पवन और सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ बिजली ग्रिड की नई चुनौतियां आई सामने

अध्ययन में कहा गया है कि पवन और सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से बिजली ग्रिड में बदलाव, कीमतों पर असर और इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र व नीति के बीच सहयोग जरूरी
पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।
पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।

  • सूरज और हवा पर निर्भरता के कारण बिजली उत्पादन अनिश्चित होता है, जिससे आपूर्ति और मांग का संतुलन कठिन बनता है।

  • सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा थोक बाजार में कीमतें घटाती है, जिससे पारंपरिक बिजली संयंत्रों की आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।

  • अब बिजली प्रणाली में केवल मांग नहीं बल्कि आपूर्ति भी बदलती रहती है, जिससे ग्रिड प्रबंधन अधिक जटिल हो गया है।

  • इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र और नीति क्षेत्रों के बीच सहयोग आवश्यक है ताकि उच्च नवीकरणीय ऊर्जा वाले सिस्टम विश्वसनीय रूप से चल सकें।

आज पूरी दुनिया में पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये दोनों ऊर्जा स्रोत स्वच्छ, सस्ते और पर्यावरण के लिए बेहतर माने जाते हैं। एक बार जब पवन टरबाइन या सोलर पैनल लग जाते हैं, तो उनसे बिजली बनाने की लागत बहुत कम हो जाती है। इसे अर्थशास्त्र में “शून्य सीमांत लागत” कहा जाता है, यानी एक अतिरिक्त यूनिट बिजली बनाने के लिए लगभग कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता।

लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी समस्या भी सामने आती है इन ऊर्जा स्रोतों की अनिश्चितता। सूरज हर समय नहीं चमकता और हवा भी हमेशा नहीं चलती। इसलिए इनसे बनने वाली बिजली स्थिर नहीं होती। इसी वजह से बिजली ग्रिड को संभालना पहले की तुलना में ज्यादा कठिन हो गया है।

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बिजली प्रणाली में बदलता संतुलन

पहले के समय में बिजली व्यवस्था में मुख्य समस्या यह थी कि लोगों की मांग बदलती रहती थी। जब ज्यादा बिजली चाहिए होती थी तो पावर प्लांट ज्यादा उत्पादन करते थे और जब कम जरूरत होती थी तो उत्पादन घटा दिया जाता था।

लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब सिर्फ मांग ही नहीं बदलती, बल्कि आपूर्ति भी लगातार बदलती रहती है। इसका कारण पवन और सौर ऊर्जा हैं, जिनका उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है। इस दोहरी अनिश्चितता ने बिजली ग्रिड को और जटिल बना दिया है।

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पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।

कीमतों पर असर और बाजार की समस्या

पवन और सौर ऊर्जा की एक खास बात यह है कि ये बहुत सस्ती बिजली पैदा करते हैं। जब ये बड़ी मात्रा में बिजली बाजार में आती है, तो थोक बिजली की कीमतें कम हो जाती हैं। यह उपभोक्ताओं के लिए अच्छा है क्योंकि उन्हें सस्ती बिजली मिलती है।

लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। जब कीमतें बहुत कम हो जाती हैं, तो पारंपरिक बिजली संयंत्र जैसे कोयला या गैस आधारित पावर प्लांट्स के लिए मुनाफा कम हो जाता है। ये प्लांट्स तब भी जरूरी होते हैं जब हवा नहीं चल रही होती या सूरज नहीं चमक रहा होता। लेकिन कम कीमतों के कारण इनका चलना आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है।

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पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।

क्या कहता है अध्ययन?

इस विषय पर अमेरिका की जॉर्जिया टेक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक विस्तृत अध्ययन किया है। यह अध्ययन “रिन्यूएबल एंड सस्टेनेबल एनर्जी रिव्यूज” नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसमें 2010 के बाद के 200 से अधिक शोध पत्रों का विश्लेषण किया गया है।

इस अध्ययन में इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र और नीति से जुड़े पहलुओं को एक साथ समझने की कोशिश की गई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि बिजली प्रणाली को समझने के लिए इन तीनों क्षेत्रों का मिलकर काम करना जरूरी है।

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पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।

अध्ययन में अध्ययनकर्ता के हवाले से कहा गया है कि पवन और सौर ऊर्जा सस्ती तो हैं, लेकिन इन्हें बिजली ग्रिड में शामिल करना आसान नहीं है। इसका कारण उनकी अस्थिरता है। कभी बहुत ज्यादा बिजली बनती है और कभी बहुत कम।

अलग-अलग क्षेत्रों का सहयोग जरूरी

शोध में यह भी बताया गया है कि भविष्य की बिजली व्यवस्था को सफल बनाने के लिए इंजीनियर, अर्थशास्त्री और नीति निर्माता इन सभी को एक साथ काम करना होगा।

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पवन और सौर ऊर्जा सस्ती होने के बावजूद बिजली ग्रिड में अस्थिरता और संचालन संबंधी नई जटिल चुनौतियां उत्पन्न करती हैं।

इंजीनियर यह देखते हैं कि बिजली कैसे बनाई और वितरित की जाए। अर्थशास्त्री यह समझते हैं कि बाजार कैसे काम करता है और निवेश कैसे आकर्षित किया जाए। वहीं नीति निर्माता यह तय करते हैं कि किस दिशा में ऊर्जा प्रणाली को आगे बढ़ाना है। यदि ये तीनों क्षेत्र अलग-अलग काम करेंगे तो समस्या का पूरा समाधान नहीं मिल पाएगा।

भविष्य की दिशा

भविष्य में जब दुनिया में पवन और सौर ऊर्जा का उपयोग और बढ़ेगा, तो बिजली प्रणाली को और अधिक लचीला बनाना होगा। इसके लिए बेहतर तकनीक, ऊर्जा भंडारण और नए बाजार नियमों की जरूरत होगी। साथ ही ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो निजी निवेश को प्रोत्साहित करें और लंबे समय तक स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा करें।

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पवन और सौर ऊर्जा पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद हैं और भविष्य की ऊर्जा का आधार बन सकते हैं। लेकिन इनके साथ आने वाली चुनौतियों को समझना भी जरूरी है। बिजली ग्रिड, बाजार और नीति इन तीनों का संतुलन बनाए बिना इनका पूरा लाभ नहीं मिल सकता।

इसलिए आने वाले समय में केवल तकनीक नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सहयोग ही ऊर्जा प्रणाली को सफल और स्थिर बना सकता है।

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