

कचरा प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट में सुधार के दम पर गोवा ने नदी प्रदूषण पर बड़ी जीत हासिल की है।
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में जहां 11 प्रदूषित नदी खंड थे, वे अब घटकर महज 2 रह गए हैं, यानी इनमें करीब 80 फीसदी की कमी आई है।
राज्य में नदियों के किनारे लेगेसी वेस्ट नहीं है, अनियंत्रित डंपसाइट खत्म हो चुके हैं और जल गुणवत्ता में साफ सुधार दिख रहा है। सख्त निगरानी, बेहतर ट्रीटमेंट सिस्टम और डंपसाइट सुधार के चलते गोवा की नदियां तेजी से स्वच्छता की ओर लौट रही हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में गोवा सरकार ने कहा है कि राज्य में फिलहाल कोई भी अनियंत्रित कचरा डंपसाइट या सैनिटरी लैंडफिल नहीं है। नदियों के दोनों किनारों से एक किलोमीटर के दायरे में कोई पुराना कचरा (लेगेसी वेस्ट) मौजूद नहीं है।
साथ ही, ऐसी कोई नालियां भी नहीं हैं जो सीधे नदियों में कचरा छोड़ती हों, इसलिए ठोस कचरे को रोकने के लिए फ्लोटिंग रैक या स्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं पड़ी है।
गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दिसंबर 2025 की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक 2022-23 में 15 नदियों के 32 स्थानों पर जल गुणवत्ता की जांच की गई। इनमें से महज दो नदियों के 4 स्थान बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड के मामले में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें साल नदी का रुमडेर से ओरलिम ब्रिज तक का हिस्सा (प्राथमिकता वर्ग-II) और मापुसा नदी में टार हाईवे कल्वर्ट के पास का स्थान (प्राथमिकता वर्ग-V) शामिल हैं।
जल गुणवत्ता में सुधार के संकेत
12 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में प्रदूषित नदी खंडों की संख्या 2018 में 11 थी, जो अब घटकर महज दो रह गई है। यह राज्य में जल प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
जून से जुलाई 2025 के लिए जारी मासिक प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 14 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चल रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 113.85 एमएलडी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है, वहां राज्य में आमतौर पर सेप्टिक टैंक और सोक पिट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। 50 से अधिक कमरों वाले होटल और बड़े आवासीय भवनों के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 2010 के तहत अपना ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य है।
इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सामुदायिक उपयोग के लिए सुलभ शौचालय और ओपन डिफिकेशन फ्री (ओडीएफ) नीति के तहत बायो-टॉयलेट भी स्थापित किए हैं।
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है राज्य में कुल 8,611 उद्योग चल रहे हैं, जिनमें से 850 उद्योग अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 के बीच जुड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल राज्य में कोई भी जल प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग चिन्हित नहीं है।
209 औद्योगिक इकाइयों ने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाए हैं, जिनमें से 207 इकाइयां मानकों का पालन कर रही हैं। गोवा में कोई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं है और न ही कोई प्रस्तावित है। ऐसे में कोई भी इंडस्ट्रियल यूनिट किसी भी सीईटीपी से नहीं जुड़ी है।
सरकारी प्रयासों से बदली तस्वीर
रिपोर्ट में ठोस कचरे के प्रबंधन की स्थिति को भी उजागर किया गया है। इसके मुताबिक गोवा में अभी हर दिन करीब 766 टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पैदा हो रहा है।
सालिगांव में 250 टन प्रतिदिन क्षमता वाला एक सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह से चालू है, जो मुख्य रूप से उत्तरी गोवा जिले के तटीय इलाके और कुछ दूसरे पहचाने गए इलाकों की जरूरतों को पूरा करता है। राज्य में अलग-अलग अर्बन लोकल बॉडीज के तहत सात पहचाने गए डंपसाइट पर फेज II का सुधार का काम शुरू किया गया है।
मापुसा नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में आने वाले में असगांव डंपसाइट, पेरनेम डंपसाइट (कुर्चोरम-काकोरा नगर परिषद), हेडलैंड सडा डंपसाइट (मोरमुगाओ नगर परिषद) और मडगांव नगर परिषद के अंतर्गत सोंसोड्डो एमएसडब्ल्यू शेड में पड़े कचरे के सुधार (रीमेडिएशन) का काम पूरा हो चुका है।
वहीं तालेगांव पंचायत (तिसवाड़ी तालुका) के तालेगांव डंपसाइट और पणजी नगर निगम के अंतर्गत कुरका डंपसाइट पर कचरे के सुधार और निपटान का काम अभी जारी है।
फेज II के टेंडर के हिसाब से, अब तक इन सात डंपसाइट्स से करीब 1,11,849.31 घन मीटर कचरे का निपटान किया जा चुका है। इसमें से 57,611 घन मीटर आरडीएफ (ईंधन योग्य कचरा) और करीब 37,987 घन मीटर जड़ पदार्थ (इनर्ट्स) व कम्पोस्ट का निपटान किया गया है। बाकी कचरे का निपटान प्रक्रिया में है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि गोवा ने नदियों की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट और कचरा प्रबंधन में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे प्रदूषण में लगातार कमी आ रही है।