प्रदूषण के नक्शे पर यूपी का बढ़ता दबदबा, बड़ौत समेत चार शहर टॉप-10 में शामिल

दूसरी तरफ देश में आइजोल-सासाराम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया।
Photo: Vikas Choudhary / CSE
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सारांश
  • 14 अगस्त को देश के प्रदूषण के मानचित्र पर उत्तर प्रदेश एक बार फिर चिंता के केंद्र में रहा। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में बड़ौत 220 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि टॉप-10 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर—बड़ौत, ग्रेटर नोएडा, मोदीनगर और बागपत—शामिल रहे।

  • बड़ौत में पीएम2.5 का दबदबा रहा और हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। इसके उलट आइजोल और सासाराम में एक्यूआई महज 17 रहा, जो दोनों शहरों के बीच हवा की गुणवत्ता में करीब 13 गुणा का अंतर दिखाता है।

  • रुझानों पर नजर डालें तो देश के 256 शहरों में 111 की हवा बेहतर, 114 की संतोषजनक और 30 शहरों की वायु गुणवत्ता मध्यम रही। यानी अधिकांश शहरों में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन मध्यम और खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या चिंता बढ़ा रही है।

  • दिल्ली में एक्यूआई 105 से घटकर 98 हुआ, जबकि फरीदाबाद में 131 से बढ़कर 144 पहुंच गया।

  • आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट केवल महानगरों तक सीमित नहीं है; छोटे और मध्यम शहर भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासकर पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता दबदबा साफ हवा के लिए गंभीर चेतावनी है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 14 अगस्त 2026 को देश में बड़ौत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 220 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (13 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में बड़ौत का जिक्र नहीं था।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बड़ौत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। बड़ौत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,360 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल-सासाराम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बड़ौत की तुलना आइजोल-सासाराम से करें तो वहां स्थिति 12.9 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में मोदीनगर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 190 दर्ज किया गया, हालांकि आज 45 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 145 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 105 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 98 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 7 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से दोबारा संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-14 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 144 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 अगस्त 2026 को 256 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 43.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 12.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 0.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 11.1 फीसदी का वृद्धि हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (198) दूसरे जबकि लेह (184) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (152) चौथे स्थान पर है। गुम्मिडीपूंडी (151) – पाली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मोदीनगर (145) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (144), फरीदाबाद (144) और अंबाला (141) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (बड़ौत, ग्रेटर नोएडा, मोदीनगर, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, गुम्मिडीपूंडी, पाली, मोदीनगर, फरीदाबाद, मेरठ, पानीपत, वातवा, हापुड़, मंडी गोबिंदगढ़, रायबरेली, चरखी दादरी, मुजफ्फरनगर और मानेसर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, बागपत, अंबाला, बद्दी, नोएडा, छपरा, तिरुमाला, गाजियाबाद, बुलंदशहर, जोरापोखर, सिवान, सोनीपत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 43.4 फीसदी यानी 111 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कुड्डालोर, कटक, दावणगेरे, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, करौली, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रोहतक, रूपनगर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीकाकुलम, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुपति, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अंबाला, अंगुल, बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बुलंदशहर, चरखी दादरी, छपरा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, जोरापोखर, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पानीपत, रायबरेली, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, तिरुमाला, टोंक और वातवा आदि शामिल हैं। वहीं बड़ौत (220) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 256 में से 111 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 114 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 13 अगस्त को भी यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।

30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज बड़ौत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 220 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (13 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में बड़ौत का जिक्र नहीं था।

इससे पहले कल देश में मोदीनगर की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 190 दर्ज किया गया, हालांकि आज 45 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 145 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 105 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 98 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 7 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से दोबारा संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई। 

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज की गई। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 131 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 144 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 13 अंक के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 14 अगस्त को बल्लभगढ़ (152) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (198) दूसरे, जबकि लेह (184) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 54, गाजियाबाद में 111, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 90, नोएडा में 123, ग्रेटर नोएडा में 198 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 67, चेन्नई में 74, चंडीगढ़ में 47, हैदराबाद में 47, जयपुर में 71 और पटना में 57 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 111 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारां, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेलापुर, बेलगाम, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, बोईसर, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दावणगेरे, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, करौली, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंगलौर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, शिलांग, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रोहतक, रूपनगर, समस्तीपुर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीकाकुलम, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुपति, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर आदि 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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