ओडिशा में बालदा नदी पर अवैध रेत खनन, बहाव पर मंडरा रहा खतरा

जांच में सामने आया है कि बालदा नदी में नियमों की अनदेखी कर भारी मशीनों से रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और आसपास के गांवों पर खतरा बढ़ सकता है
अवैध खनन का कारोबार; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
अवैध खनन का कारोबार; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • देश के अलग-अलग हिस्सों में पर्यावरण नियमों की अनदेखी के दो मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने गंभीर सवाल उठे हैं।

  • ओडिशा के कटक जिले के बालदा गांव में बालदा नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन का खुलासा हुआ है। संयुक्त समिति की जांच में पाया गया कि भारी मशीनों की मदद से नदी तल से रेत निकाली जा रही है और वहां करीब 700 मीटर लंबी सड़क भी बना दी गई है, जो स्वीकृत नक्शे के विपरीत है।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव, तलछट के प्रवाह और आसपास के गांवों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

  • वहीं पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के बाराबनी इलाके में बिना वैधानिक अनुमति चल रहे ईंट भट्टों का मामला सामने आया है।

  • जिला प्रशासन की जांच में पता चला कि एनजीटी में याचिका दायर होने के समय ये भट्टे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आवश्यक अनुमति के बिना संचालित हो रहे थे। बाद में इनमें से दो भट्टों ने हाल ही में संचालन की अनुमति हासिल की है, जबकि एक ने आवेदन किया है।

  • मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने और जरूरी नियामकीय कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।

ओडिशा के कटक जिले के कांटापाड़ा तहसील के बालदा गांव में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है। कटक के जिला कलेक्टर और जिलाधिकारी ने 24 फरवरी 2026 को दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया है कि सूर्यवंशी अर्थ मूवर्स नाम की कंपनी यहां नियमों को ताक पर रख रेत खनन कर रही है।

यह हलफनामा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 19 नवंबर 2025 को दिए आदेश पर दाखिल किया गया है।

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जांच के लिए गठित संयुक्त समिति ने मौके पर निरीक्षण किया, जिसमें अवैध रेत खनन की पुष्टि हुई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अवैध खनन से जुड़े निष्कर्षों के आधार पर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही खनन पट्टाधारी को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) द्वारा दी गई पर्यावरण स्वीकृति की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि नदी तल में करीब 700 मीटर लंबी सड़क बनाई गई है, जो खनन के लिए स्वीकृत नक्शे के विपरीत है। इसलिए नदी के प्रवाह पर पड़ने वाले असर और इसकी व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए जल संसाधन विभाग से राय मांगी गई है।

इस बारे में एनजीटी में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि खननकर्ता रेत निकालने के लिए भारी मशीनों और एक्सकेवेटर का इस्तेमाल कर रहा है।

इससे बालदा नदी के बहाव की रफ्तार, क्षमता और तलछट के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी भी प्रभावित हो सकती है।

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पश्चिम बर्धमान में बिना अनुमति चल रहे ईंट भट्टे, एनजीटी में शिकायत के बाद मची हलचल

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में अवैध रूप से चल रहे ईंट भट्टों को लेकर मामला सामने आया है। इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर ने 18 फरवरी 2026 को स्थिति रिपोर्ट पेश की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बाराबनी इलाके में चल रहे तीन ईंट भट्टों की जांच की। जांच में पता चला कि इन तीनों में से एक 'आरसी ब्रिक फील्ड' ने 2 फरवरी 2026 को संचालन की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) के लिए आवेदन किया है।

वहीं दो अन्य भट्टे जीएमबी ब्रिक फील्ड और राजा ब्रिक्सने हाल ही में 12 दिसंबर 2025 को संचालन की अनुमति हासिल की है। यह अनुमति उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में मामला दायर होने के बाद प्राप्त की।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि एनजीटी में याचिका दायर किए जाने के समय ये तीनों ईंट भट्टे पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना ही चल रहे थे। ऐसे में सुझाव दिया गया है कि पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह इन भट्टों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि तय करे और उनके खिलाफ जरूरी रेगुलेटरी कार्रवाई करे।

एनजीटी में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाराबनी क्षेत्र में कई ईंट भट्टे बिना पर्यावरणीय मंजूरी के चल रहे हैं।

इनके कारण इलाके में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, साथ ही भूजल और मिट्टी भी प्रदूषित हो रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इन भट्टों में उपजाऊ ऊपरी मिट्टी का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे जमीन की उर्वरता को नुकसान पहुंच रहा है।

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