महासागरीय ऑक्सीजन पहले घटी, जंगलों में आग बाद में बढ़ी, अध्ययन से पृथ्वी संकट की कहानी बदली

नए अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है कि पहले समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी हुई, फिर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे विलुप्ति की घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

  • टेनेसी की चट्टानों के रासायनिक संकेत बताते हैं कि समुद्री परिवर्तन पहले शुरू हुए, फिर भूमि पर आग बढ़ी।

  • लेट डेवोनियन काल में समुद्री जीवन बड़े पैमाने पर समाप्त हुआ, जिसे पृथ्वी के पांच बड़े विलुप्ति कालों में माना जाता है।

  • शोध में पाया गया कि समुद्र में कार्बन दबने से वातावरणीय ऑक्सीजन संतुलन बदला, जिससे जंगलों में आग बढ़ी और फैली।

  • अध्ययन दिखाता है कि पृथ्वी की प्रणालियां आपस में जुड़ी हैं, जहां महासागर, वातावरण और भूमि में बदलाव एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

अमेरिका के अलाबामा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के बहुत पुराने इतिहास से जुड़ी एक बड़ी खोज की है। इस शोध के अनुसार, करोड़ों साल पहले जंगलों की भीषण आग ने समुद्रों में जीवन के पतन को शुरू नहीं किया था, बल्कि वह पहले से चल रहे समुद्री संकट का परिणाम थी। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित किया गया है।

यह शोध पृथ्वी के उस समय को समझने से जुड़ा है जिसे लेट डेवोनियन काल कहा जाता है। यह समय लगभग 37 करोड़ साल पहले का है, जब समुद्रों में बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन की कमी हो गई थी और समुद्री जीवन तेजी से खत्म होने लगा था। इस घटना को पृथ्वी के पांच सबसे बड़े विलुप्ति कालों में से एक माना जाता है।

यह भी पढ़ें
भारत में 25 करोड़ साल पुरानी जंगल की आग के सबूत मिले
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

समुद्र पहले बदले, फिर धरती पर आग बढ़ी

अब तक कई वैज्ञानिक मानते थे कि शायद जंगलों की आग ने इस बड़े संकट को जन्म दिया होगा। उनका विचार था कि आग से निकलने वाले पोषक तत्व नदियों के जरिए समुद्र तक पहुंचे और वहां ऑक्सीजन की कमी और जीवन के विनाश का कारण बने।

लेकिन नए अध्ययन ने इस सोच को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी पहले शुरू हुई थी और उसके बाद ही धरती पर जंगलों की आग बढ़ी। इसका मतलब है कि समुद्रों में हुआ बदलाव पहले हुआ और उसका असर बाद में भूमि पर दिखा।

यह भी पढ़ें
जलवायु परिवर्तन के कारण जंगलों में लंबे समय तक लग रही है आग, खतरे में 84 फीसदी प्रजातियां
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

टेनेसी की चट्टानों से मिले अहम संकेत

शोध टीम ने अमेरिका के टेनेसी राज्य में एक शेल चट्टान के नमूनों का अध्ययन किया। इन चट्टानों में करोड़ों साल पुराने समय के रासायनिक और जैविक संकेत सुरक्षित हैं। वैज्ञानिकों ने बहुत सूक्ष्म स्तर पर इन संकेतों का विश्लेषण किया।

इन चट्टानों में पाए गए “आणविक निशान” यह बताते हैं कि पहले समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी के संकेत मिले और उसके बाद ही जंगलों की आग के प्रमाण दिखाई दिए। इससे घटनाओं के क्रम को पहली बार इतने स्पष्ट रूप में समझा जा सका।

यह भी पढ़ें
5.6 करोड़ साल पहले सीओ2 बढ़ा, जिससे जंगलों की आग व भूमि कटाव में बेहताशा बढ़ोतरी हुई
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि पहले इस क्रम को लेकर स्पष्ट प्रमाण नहीं थे, क्योंकि अलग-अलग जगहों से मिले नमूनों की समय-सीमा ठीक से मेल नहीं खाती थी। इस बार एक ही स्थान पर बहुत बारीकी से समय के अनुसार अध्ययन किया गया, जिससे सही क्रम सामने आ सका।

ऑक्सीजन और आग के बीच गहरा संबंध

अध्ययन के अनुसार, जब समुद्र में जीवन बड़ी मात्रा में मरने लगा, तो कार्बन समुद्र की तलहटी में दबने लगा। यह कार्बन पहले वातावरण में ऑक्सीजन के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनता था, लेकिन अब वह दबकर रह गया।

यह भी पढ़ें
मिट्टी में दबे जहरीले धातु के कणों को फैला रही है जंगल की आग, बन सकता है बड़ा खतरा
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

इस प्रक्रिया ने लंबे समय में पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन के संतुलन को बदल दिया। जब वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बदला, तो भूमि पर वनस्पति अधिक ज्वलनशील हो गई। इससे जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गईं और वे अधिक तीव्र और बार-बार होने लगीं।

यह प्रभाव तुरंत नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे और जटिल तरीके से सामने आया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव केवल उस बड़े विलुप्ति काल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके बाद भी लंबे समय तक जारी रहा।

यह भी पढ़ें
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में 91 फीसदी तक बढ़ गया है जंगलों में आग का खतरा
समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी जंगलों की आग से पहले हुई, जिससे प्राचीन विलुप्ति घटनाओं की पारंपरिक मान्यता बदल गई है।

आज के समय के लिए क्या संकेत मिलते हैं?

यह अध्ययन केवल प्राचीन इतिहास को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। पृथ्वी के समुद्र, वातावरण और भूमि आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। एक क्षेत्र में बदलाव दूसरे क्षेत्रों पर भी असर डाल सकता है।

आज जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों में ऑक्सीजन की कमी और जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में यह अध्ययन बताता है कि पृथ्वी की प्रणालियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं और उनमें बदलाव एक श्रृंखला प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है।

इस शोध से यह समझने में मदद मिलती है कि भविष्य में पर्यावरणीय बदलावों को केवल एक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए तंत्र के रूप में देखना होगा।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in