सफाई से 51% तक कम हो सकता है समुद्री प्लास्टिक, फिर भी 2050 तक स्थिति हो सकती है भयावह

समुद्र में नया प्लास्टिक रोकना जरूरी, लेकिन पुराने कचरे की समय पर सफाई ही माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता खतरा रोक सकती है।
समुद्र में जमा पुराना प्लास्टिक धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदल रहा है, जिसे हटाना बेहद मुश्किल और महंगा साबित हो सकता है।
समुद्र में जमा पुराना प्लास्टिक धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदल रहा है, जिसे हटाना बेहद मुश्किल और महंगा साबित हो सकता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • 2050 तक समुद्र में नए प्लास्टिक का प्रवेश रोकना जरूरी, लेकिन पुराने कचरे की सफाई के बिना प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

  • समुद्र में जमा पुराना प्लास्टिक धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदल रहा है, जिसे हटाना बेहद मुश्किल और महंगा साबित हो सकता है।

  • शोध के मुताबिक जल्दी सफाई करने से बड़े प्लास्टिक कचरे को माइक्रोप्लास्टिक बनने से पहले समुद्र से हटाया जा सकता है।

  • तेज सफाई से समुद्र में बचा प्लास्टिक कम होगा, लेकिन इसके लिए हर साल अरबों यूरो का खर्च उठाना पड़ेगा।

  • प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए उत्पादन और उपयोग घटाने के साथ पुराने समुद्री कचरे की सफाई भी जरूरी है।

दुनिया के समुद्रों में प्लास्टिक प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। समुद्र में पहुंचने वाले प्लास्टिक को रोकने के लिए कई देशों ने 2050 तक नए प्लास्टिक कचरे के प्रवेश को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। जापान के ओसाका में सामने रखी गई ‘ओसाका ब्लू ओशन विजन’ भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य 2050 तक समुद्र में प्लास्टिक के नए प्रवाह को रोकना है।

लेकिन एक नए अध्ययन ने बताया है कि केवल नया प्लास्टिक समुद्र में जाने से रोकना काफी नहीं होगा। समुद्र में पहले से मौजूद प्लास्टिक लंबे समय तक बना रह सकता है। धीरे-धीरे बड़े प्लास्टिक के टुकड़े टूटकर छोटे कणों और माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाते हैं। इन छोटे कणों को समुद्र से निकालना बहुत मुश्किल और महंगा है। यह शोध कम्युनिकेशन्स अर्थ एंड एनवायरनमेंट नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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वैज्ञानिकों ने तैयार किया मॉडल

इस समस्या को समझने के लिए जापान की रित्सुमेइकान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और नीदरलैंड्स की द ओशन क्लीनअप शोधकर्ताओं के साथ मिलकर अध्ययन किया।

शोधकर्ताओं ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसमें समुद्र में मौजूद प्लास्टिक के सफर और उसके धीरे-धीरे टूटने की प्रक्रिया को समझने की कोशिश की गई। इसमें समुद्र के किनारे, तटीय इलाकों और खुले समुद्र में मौजूद प्लास्टिक को शामिल किया गया। अध्ययन में यह भी देखा गया कि अगर प्लास्टिक को अलग-अलग समय पर और अलग-अलग तरीकों से समुद्र से हटाया जाए तो साल 2050 तक इसका क्या असर होगा।

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नया प्लास्टिक रोकने से आधा बोझ कम हो सकता है

शोध के अनुसार, अगर 2050 तक समुद्र में प्लास्टिक के नए प्रवेश को पूरी तरह रोक दिया जाए तो 1950 से 2050 के बीच समुद्र में पहुंचने वाले प्लास्टिक की कुल मात्रा में करीब 51.4 प्रतिशत की कमी हो सकती है। यह स्थिति उस स्थिति की तुलना में है जिसमें प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए कोई अतिरिक्त प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता।

यह आंकड़ा दिखाता है कि प्लास्टिक को स्रोत पर रोकना कितना जरूरी है। इसके लिए प्लास्टिक का उत्पादन और अनावश्यक इस्तेमाल कम करना, कचरा संग्रह की व्यवस्था सुधारना और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना जरूरी होगा।

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पुराना प्लास्टिक बना रहेगा बड़ी समस्या

हालांकि नया प्लास्टिक रोकने के बाद भी समुद्र में पहले से मौजूद कचरा खत्म नहीं होगा। अध्ययन के अनुसार, अगर सफाई नहीं की गई तो 2050 तक समुद्र में जमा प्लास्टिक का करीब 58.4 प्रतिशत हिस्सा माइक्रोप्लास्टिक हो सकता है।

माइक्रोप्लास्टिक के छोटे आकार के कारण उसे समुद्र से निकालना बेहद कठिन है। इसलिए बड़े प्लास्टिक कचरे को उसके छोटे टुकड़ों में बदलने से पहले ही निकालना अधिक प्रभावी हो सकता है।

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जल्दी सफाई करने से फायदा

अध्ययन में पाया गया कि समुद्र की सफाई जितनी जल्दी शुरू की जाएगी, उतना ही अधिक प्लास्टिक बड़े टुकड़ों के रूप में हटाया जा सकेगा। इससे उसके माइक्रोप्लास्टिक में बदलने की संभावना कम होगी।

जब नए प्लास्टिक को रोकने के साथ तेजी से सफाई की गई तो 2050 तक समुद्र में बचा प्लास्टिक करीब 7,312 किलो टन रहने का अनुमान लगाया गया। वहीं लगातार सफाई की स्थिति में यह मात्रा करीब 8,824 किलो टन और देर से सफाई शुरू करने पर करीब 10,168 किलो टन रही।

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तेज सफाई की कीमत भी ज्यादा

हालांकि समुद्र की जल्दी सफाई करना आसान नहीं है। इसमें बहुत अधिक पैसा और संसाधन लगते हैं। अध्ययन के मुताबिक देर से सफाई करने पर औसत खर्च करीब एक अरब यूरो सालाना हो सकता है। वहीं 2026 से 2050 के बीच तेज गति से सफाई करने पर यह खर्च करीब 3.4 अरब यूरो सालाना तक पहुंच सकता है।

समुद्र के खुले हिस्सों में सफाई तट के मुकाबले ज्यादा महंगी होती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे समुद्र में मौजूद बड़े प्लास्टिक की मात्रा कम होती जाती है, बचे हुए प्लास्टिक को निकालने की लागत भी बढ़ती जाती है।

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रोकथाम और सफाई दोनों जरूरी

शोधकर्ताओं का कहना है कि समुद्री प्लास्टिक की समस्या का समाधान केवल सफाई से नहीं हो सकता। अगर हर साल नया प्लास्टिक समुद्र में पहुंचता रहेगा तो सफाई का काम कभी खत्म नहीं होगा।

इसलिए प्लास्टिक उत्पादन को कम करना, उसका इस्तेमाल घटाना, बेहतर कचरा प्रबंधन करना और रीसाइक्लिंग व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। साथ ही समुद्र में पहले से मौजूद बड़े प्लास्टिक कचरे को भी समय रहते हटाना होगा।

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अध्ययन का स्पष्ट संदेश है कि समुद्र को प्लास्टिक से बचाने के लिए रोकथाम और सफाई दोनों साथ-साथ चलनी चाहिए। नया प्लास्टिक समुद्र में जाने से रोकना भविष्य की समस्या को कम करेगा, जबकि पुराने प्लास्टिक की जल्द सफाई उसे माइक्रोप्लास्टिक बनने से रोकने में मदद कर सकती है।

यही दोहरा प्रयास समुद्री पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित भविष्य की नींव बन सकता है।

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