

13 फरवरी 2026 को देश में वायु प्रदूषण का संकट और गहराता दिखा, जब सूरत 286 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर बन गया। महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण का स्तर 110 अंक तक उछल गया, और हवा में पीएम2.5 की घातक मौजूदगी ने स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया।
सूरत की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक जहरीली दर्ज की गई।
सीपीसीबी के 238 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया कि देश में महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है, जबकि 63 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। खराब हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 38.5 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया।
प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (277) दूसरे और बल्लभगढ़ (262) तीसरे स्थान पर रहा, जबकि गुरुग्राम (237) और गुवाहाटी (222) जैसे शहर भी खराब श्रेणी में पहुंच गए।
दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 197 एक्यूआई तक पहुंच गया, हालांकि स्थिति अभी ‘मध्यम’ बनी हुई है।
इसके उलट शिलांग देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 27 दर्ज किया गया, यानी सूरत की हवा शिलांग से करीब 10 गुना अधिक प्रदूषित रही। कुल मिलाकर आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के अधिकांश शहरों में हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और प्रदूषण का नक्शा तेजी से फैल रहा है।
विश्लेषण के मुताबिक 13 फरवरी 2026 को देश में सूरत सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 12 फरवरी को सूरत में एक्यूआई 176 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 110 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि सूरत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सूरत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सूरत की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति करीब 10 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में पीथमपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 283 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 54 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 229 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। इसके बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 164 दर्ज किया गया था, जो 13 फरवरी को 33 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 197 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 फरवरी 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 34.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.7 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 38.5 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 149 दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (277) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (262) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 261 अंकों के साथ तालचेर चौथे स्थान पर है। वडोदरा- बहादुरगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 243 और 241 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गुरुग्राम (237) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्री गंगानगर (232), ब्यासनगर (230) और पीथमपुर (229) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुजरात के दो (सूरत, वडोदरा) और हरियाणा के तीन शहर (बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सूरत, मंडीदीप, वडोदरा, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, पीथमपुर, मंडी गोबिंदगढ़, टोंक, हापुड़, किशनगंज, सिंगरौली, नागपुर, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, भिवाड़ी, नाहरलागुन, अंकलेश्वर, राजकोट, कटक, कोलकाता, मुजफ्फरनगर, देहरादून, एलूर, भिवानी, मानेसर, बर्नीहाट, वातवा, हाजीपुर, मंडीखेड़ा, चरखी दादरी, यमुना गर, कटनी, चित्तौड़गढ़, सोनीपत, करनाल, नागांव, हल्दिया, अंबाला, धारूहेड़ा, आसनसोल, जलगांव, नलबाड़ी, रोहतक, नांदेड़, उज्जैन आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, तालचेर, गुवाहाटी, विशाखापत्तनम, बालासोर, सवाई माधोपुर, ग्वालियर, बद्दी, भुवनेश्वर, ग्रेटर नोएडा, सीकर, नोएडा, बेलापुर, हावड़ा, फरीदाबाद, कोटा, गांधीनगर, विरार, बुलंदशहर, चंद्रपुर, अहमदाबाद, भिवंडी, तिरुवनंतपुरम, पाली, भोपाल, बीकानेर, तुमकुरु, नयागढ़, बारबिल, दुर्गापुर, महाड, उदयपुर, पुणे, जयपुर, सिलीगुड़ी, बागपत, बिलीपाड़ा, धनबाद, कोरबा, कुंजेमुरा, बदलापुर, उल्हासनगर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), झुंझुनू, डूंगरपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, पंपोर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 82 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लुधियाना, मदिकेरी, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, थूथुकुडी, त्रिशूर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 132 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बेलापुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, कटक, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कल्याण, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वातवा, विरार, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, ब्यासनगर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हापुड़, किशनगंज, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, नागपुर, पीथमपुर, सिंगरौली, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टोंक, वडोदरा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 238 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 82 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 87 दर्ज किया गया था।
132 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सूरत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 286 पर पहुंच गया। इससे पहले कल सूरत में एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 110 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
कल पीथमपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 283 दर्ज किया गया था। जहां आज 54 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 229 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी पीथमपुर में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में 13 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 164 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 197 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 33 अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।
फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं आया है, जहां आज भी सूचकांक 149 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 फरवरी को तालचेर चौथे स्थान पर है, वहीं मंडीदीप (277) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (262) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 172, गाजियाबाद में 196, गुवाहाटी में 222, गुरूग्राम में 237, नोएडा में 162, ग्रेटर नोएडा में 170 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 115 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 110, चेन्नई में 93, चंडीगढ़ में 102, हैदराबाद में 87, जयपुर में 134 और पटना में 120 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, पंपोर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं आगरा, आइजोल, अकोला, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बारां, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, कोयंबटूर, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लुधियाना, मदिकेरी, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 82 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
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