अमेजन के जंगल अब सोख नहीं, छोड़ रहे हैं कार्बन! जंगलों की आग व कटाई से बढ़ा संकट

अमेजन के जंगलों पर मंडराया बड़ा खतरा, आग और पेड़ों की कटाई से बढ़ा कार्बन उत्सर्जन, घटती बारिश और बढ़ती गर्मी ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाई, संरक्षण की तत्काल जरूरत
बढ़ती गर्मी, सूखा और जंगलों की आग ने अमेजन को खतरनाक टिपिंग पॉइंट की ओर धकेलने की आशंका बढ़ाई।
बढ़ती गर्मी, सूखा और जंगलों की आग ने अमेजन को खतरनाक टिपिंग पॉइंट की ओर धकेलने की आशंका बढ़ाई।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • अमेजन के जंगल 2010 से 2024 के बीच हर साल सोखने से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में छोड़ते रहे।

  • जंगलों में आग से सालाना करीब 1.47 अरब मीट्रिक टन सीओ2 उत्सर्जित हुई, जबकि अवशोषण क्षमता बेहद कम रही।

  • वनों की कटाई और क्षरण से सालाना बारिश में 8 प्रतिशत तथा शुष्क मौसम में 20 प्रतिशत तक गिरावट आई।

  • बढ़ती गर्मी, सूखा और जंगलों की आग ने अमेजन को खतरनाक टिपिंग पॉइंट की ओर धकेलने की आशंका बढ़ाई।

  • वैज्ञानिकों ने आग पर रोक, शून्य वनों की कटाई और नष्ट जंगलों की बहाली को अमेजन बचाने के लिए जरूरी बताया।

दुनिया के फेफड़े कहे जाने वाले अमेजन के जंगल आज खुद सांस लेने के संकट से जूझ रहे हैं। कभी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) सोखकर धरती को ठंडा रखने में मदद करने वाला यह विशाल जंगल अब ग्रीनहाउस गैसों का बड़ा स्रोत बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि अगर जंगलों में लगने वाली आग, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर रोक नहीं लगी, तो अमेजन का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

ब्राजील के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च (आईएनपीई) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के मुताबिक, 2010 से 2024 के बीच अमेजन के जंगलों ने हर साल औसतन जितनी कार्बन डाइऑक्साइड सोखी, उससे करीब 1.17 अरब मीट्रिक टन ज्यादा वातावरण में छोड़ दी। यह आंकड़ा पूरी दुनिया के लिए चिंता की घंटी है। यह अध्ययन नेचर नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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आग की लपटों में जल रहा जंगलों का भविष्य

अध्ययन के अनुसार, जंगलों में लगने वाली आग इस संकट की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। आग से हर साल लगभग 1.47 अरब मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, जबकि जंगल करीब 30 करोड़ मीट्रिक टन सीओ2 ही सोख पाते हैं। यानी जंगल जितनी गैस अपने भीतर समेट रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा गैस आग के जरिए हवा में घुल रही है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अमेजन की इस हालत के पीछे इंसानी गतिविधियां बड़ी वजह हैं। जंगलों को काटकर जमीन का इस्तेमाल बदलना और आग लगने की घटनाएं पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर रही हैं। उनका कहना है कि विकास का ऐसा मॉडल अपनाने की जरूरत है, जिसमें जंगलों को नष्ट करने के बजाय उन्हें सुरक्षित रखने को महत्व मिले।

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घटती बारिश, बढ़ती गर्मी और सूखती धरती

अमेजन का संकट सिर्फ पेड़ों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे इलाके के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिकों ने पिछले 46 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया और पाया कि वनों की कटाई और जंगलों के क्षरण के कारण सालाना बारिश में करीब आठ प्रतिशत की कमी आई है। अगस्त से अक्टूबर के शुष्क मौसम में यह गिरावट लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इसी दौरान औसत सालाना तापमान 1.13 डिग्री सेल्सियस बढ़ा, जबकि शुष्क मौसम में तापमान में 1.81 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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कम बारिश और ज्यादा गर्मी से जंगल सूखते हैं। सूखे पेड़ों और पत्तियों में आग तेजी से फैलती है। आग फिर वातावरण को गर्म करती है और जंगलों को और कमजोर बना देती है। इस तरह एक खतरनाक चक्र बन रहा है, जो अमेजन के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहा है।

2025 में भी आग का बढ़ता कहर

ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में आग की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट में दिए गए आईएनपीई के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दस महीने से भी कम समय में 41,200 से ज्यादा आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पूरे पिछले साल यह संख्या 43,130 थी। इनमें से करीब 58 प्रतिशत घटनाएं सितंबर और अक्टूबर में हुईं।

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घने धुएं ने अमेजनास राज्य के कई शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। राज्य की राजधानी मनाउस में भी लोगों को जहरीले धुएं का सामना करना पड़ा। सांस संबंधी बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा और स्कूलों में कक्षाएं तक रोकनी पड़ीं। कुछ घटनाओं में जानबूझकर आग लगाए जाने के संदेह पर जांच भी शुरू हुई।

कहीं देर न हो जाए!

वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मौसम वाले वर्षों का अध्ययन करके पाया कि जंगलों की कार्बन सोखने की क्षमता पर मौसम और मानवीय गतिविधियों, दोनों का असर पड़ता है। अल नीनो जैसी घटनाएं गर्मी और सूखे को बढ़ाती हैं, जबकि ला नीना के दौरान हुई अच्छी बारिश ने कुछ वर्षों में जंगलों को राहत दी।

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लेकिन यह राहत स्थायी समाधान नहीं है। वैज्ञानिकों की चिंता है कि यदि जंगल इसी तरह कमजोर होते रहे, तो एक ऐसा मोड़ आ सकता है, जहां अमेजन खुद को पहले की तरह दोबारा हरा-भरा नहीं कर पाएगा। इसे 'टिपिंग पॉइंट' कहा जाता है। इसके बाद घने वर्षावनों की जगह सूखी घास और दूसरी तरह की वनस्पतियां फैल सकती हैं।

बचाना है तो अभी कदम उठाने होंगे

विशेषज्ञों का साफ संदेश है कि अमेजन को बचाने के लिए जंगलों में आग की घटनाओं को तेजी से कम करना होगा, वनों की कटाई रोकनी होगी और नष्ट हो चुके जंगलों को फिर से हरा-भरा बनाना होगा।

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अमेजन की रक्षा केवल ब्राजील की जिम्मेदारी नहीं है। यह जंगल पूरी दुनिया के मौसम, जैव विविधता और जलवायु संतुलन से जुड़ा है। अगर इसके पेड़ यूं ही जलते और कटते रहे, तो नुकसान सिर्फ जंगलों का नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की हवा, पानी और जिंदगी पर भी पड़ेगा।

धरती के इस हरे खजाने को बचाने का वक्त अब है। कल शायद बहुत देर हो जाए।

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