महानदी-खारुन में रेत माफिया का आतंक, एनजीटी ने छह सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

आरोप है कि माफिया द्वारा पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए महानदी और खारुन से भारी मशीनों और मोटरबोटों के जरिए रेत निकाली जा रही है
अवैध खनन का कारोबार; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
अवैध खनन का कारोबार; प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने महानदी और खारुन में अवैध रेत खनन के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

  • समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। एनजीटी ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें दुर्ग और रायपुर के जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं।

  • इस बारे में दैनिक भास्कर, रायपुर में जनवरी 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सामने आया है कि खारुन नदी से चौबीसों घंटे मोटरबोटों द्वारा अवैध रेत खनन किया जा रहा है। वहां रेत के बड़े भंडार से रेत उठाकर ट्रकों के जरिए दुर्ग और भिलाई भेजी जा रही है।

  • आरोप है कि दुर्ग जिले के एक पूर्व विधायक के प्रभाव के चलते विभाग सख्त कार्रवाई करने से बच रहा है और रेत माफिया का कारोबार बेरोकटोक जारी है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महानदी और खारुन में कथित रूप से चल रहे अवैध रेत खनन के गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 4 फरवरी 2026 को पारित किया गया।

समिति से मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी सौंपने को कहा गया है।

इसके साथ ही एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं। नोटिस जिला मजिस्ट्रेट, दुर्ग और रायपुर के माध्यम से राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल तथा जिला खनन अधिकारी, अटल नगर (कलेक्टोरेट दुर्ग) को भेजे जाएंगे।

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आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए भारी मशीनों और मोटरबोटों के जरिए नदी से रेत निकाली जा रही है।

इस बारे में दैनिक भास्कर, रायपुर में 1 जनवरी 2026 को एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, खारुन नदी से चौबीसों घंटे मोटरबोटों द्वारा अवैध रेत खनन किया जा रहा है। ‘चेन माउंटेन’ नामक रेत के बड़े भंडार से रेत उठाकर ट्रकों के जरिए दुर्ग और भिलाई भेजी जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सतपाखर क्षेत्र में रेत चोरी की सूचना मिलने पर दुर्ग-रायपुर खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेत का भंडार जब्त किया था।

लेकिन महज सात दिनों के भीतर ही अवैध खनन फिर शुरू हो गया। आरोप है कि दुर्ग जिले के एक पूर्व विधायक के प्रभाव के चलते विभाग सख्त कार्रवाई करने से बच रहा है और रेत माफिया का कारोबार बेरोकटोक जारी है।

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माफिया ने मोटरबोटों और भारी वाहनों की आवाजाही के लिए नदी किनारे की मिट्टी खोदकर अवैध रास्ता भी बना दिया है। इतना ही नहीं, कृषि क्षेत्रों को पानी पहुंचाने वाली एक नहर को भी कथित तौर पर बंद कर दिया गया है।

सतपाखर घाट के सामने ही नावों को नदी में उतारा जाता है, और ट्रकों में लगी मोटरों की मदद से रेत को किनारे तक खींचा जाता है। आवेदन में कहा गया है कि महानदी और खारुन दोनों नदियों में अवैध खनन लगातार जारी है।

अंगुल में कोयला खनन के दौरान पर्यावरण नियमों की अनदेखी, एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी पीठ ने ओडिशा के अंगुल जिले में उत्कल सी-ब्लॉक कोयला खदान से जुड़े प्रदूषण नियंत्रण नियमों के कथित उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है।

2 फरवरी 2026 को एनजीटी ने ओडिशा सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के खिलाफ दर्ज शिकायत पर अपना जवाब दाखिल करें।

इस मामले में एनजीटी ने अंगुल के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर, वन एवं पर्यावरण विभाग, ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा राज्य के इस्पात एवं खनन विभाग को भी चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।

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575 हेक्टेयर में फैली खदान

आवेदन में बताया गया कि जेएसपीएल को 575.05 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस कोयला खदान का आवंटन किया गया, जहां से 33.7 लाख टन प्रति वर्ष कोयला निकालने की अनुमति है। यह कोयला खदान छेंदीपाड़ा तहसील के रायझरन, सिमिलिसाही, गोलागड़िया और नंदीचोर उर्फ गोपीबल्लवपुर गांवों में स्थित है।

प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी शर्तों के उल्लंघन का आरोप

ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 19 दिसंबर 2022 को खदान के लिए ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (सीटीई) मंजूर किया था, जिसमें वायु और जल प्रदूषण रोकने के लिए कड़े नियम और उपाय तय किए गए थे। लेकिन शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने इन शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है।

खदान से बाहर निकलने के स्थान पर मशीनीकृत व्हील वॉशिंग सिस्टम नहीं लगाया गया। खदान से डंपिंग यार्ड तक कंक्रीट/ब्लैक टॉप सड़कें नहीं बनाई गईं। कोयला धूल उड़ने से रोकने के लिए स्टैक यार्ड के चारों ओर 10 मीटर ऊंची विंड बैरियर दीवार नहीं बनाई गई। ओवरबर्डन डंप क्षेत्र में बिना पौधारोपण वाली सतह पर पानी का छिड़काव नहीं किया गया, जिससे धूल प्रदूषण बढ़ने का खतरा है।

एनजीटी अब इस मामले में सभी संबंधित विभागों से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेगा। यह मामला एक बार फिर खनन परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों के पालन और प्रदूषण नियंत्रण की गंभीरता को उजागर करता है।

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