यमुना में सुनहरी रेत की लूट पर एनजीटी ने लिया संज्ञान, अवैध खनन की जांच शुरू

संयुक्त समिति को आठ सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर
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सारांश
  • एनजीटी ने यमुना नदी में अवैध रेत खनन के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित की है।

  • समिति को आठ सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। यह कदम गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में खनन के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया है।

  • अपनी शिकायत में याचिकाकर्ता ने कहा है कि यमुना नदी में पचारा गांव और नौरासपुर क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन जारी है।

  • आरोप है कि खननकर्ता पर्यावरणीय मानकों और स्वीकृति शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में तस्वीरें और अखबारों की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत की हैं।

यमुना नदी में कथित अवैध रेत खनन के मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। मामला गाजियाबाद में लोनी क्षेत्र के नौरासपुर गांव का है। एनजीटी ने 30 जनवरी 2026 को इस मामले में आदेश देते हुए शिकायत की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है।

इस संयुक्त समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य सचिव, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, लखनऊ स्थिति पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के साथ-साथ लखनऊ और गाजियाबाद के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

आठ सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश

अधिकरण के आदेश के अनुसार यह संयुक्त समिति मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी और यह पता लगाएगी कि अवैध खनन के आरोप कितने सही हैं। समिति यह भी जांच करेगी कि खनन करने वालों ने पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का पालन किया है या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो समिति से सजा और सुधार से जुड़े उपाय सुझाने के लिए भी कहा गया है।

एनजीटी ने कहा है कि समिति को यह पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी और इसके तुरंत बाद स्थिति रिपोर्ट एवं कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

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पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप

अपनी शिकायत में याचिकाकर्ता ने कहा है कि यमुना नदी में पचारा गांव और नौरासपुर क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन जारी है। आरोप है कि खननकर्ता पर्यावरणीय मानकों और स्वीकृति शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में तस्वीरें और अखबारों की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत की हैं।

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शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा

आवेदक का यह भी कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कई बार अवैध खनन की शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस पर एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के खनन एवं भूविज्ञान निदेशालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण समेत अन्य विभागों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

अब देखना होगा कि संयुक्त समिति की जांच में क्या सामने आता है और क्या यमुना में अवैध खनन पर वास्तव में प्रभावी कार्रवाई हो पाती है। हालांकि यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि नदी संरक्षण के लिए निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही कितनी जरूरी है।

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