

दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में है। 28 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 329 दर्ज किया गया।
महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 95 अंक उछल गया, जिससे हवा ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। हालात इतने गंभीर हैं कि ग्रेटर नोएडा की हवा में पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2000 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया।
दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा समेत पूरा एनसीआर प्रदूषण की गिरफ्त में है, जबकि हरियाणा के सात शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
हालांकि देशभर की तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। समस्तीपुर सबसे साफ हवा वाला शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 21 रिकॉर्ड किया गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 240 शहरों में से 41 शहरों की हवा बेहतर और 108 शहरों की संतोषजनक रही, लेकिन करीब 38 फीसदी शहर अब भी मध्यम से खराब श्रेणी में हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हवा में बढ़ता पीएम2.5 और पीएम10 स्तर सांस, दिल और फेफड़ों की बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहा है, जो आने वाले दिनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 मई 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 329 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 234 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 95 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में समस्तीपुर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना समस्तीपुर से करें तो वहां स्थिति 15.6 गुणा खराब है।
वहीं कल श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 300 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 92 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 208 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 190 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 207 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 17 अंकों के उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 188 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 255 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 मई 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 17.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 37.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 20.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 12.5 फीसदी का उछाल आया है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 17.6 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 25 फीसदी का बढ़ोतरी दर्ज की गई, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में हिसार (300) दूसरे जबकि कैथल (278) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पानीपत (277) चौथे स्थान पर है। भिवानी (257)-गाजियाबाद (256) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
फरीदाबाद (255) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (243), करनाल (237) और जींद (232) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (हिसार, कैथल, पानीपत, भिवानी, फरीदाबाद, मानेसर, करनाल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि ग्रेटर नोएडा, कैथल, भिवानी, फरीदाबाद, मानेसर, करनाल, जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, गुरुग्राम, रोहतक, अंबाला, पंचगांव, पंचकुला, जालंधर, बिलासपुर, धौलपुर, खन्ना, कोटा, गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, बिलाईपाड़ा, चंडीगढ़ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं पानीपत, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, दिल्ली, बल्लभगढ़, उदयपुर, सिंगरौली, मुजफ्फरनगर, कुरुक्षेत्र, बागपत, मेहसाणा, विरार, भिवाड़ी, यमुना नगर, प्रतापगढ़, आगरा, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, ग्वालियर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, मंडीदीप, सिरोही, जैसलमेर, सवाई माधोपुर, वातवा, झुंझुनू, पटियाला, दौसा, पाली, टोंक, बुलंदशहर, बांसवाड़ा, जयपुर, करौली, सीकर, अमृतसर, भोपाल, फतेहाबाद, जालोर, अजमेर, अलवर, देवास, थूथुकुडी, जबलपुर, लखनऊ, लुधियाना, मुरादाबाद, सागर, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, जोधपुर, रतलाम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 17.1 फीसदी यानी 41 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, हल्दिया, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नंदेसरी, नासिक, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजगीर, रामनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, जोरापोखर, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 75 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अजमेर, अलवर, अंबाला, अमृतसर, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बुलंदशहर, चंडीगढ़, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, करौली, खन्ना, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नांदेड़, नारनौल, पाली, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, प्रतापगढ़, रायबरेली, रतलाम, रोहतक, सागर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरोही, थूथुकुडी, टोंक, उदयपुर, वातवा, विरार, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में भरतपुर, भिवानी, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, हिसार, जींद, कैथल, करनाल, मानेसर, मेरठ, मिलुपारा, नोएडा, पानीपत, श्री गंगानगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं ग्रेटर नोएडा (329) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से 41 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 मई को यह आंकड़ा 96 दर्ज किया गया था।
75 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 329 दर्ज किया गया। इससे पहले कल ग्रेटर नोएडा में सूचकांक 234 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 95 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही आज ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता 'खराब' से 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है।
वहीं कल श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 300 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 92 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 208 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 190 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 207 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 17 अंकों के उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आज दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 188 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 255 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 मई को पानीपत (277) चौथे स्थान पर है, वहीं हिसार (300) दूसरे, जबकि कैथल (278) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 142, गाजियाबाद में 256, गुवाहाटी में 60, गुरूग्राम में 174, नोएडा में 212, ग्रेटर नोएडा में 329 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 46 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 105, चेन्नई में 69, चंडीगढ़ में 106, हैदराबाद में 67, जयपुर में 118 और पटना में 89 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 41 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंबरनाथ, बागलकोट, बेगूसराय, बेलापुर, बेतिया, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, गंगटोक, हल्दिया, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, मदिकेरी, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नंदेसरी, नासिक, पंपोर, पेरुंदुरई, पुणे, राजगीर, रामनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बूंदी, बक्सर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, जोरापोखर, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोलकाता, कोल्लम, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सासाराम, सतना, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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