सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ खेती और जैव विविधता कैसे रहें सुरक्षित?

अध्ययन में सौर ऊर्जा, खेती और जैव विविधता के बीच संतुलन खोजा गया; कम लागत में पर्यावरण-अनुकूल जमीन के उपयोग की संभावना बताई गई।
जैव विविधता संरक्षण अपनाने से पर्यावरणीय नुकसान घटता है, जबकि सौर ऊर्जा लागत में केवल मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
जैव विविधता संरक्षण अपनाने से पर्यावरणीय नुकसान घटता है, जबकि सौर ऊर्जा लागत में केवल मामूली वृद्धि दर्ज की गई।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • अध्ययन में सौर ऊर्जा विस्तार, खेती और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन साधने का मॉडल तैयार किया गया।

  • शोध में पाया गया कि सौर परियोजनाएं कम लागत में पर्यावरण और कृषि भूमि दोनों को ध्यान में रखकर नियोजित की जा सकती हैं।

  • अगर खेती को प्राथमिकता दी जाए तो अधिकांश उपजाऊ भूमि सुरक्षित रह सकती है, लेकिन जंगलों पर दबाव बढ़ सकता है।

  • जैव विविधता संरक्षण अपनाने से पर्यावरणीय नुकसान घटता है, जबकि सौर ऊर्जा लागत में केवल मामूली वृद्धि दर्ज की गई।

  • न्यूयॉर्क में लगभग 46,000 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए 1,07,700 एकड़ भूमि की जरूरत भविष्य के लिए अनुमानित की गई है।

दुनिया भर में सौर ऊर्जा परियोजनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी वजह तकनीक में सुधार, तेल और गैस की बढ़ती कीमतें और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता है। लेकिन बड़े स्तर पर सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत होती है। इसी कारण कई जगहों पर खेती की जमीन और प्राकृतिक पर्यावरण को लेकर विवाद बढ़ रहा है।

इसी समस्या को समझने के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में एक नया अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहां सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाई जा सकती हैं ताकि खेती और जैव विविधता पर कम से कम असर पड़े।

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अध्ययन का उद्देश्य और तरीका

इस शोध का नाम “सस्टेनेबिलिटी ट्रेड-ऑफ्स एट द नेक्सस ऑफ सोलर एनर्जी, एग्रीकल्चर एंड बायोडायवर्सिटी” रखा गया है। यह अध्ययन जियोग्राफी एंड सस्टेनेबिलिटी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

इसमें शोधकर्ताओं ने न्यूयॉर्क राज्य को तीन मुख्य नजरियों से देखा। पहला, सौर ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त और कम लागत वाली जगहें। दूसरा, ऐसी जमीन जिसे खेती के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। तीसरा, ऐसे इलाके जो जैव विविधता यानी पौधों और जानवरों के प्राकृतिक आवास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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इन तीनों को एक साथ मिलाकर एक ऐसा नक्शा तैयार किया गया जिसमें यह दिखाया गया कि कहां-कहां सोलर प्रोजेक्ट लगाने से कम टकराव होगा और कहां ज्यादा विवाद हो सकता है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष क्या मिले?

अध्ययन में पाया गया कि अगर खेती की जमीन को प्राथमिकता दी जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत उपजाऊ खेतों को सौर परियोजनाओं से बचाया जा सकता है। लेकिन इसका एक नतीजा यह होगा कि सोलर प्रोजेक्ट जंगलों या अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों की ओर बढ़ सकते हैं।

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वहीं अगर जैव विविधता को बचाने पर जोर दिया जाए, तो पर्यावरण को नुकसान कम होगा, लेकिन सोलर प्रोजेक्ट के खर्च में बहुत मामूली बढ़ोतरी होगी। शोध के अनुसार यह बढ़ोतरी लगभग 0.17 प्रतिशत ही है, जो बहुत कम मानी जाती है।

इसका मतलब यह है कि पर्यावरण और ऊर्जा विकास के बीच संतुलन बनाना संभव है, बस सही योजना की जरूरत है।

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कितनी जमीन की जरूरत होगी

न्यूयॉर्क राज्य की ऊर्जा एजेंसी के एक अनुमान के अनुसार, अगर राज्य को 2050 तक लगभग 85 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना है, तो उसे करीब 46,000 मेगावाट सौर ऊर्जा बनानी होगी।

इसके लिए लगभग 1,07,700 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। तुलना के लिए, न्यूयॉर्क राज्य की कुल जमीन लगभग तीन करोड़ एकड़ है, जिसमें बड़ी मात्रा खेती और संरक्षित जंगलों की है। यानी सौर ऊर्जा के लिए बहुत बड़ी नहीं, लेकिन महत्वपूर्ण जमीन चाहिए होगी।

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जमीन उपयोग में टकराव की समस्या

शोधकर्ताओं का कहना है कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर अक्सर स्थानीय लोगों में चिंता रहती है। कुछ लोग खेती की जमीन बचाना चाहते हैं, तो कुछ लोग जंगलों और पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

इस वजह से कई बार परियोजनाओं का विरोध होता है। लेकिन नया मॉडल यह समझने में मदद करता है कि कौन सी जगहें ऐसी हैं जहां सोलर प्रोजेक्ट लगाने से कम विवाद होगा और कौन सी जगहें संवेदनशील हैं।

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भविष्य की ऊर्जा नीति के लिए संकेत

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मॉडल केवल न्यूयॉर्क ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी हिस्से में उपयोग किया जा सकता है। जहां भी सौर ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, वहां यह तरीका मदद कर सकता है।

इस अध्ययन से यह संदेश मिलता है कि ऊर्जा विकास, खेती और पर्यावरण संरक्षण तीनों को एक साथ चलाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सरकारें और योजनाकार सही आंकड़ों और मॉडल का उपयोग करें ताकि विकास भी हो और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।

यह अध्ययन दिखाता है कि सौर ऊर्जा का विस्तार रोकना समाधान नहीं है, बल्कि इसे समझदारी से योजना बनाकर आगे बढ़ाना जरूरी है। सही जगह का चयन करके हम खेती की जमीन, जंगल और जैव विविधता की रक्षा करते हुए स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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