया था।
अधिकरण ने यह भी पाया कि 26 मार्च 2026 को लद्दाख के मुख्य सचिव द्वारा दाखिल छमाही रिपोर्ट अदालत के पिछले आदेशों के अनुरूप नहीं थी। इस पर न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने प्रशासन को पूरी और स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।
एनजीटी के इस सख्त रुख से साफ है कि पर्यावरण और कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ट्रिब्यूनल ने संकेत दिया है कि अगली सुनवाई में स्थिति की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी।
पर्यावरण नियमों पर ढिलाई नहीं: गाजीपुर प्लांट को लेकर एनजीटी ने दिया अल्टीमेटम
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 30 मार्च 2026 को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से गाजीपुर बूचड़खाने में बनाए गए इंजेस्टा/गोबर सुखाने वाले प्लांट की कार्य करने की स्थिति पर एक महीने के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला गाजीपुर बूचड़खाने में गोबर सुखाने का प्लांट स्थापित करने से जुड़ा है, जिसे अधिकरण के पिछले आदेशों पर बनाया जाना था।
दिल्ली नगर निगम ने 9 जनवरी 2026 को इस बारे में जानकारी दी थी कि दिल्ली में दो बार ग्रेप-IV लागू होने की वजह से प्लांट का काम प्रभावित हुआ और इसमें देरी हुई। निगम के अनुसार प्लांट 31 जनवरी 2026 तक चालू होने की उम्मीद थी।
प्लांट तैयार, चालू होने में लगेगा एक सप्ताह
वहीं फ्रिगोरिफिको अल्लाना की ओर से पेश वकील ने अदालत को जानकारी दी है कि प्लांट बनकर तैयार है, लेकिन अभी चालू नहीं हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्लांट एक सप्ताह के भीतर शुरू हो जाएगा।
एनजीटी ने इस देरी पर गंभीर रुख अपनाते हुए अब एक महीने के भीतर प्लांट की वास्तविक स्थिति और प्रगति पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। इससे साफ संकेत है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में लापरवाही पर अधिकरण सख्ती बरत रहा है।