

16 अप्रैल 2026 को ग्रेटर नोएडा लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 313 दर्ज किया गया। वहीं गाजियाबाद 308 के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
चिंता की बात है कि उत्तर प्रदेश के पांच शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जिससे राज्य तेजी से प्रदूषण का नया हॉटस्पॉट बनता दिख रहा है।
ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक दर्ज हुआ, जबकि राजधानी दिल्ली भी एक्यूआई बढ़कर 226 तक पहुंच गया। इसके साथ ही दिल्ली भी खराब हवा की चपेट में है।
241 शहरों के सरकारी आंकड़ों से साफ है कि देश के महज 9.1 फीसदी शहरों में ही हवा बेहतर है, जबकि 41 फीसदी से ज्यादा शहर अब भी चिंताजनक वायु गुणवत्ता झेल रहे हैं। यह संकेत है कि प्रदूषण अब केवल सर्दियों की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए सालभर की गंभीर चुनौती बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 16 अप्रैल 2026 को एक बार फिर देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 313 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 297 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 16 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 206 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 226 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 20 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 155 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 अप्रैल 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 9.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 41.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 46.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 0.8 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से करीब 11.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 29.4 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (308) दूसरे जबकि सिंगरौली (288) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह नोएडा (255) चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-बागपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 252 और 247 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (241) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हापुड़ (228), मानेसर (227) और दिल्ली (226) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के पांच शहर (ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, हापुड़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मानेसर, बिलीपाड़ा, बल्लभगढ़, रोहतक, नारनौल, यमुना नगर, जींद, धारूहेड़ा, सुआकाती, मंडीदीप, मंगुराहा, वातवा, करनाल, बिलासपुर, पंचगांव, बर्नीहाट (असम), अंबाला, नंदेसरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, सिंगरौली, नोएडा, बागपत, गुरुग्राम, हापुड़, दिल्ली, बुलंदशहर, मेरठ, बीकानेर, भिवाड़ी, टोंक, सिरसा, पानीपत, चंद्रपुर, बारबिल, करौली, हिसार, कुरुक्षेत्र, श्री गंगानगर, फरीदाबाद, जोधपुर, भोपाल, सीकर, मुजफ्फरनगर, पीथमपुर, खुर्जा, झुंझुनू, चूरू, लखनऊ, यादगीर, चित्तौड़गढ़, पाली, आगरा, हनुमानगढ़, वाराणसी, गया, देवास, उदयपुर, भीलवाड़ा, सासाराम, गांधीनगर, कटनी, नागौर, प्रतापगढ़, जैसलमेर, झालावाड़, मेहसाणा, वृंदावन, अहमदाबाद, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, पटना, जयपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 9.1 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, गुंटूर, गुवाहाटी, कल्याण, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सांगली, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गंगटोक, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पलवल आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 85 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अंबाला, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, धनबाद, रूहेड़ा, धुले, डूंगरपुर, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रतलाम, रोहतक, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, गुरुग्राम, हापुड़, मानेसर, मेरठ, नोएडा, सिंगरौली में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं ग्रेटर नोएडा (313) और गाजियाबाद (308) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 अप्रैल को यह आंकड़ा 121 दर्ज किया गया था।
85 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज भी ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 313 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 297 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 16 अंकों का उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 206 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 226 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 20 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 163 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 155 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 अप्रैल को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (308) दूसरे, जबकि सिंगरौली (288) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 199, गाजियाबाद में 308, गुवाहाटी में 43, गुरूग्राम में 241, नोएडा में 255, ग्रेटर नोएडा में 313 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 74 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 138, चेन्नई में 42, चंडीगढ़ में 86, हैदराबाद में 70, जयपुर में 108 और पटना में 109 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), भिलाई, भिवानी, चेन्नई, गुंटूर, गुवाहाटी, कल्याण, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रूपनगर, सांगली, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अलवर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद महाराष्ट्र), बदलापुर, बगलकोट, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गंगटोक, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पलवल, पंचकुला, परभनी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सतना, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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