जमीन में जहर घोल रही भरूच की ये केमिकल कंपनियां, गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिया कड़ा एक्शन

सीपीसीबी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह कंपनियां नियमों की अनदेखी कर जहरीले कचरे का निपटान कर रही थी, जिस पर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है।
जमीन में जहर घोल रही भरूच की ये केमिकल कंपनियां, गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिया कड़ा एक्शन
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सारांश
  • गुजरात के भरूच जिले स्थित सायखा जीआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण का एक गंभीर मामला सामने आया है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार, पांच केमिकल और फार्मास्युटिकल कंपनियां आंशिक या बिना ट्रीट किए जहरीले कचरे को खुले मैदानों और नालों में छोड़ रही थीं। इससे न केवल आसपास की जमीन और पर्यावरण प्रदूषित हुआ, बल्कि भूजल पर भी गंभीर असर पड़ा है।

  • रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सेजल केम टेक इंडस्ट्रीज, श्लोक्का डाइज, एरीज कलर केम, स्काई इंटरमीडिएट्स और हॉरबैक्स मेडिसिन्स के खिलाफ पहले भी अपशिष्ट जल और खतरनाक कचरे के कुप्रबंधन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे।

  • शिकायतों में यह भी आरोप है कि हॉरबैक्स मेडिसिन्स के परिसर के पास पड़े जहरीले कचरे को निगलने से चार मवेशियों की मौत हो गई थी।

  • जांच के बाद गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) ने उद्योगों और सायखा के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के खिलाफ बन करने के आदेश, कारण बताओ नोटिस और अन्य कानूनी कार्रवाई की है। यह मामला दर्शाता है कि खतरनाक कचरे के प्रबंधन में लापरवाही केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि भूजल, पशुधन और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

गुजरात में भरूच जिले के सायखा जीआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा गया है। इस सन्दर्भ में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 10 जून 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खुले मैदानों में जहरीला और केमिकल युक्त कचरा बहाने वाली पांच केमिकल और फार्मास्युटिकल कंपनियों के खिलाफ गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) ने सख्त कानूनी कार्रवाई की है।

आरोप है कि भरूच की वागरा तालुका स्थित सायखा जीआईडीसी की पांच औद्योगिक इकाइयों आंशिक या बिना ट्रीटमेंट के, जहरीले रसायनों से युक्त गंदा पानी खुले मैदानों में बहाने रही थी। इस लापरवाही के कारण न केवल आसपास का पर्यावरण दूषित हो रहा था, बल्कि भूजल भी जहरीला हो चुका है।

खुले मैदानों में बहाया जा रहा था जहरीला कचरा

जिन उद्योगों के खिलाफ शिकायत की गई, उनमें सेजल केम टेक इंडस्ट्रीज, श्लोक्का डाइज, एरीज कलर केम, स्काई इंटरमीडिएट्स और हॉरबैक्स मेडिसिन्स शामिल हैं।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2024-25 के दौरान अपशिष्ट जल और खतरनाक कचरा के प्रबंधन से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर जीपीसीबी ने इन इकाइयों को कई नोटिस और निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अब यह निर्णायक कार्रवाई की गई है।

आवेदक द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, 'होरबैक्स मेडिसिंस' कंपनी के पास जमा जहरीले कचरे को निगलने से चार मवेशियों की मौत भी हो गई। साथ ही शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि ये सभी उद्योग जल अधिनियम, वायु अधिनियम, खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण एवं आयात नियम, 1989 तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे थे।

सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि उद्योगों को दी जाने वाली सहमति और अनुमतियां (कंसोलिडेटेड कंसेंट एंड ऑथराइजेशन) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में आती है। इस मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित पांच उद्योगों की स्थिति संबंधी जानकारी तलब की थी।

नियमों के उल्लंघन पर पहले भी मिल चुके हैं कई नोटिस

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 18 दिसंबर, 2025 को इन पांचों औद्योगिक इकाइयों और सायखा स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद सभी पांच उद्योगों और सीईटीपी के खिलाफ बंद करने के निर्देश, कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) या कार्रवाई संबंधी अन्य आदेश जारी किए गए थे।

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रिपोर्ट के अनुसार, श्लोक्का डाइज को 9 जनवरी 2026 को बंद करने का आदेश दिया गया था। जांच में पाया गया कि कंपनी बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट जल को परिसर के बाहर खुले नाले और जमीन पर छोड़ रही थी तथा उसका एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) भी बेहद खराब स्थिति में था।

कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट भी जांच में मिला नाकाम

बाद में 20 जनवरी को दोबारा निरीक्षण किया गया और आवश्यक नियमों का पाए जाने पर 23 जनवरी 2026 को इसे बंद करने का आदेश वापस ले लिया गया। हालांकि, लापरवाही और पर्यावरण को हुई क्षति की एवज में कंपनी से अंतरिम मुआवजे (ईडीसी) के रूप में 3.4 लाख रुपए वसूले गए थे।

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इसी तरह 8 जनवरी 2026 को सायखा सीईटीपी को भी नोटिस जारी किया गया। बोर्ड ने पाया कि ट्रीटमेंट यूनिट का संचालन संतोषजनक नहीं था। यह प्लांट खुद कचरे के सही रिकॉर्ड रखने और ट्रीटमेंट यूनिट को सुचारू रूप से चलाने में नाकाम पाया गया।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि औद्योगिक क्षेत्रों में खतरनाक कचरे के प्रबंधन में लापरवाही न केवल पर्यावरण बल्कि भूजल, पशुओं और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।

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