

धरती के महासागर तेजी से गर्म होकर जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। जून 2026 में समुद्र की सतह का वैश्विक औसत तापमान इस मौसम के लिए अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जिसने 2023 और 2024 के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए
कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और कॉपरनिकस मरीन सर्विस के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक नया तापमान रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पृथ्वी के जलवायु तंत्र के तेजी से बिगड़ते संतुलन का संकेत है
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव से महासागर अभूतपूर्व रूप से गर्म हो रहे हैं। यदि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत होता है, तो दुनिया को भीषण गर्मी, विनाशकारी बाढ़, शक्तिशाली चक्रवात, सूखा और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है
महासागर पृथ्वी की 90 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त गर्मी अपने भीतर समेट लेते हैं, ऐसे में उनका इस रफ्तार से गर्म होना समुद्री पारिस्थितिकी, मत्स्य संसाधनों, तटीय अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका के लिए गंभीर खतरे का संकेत है
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे, तो 2026 जलवायु रिकॉर्ड और चरम मौसम की नई भयावह कहानी लिख सकता है
धरती के महासागर अब सिर्फ गर्म नहीं हो रहे, बल्कि मानो बुखार में तप रहे हैं। रुझान दर्शाते हैं कि दुनिया के समुद्रों की सतह का तापमान जून में इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में भीषण गर्मी, बाढ़, तूफान और समुद्री जीवन पर गहराते संकट की चेतावनी है।
यूरोपीय यूनियन की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और कॉपरनिकस मरीन सर्विस के संयुक्त विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि 21 जून को समुद्र की सतह के तापमान ने 2023 और 2024 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
रुझानों में सामने आया है कि 21 जून को समुद्र की सतह का औसत तापमान 20.86 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 2023 और 2024 के 20.83 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड से कहीं अधिक है।
वहीं, कॉपरनिकस मरीन सर्विस ने अपने स्वतंत्र विश्लेषण में इसी दिन तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो पिछले रिकॉर्ड से 0.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है। हालांकि दोनों स्वतंत्र प्रणालियों का एक ही निष्कर्ष पर पहुंचना इस रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को और मजबूत बनाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह महज एक नया रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि पृथ्वी का जलवायु तंत्र तेजी से असंतुलित हो रहा है। ऐसे में यदि आने वाले महीनों में अल नीनो मजबूत होता है, तो दुनिया में लोगों को कहीं ज्यादा भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और शक्तिशाली तूफानों जैसी चरम मौसमी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का दोहरा असर
गौरतलब है कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने 2 जून 2026 को भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो के बनने की पुष्टि की थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो और इंसानी गतिविधियों से बढ़ रहे तापमान ने मिलकर समुद्रों को असामान्य रूप से गर्म कर दिया है।
यही वजह है कि पिछले तीन वर्षों से ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर दुनिया के अधिकांश महासागर सामान्य से 0.35 से 0.73 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहे हैं। जून 2026 में यह अंतर इस मौसम के लिए अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
यूरोपीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ईसीएमडब्ल्यूएफ) में कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो का कहना है मौजूदा हालात एक नए अनिश्चित दौर की शुरुआत का संकेत हो सकते हैं। उनके अनुसार, यदि समुद्र का तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहा और अल नीनो मजबूत हुआ, तो आने वाले महीनों में समुद्र और वातावरण दोनों में तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की आशंका है।
समंदर के गर्म होने का हमारे जीवन पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक महासागर पृथ्वी पर बढ़ने वाली अतिरिक्त गर्मी का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा सोख लेते हैं। इसलिए समुद्र का तापमान बढ़ना केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी जलवायु प्रणाली को प्रभावित करता है।
गर्म महासागर वातावरण में लंबे समय तक गर्मी बनाए रखते हैं और चक्रवातों व तूफानों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे वे अधिक शक्तिशाली और विनाशकारी बन सकते हैं। समुद्र से अधिक वाष्पीकरण होने के कारण भारी बारिश, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
साथ ही, समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है और हिमखंडों के पिघलने की रफ्तार भी तेज हो जाती है। इसका गंभीर असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) और अन्य समुद्री जीव बढ़ते तापमान के दबाव में आ जाते हैं।
वहीं, समुद्री हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र होने लगती हैं, जिससे मत्स्य संसाधनों, तटीय अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होती है। इसके अलावा, तटीय क्षेत्रों में गर्मी की लहरें भी अधिक तीव्र और लंबे समय तक रहने लगती हैं।
2023 जैसी स्थिति दोबारा बनने का खतरा
वैज्ञानिकों ने याद दिलाया है कि इससे पहले जब जून 2023 में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, तब उसके बाद दुनिया ने विनाशकारी गर्मी, भीषण बाढ़, सूखा और शक्तिशाली तूफानों का सामना किया था। अब 2026 में वह रिकॉर्ड भी टूट चुका है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति अस्थाई है या लंबे समय तक बनी रहेगी।
आमतौर पर समुद्र का वार्षिक अधिकतम तापमान जुलाई और अगस्त में दर्ज होता है, इसलिए आने वाले सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
कॉपरनिकस से जुड़े वैज्ञानिक लगातार समुद्र और वातावरण पर नजर बनाए हुए हैं। शुरुआती पूर्वानुमान बताते हैं कि इस बार अल नीनो कई दशकों में सबसे मजबूत घटनाओं में से एक हो सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो 2026 के शेष महीनों में महासागरों और धरती की सतह दोनों पर नए तापमान रिकॉर्ड बनने की आशंका बढ़ जाएगी।