32 फीसदी से अधिक क्षमता प्रदान करते हैं नए बाइफेशियल सोलर सेल

नई टॉपकॉन और परोव्स्काइट तकनीक से सोलर सेल की क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा के नुकसान को घटाने और भविष्य में सस्ती व टिकाऊ सौर ऊर्जा विकसित करने की दिशा
वैज्ञानिकों ने टॉपकॉन सोलर सेल का नया डिजाइन विकसित किया, जो ऊर्जा हानि कम करता है और रोशनी अवशोषण बेहतर बनाता है।
वैज्ञानिकों ने टॉपकॉन सोलर सेल का नया डिजाइन विकसित किया, जो ऊर्जा हानि कम करता है और रोशनी अवशोषण बेहतर बनाता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने टॉपकॉन सोलर सेल का नया डिजाइन विकसित किया, जो ऊर्जा हानि कम करता है और रोशनी अवशोषण बेहतर बनाता है।

  • फ्रंट साइड पर फिंगर-टाइप संरचना अपनाने से अनावश्यक परत हटाई गई, जिससे अधिक सूर्य प्रकाश सेल के अंदर प्रवेश कर पाता है।

  • बैक साइड में द्विस्तरीय संरचना जोड़कर स्थिरता बढ़ाई गई और धातु के नुकसान से सुरक्षा प्रदान की गई।

  • बेहतर निर्माण तकनीक और चिकनी सतह के उपयोग से इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह सुधरा, जिससे कुल दक्षता में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई।

  • परोव्स्काइट के साथ संयोजन से टैंडम सोलर सेल बना, जिसने 32 प्रतिशत से अधिक दक्षता हासिल कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया।

सौर ऊर्जा आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोतों में से एक बनती जा रही है। सोलर सेल ऐसे उपकरण होते हैं जो सूरज की रोशनी को सीधे बिजली में बदल देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिक और इंजीनियर लगातार ऐसे नए तरीके खोज रहे हैं जिनसे सोलर सेल की क्षमता बढ़ाई जा सके और वे लंबे समय तक ठीक से काम कर सकें। हाल ही में कुछ शोधकर्ताओं ने एक नया सोलर सेल डिजाइन विकसित किया है, जो पुराने डिजाइनों की कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है।

टॉपकॉन सोलर सेल क्या है

टॉपकॉन का पूरा नाम टनल ऑक्साइड पासिवेटिंग कॉन्टैक्ट है। यह एक खास प्रकार की तकनीक है जिसका उपयोग आधुनिक सोलर सेल में किया जाता है। इसमें बहुत पतली ऑक्साइड की परत और सिलिकॉन की एक परत होती है, जो बिजली के प्रवाह को बेहतर बनाती है और ऊर्जा के नुकसान को कम करती है। यह तकनीक सोलर सेल की दक्षता बढ़ाने में मदद करती है, लेकिन इसके साथ कुछ समस्याएं भी जुड़ी हुई हैं।

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मौजूदा समस्या

टॉपकॉन सोलर सेल में एक बड़ी समस्या यह है कि इसमें दो चीजों के बीच संतुलन बनाना कठिन होता है। एक तरफ वैज्ञानिक चाहते हैं कि बिजली का नुकसान कम हो, जिसे रिकॉम्बिनेशन लॉस कहा जाता है। दूसरी तरफ वे चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा सूरज की रोशनी सेल के अंदर जाए। लेकिन जब एक समस्या को ठीक किया जाता है, तो दूसरी बढ़ जाती है। यही कारण है कि अब तक इसकी क्षमता को और बढ़ाना मुश्किल रहा है।

नया डिजाइन क्या है

शोधकर्ताओं ने इस समस्या को हल करने के लिए सोलर सेल के डिजाइन में बदलाव किया। उन्होंने सोलर सेल के आगे और पीछे दोनों हिस्सों को नए तरीके से बनाया। इस नए डिजाइन का मुख्य उद्देश्य यह था कि ऊर्जा का नुकसान भी कम हो और रोशनी का उपयोग भी ज्यादा से ज्यादा हो सके।

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फ्रंट साइड में बदलाव

सोलर सेल के सामने वाले हिस्से में वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका अपनाया। पहले टॉपकॉन परत पूरे क्षेत्र में फैली होती थी, लेकिन अब इसे केवल उन जगहों पर रखा गया है जहां धातु की उंगलियां यानी मेटल फिंगर्स होती हैं। इससे यह फायदा हुआ कि बाकी जगहों से रोशनी आसानी से अंदर जा सकती है। इस बदलाव से रोशनी का नुकसान कम हुआ और सेल की क्षमता बढ़ गई।

बैक साइड में सुधार

सोलर सेल के पीछे वाले हिस्से में भी बदलाव किए गए। यहां दो परतों वाला नया डिजाइन इस्तेमाल किया गया। इसमें एक बहुत पतली ऑक्साइड परत जोड़ी गई, जो सेल को नुकसान से बचाती है। इससे सेल ज्यादा स्थिर और टिकाऊ बनता है। साथ ही यह बिजली के प्रवाह को भी बेहतर बनाता है।

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बेहतर सामग्री और निर्माण

शोधकर्ताओं ने केवल डिजाइन ही नहीं बदला, बल्कि सामग्री और निर्माण प्रक्रिया में भी सुधार किया। उन्होंने सिलिकॉन की सतह को ज्यादा चिकना बनाया, जिससे इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह बेहतर हो सके। इसके अलावा एक खास हीटिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे परतें अधिक समान और मजबूत बनीं। इन सभी सुधारों से सोलर सेल की गुणवत्ता में काफी वृद्धि हुई।

परोव्स्काइट के साथ संयोजन

इस नए टॉपकॉन सोलर सेल को परोव्स्काइट नामक सामग्री के साथ भी जोड़ा गया। परोव्स्काइट एक विशेष प्रकार की सामग्री है जो सूरज की रोशनी को बहुत अच्छे से अवशोषित करती है। जब इसे सिलिकॉन सोलर सेल के साथ मिलाया जाता है, तो इसे टैंडम सोलर सेल कहा जाता है। यह तकनीक सूरज की अलग-अलग तरंगों को पकड़ सकती है, जिससे कुल ऊर्जा उत्पादन बढ़ जाता है।

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परिणाम और उपलब्धि

इस नए डिजाइन के सोलर सेल ने बहुत अच्छे परिणाम दिए। सामान्य सोलर सेल के रूप में इसकी दक्षता 26 प्रतिशत से अधिक रही, जो बहुत उच्च मानी जाती है। जब इसे परोव्स्काइट के साथ जोड़ा गया, तो इसकी दक्षता 32 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई। यह दर्शाता है कि यह तकनीक भविष्य में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

भविष्य की दिशा

शोधकर्ता अभी भी इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सोलर सेल और अधिक पतले, सस्ते और टिकाऊ बनें। साथ ही वे यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ये लंबे समय तक बिना खराब हुए काम करें। आने वाले समय में यह तकनीक बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा सकती है।

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यह नया सोलर सेल डिजाइन ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सोलर सेल की क्षमता बढ़ती है, बल्कि यह भी साबित होता है कि सही डिजाइन और नई तकनीक से पुरानी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो यह स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के भविष्य को मजबूत बना सकती है। यह शोध नेचर एनर्जी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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