

5.6 करोड़ साल पहले अचानक बढ़ी गर्मी ने पृथ्वी के जंगल, भूमि और समुद्री जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
सीओ2 के अचानक उत्सर्जन के कारण 300 साल में कॉनिफर जंगल गायब और फर्न जैसी पौधों का प्रभुत्व बढ़ा।
जंगलों में अत्यधिक आग और भूमि कटाव से तलछट में चारकोल और मिट्टी के कण समुद्र में जमा हुए।
सीओ2 की वजह से समुद्र अम्लीय हुआ, कैल्शियम कार्बोनेट बनाने वाले जीवों के लिए जीवन कठिन हो गया।
आज की सीओ2 बढ़ोतरी पेटीएम से दो से 10 गुना तेज है, जिससे जंगल, समुद्र और मौसम तेजी से प्रभावित हो रहे हैं।
लगभग 5.6 करोड़ साल पहले, पृथ्वी का वातावरण पहले से ही गर्म था। उस समय की जलवायु को पेलियोसीन-इओसीन थर्मल मैक्सिमम (पेटीएम) कहा जाता है। हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में पता चला है कि उस समय पृथ्वी की गर्मी में अचानक तेजी से वृद्धि हुई थी और इसका असर धरती और समुद्र दोनों पर हुआ।
आज की जलवायु परिवर्तन की तुलना में, उस समय का बदलाव लगभग उतना ही तेज था, लेकिन अब हम उससे भी तेज सीओ2 उत्सर्जन कर रहे हैं। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में 19 जनवरी को प्रकाशित किया गया।
पेटीएम 5.6 करोड़ साल पहले का गर्म समय
पेटीएम के समय पृथ्वी पहले से ही गर्म थी। उस समय ऊंचे अक्षांशों पर भी बहुत सारी हरियाली थी। बड़ी मात्रा में कार्बन पेड़ों और जंगलों में संग्रहित था।
विशेषकर कॉनिफर वाले जंगल बहुत विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए थे। इस दौरान अचानक बढ़ते सीओ2 के कारण पृथ्वी और गर्म हो गई, और इसका असर जंगलों और समुद्र दोनों पर देखा गया।
शोध में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने नॉर्वे के समुद्र तट से ड्रिल करके जमा किए गए समुद्री तलछट के नमूने का अध्ययन किया। उन्होंने पॉलेन और स्पोर्स की जांच की। इन तलछट की परतों में साल-दर-साल बदलाव देखा जा सकता था। इस अध्ययन से यह पता चला कि पृथ्वी पर जीवन और वातावरण पर गर्मी का असर बहुत जल्दी होता है।
जंगलों और भूमि पर असर
सीओ2 की तेजी से बढ़ोतरी के 300 साल के भीतर कॉनिफर जंगल गायब हो गए। उनकी जगह फर्न जैसे पौधे फैल गए। जंगल की आग के कारण तलछट में चारकोल की मात्रा बढ़ी, जिससे पता चला कि जंगलों में आग ज्यादा लगी।
मिट्टी और कटाव होने से समुद्र में क्ले मटेरियल (मिट्टी के कण) बढ़ गए। इसका मतलब है कि जमीन कट कर समुद्र में बह गई। इससे स्पष्ट होता है कि पृथ्वी की जमीन और जंगल तेजी से प्रभावित हो सकते हैं, जब वातावरण में सीओ2 बहुत बढ़ जाता है।
समुद्र पर असर
समुद्र में भी पेटीएम के समय बड़े बदलाव हुए, सीओ2 की तेजी से बढ़ोतरी से समुद्र अम्लीय हो गया। इस वजह से कैल्शियम कार्बोनेट बनाने वाले जीव जैसे शंख और कंकाल वाले जीव मरने लगे। इस तरह समुद्री जीवन पर भी बड़ा असर पड़ा।
आज की जलवायु स्थिति
पेटीएम के समय की तुलना में आज का सीओ2 उत्सर्जन दो से 10 गुना तेज है। इसका मतलब है कि आज की जलवायु परिवर्तन इतिहास में अभूतपूर्व है। आज भी जंगलों में आग बढ़ रही है, बाढ़ और सूखा जैसी अत्यधिक मौसम की घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र बहुत जल्दी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, और मानवजनित सीओ2 उत्सर्जन इससे और भी तेजी से गर्मी बढ़ा रहा है। 5.6 करोड़ साल पहले, अचानक बढ़ते सीओ2 ने जंगलों को नष्ट किया, जंगलों में आग की घटनाओं को बढ़ाया, मिट्टी और भूमि को कटाव के कारण समुद्र में बहाया, समुद्री जीवन को प्रभावित किया।
आज की जलवायु परिवर्तन की दर इससे भी तेज है। अगर हम सीओ2 उत्सर्जन को कम नहीं करेंगे, तो पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र में इसी तरह तेजी से और बड़े पैमाने पर बदलाव आ सकते हैं।
इस शोध से हमें यह सीख मिलती है कि जलवायु परिवर्तन केवल दूर की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह अब भी हमारी धरती पर तेजी से हो रहा है। इस प्रकार, पेटीएम और आज की जलवायु परिवर्तन के अध्ययन से हम समझ सकते हैं कि प्राकृतिक और मानवजनित सीओ2 उत्सर्जन दोनों पृथ्वी के जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।