बदल रहा प्रदूषण का मानचित्र, दिल्ली-गाजियाबाद नहीं पीथमपुर सबसे ज्यादा प्रदूषित

विश्लेषण से पता चला है कि वायु प्रदूषण अब महज दिल्ली-गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं, छोटे शहरों में भी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है
सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रहा वायु प्रदूषण; प्रतीकात्मक तस्वीर: विकास चौधरी/सीएसई
सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रहा वायु प्रदूषण; प्रतीकात्मक तस्वीर: विकास चौधरी/सीएसई
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सारांश
  • 12 फरवरी 2026 को जारी सीपीसीबी के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में वायु प्रदूषण का संकट अब सिर्फ दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा।

  • मध्यप्रदेश का पीथमपुर 283 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां महज 24 घंटों में प्रदूषण स्तर 67 अंक बढ़ गया।

  • पीथमपुर में पीएम2.5 का असर सबसे ज्यादा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक दर्ज किया गया। इसके विपरीत श्रीनगर सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 35 रहा।

  • दिल्ली और गाजियाबाद में राहत देखी गई—दिल्ली का एक्यूआई 305 से घटकर 164 और गाजियाबाद का 384 से गिरकर 161 पर पहुंच गया।

  • कुल मिलाकर देश के 233 शहरों में से केवल 2.6 फीसदी शहरों में हवा साफ रही, जबकि 60.1 फीसदी शहरों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • कटक (275), बल्लभगढ़ (255) और किशनगंज (251) जैसे शहर भी प्रदूषण के शीर्ष स्तर पर रहे। आंकड़े संकेत देते हैं कि प्रदूषण का मानचित्र तेजी से बदल रहा है और छोटे-औद्योगिक शहर नए हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।

विश्लेषण के मुताबिक 12 फरवरी 2026 को देश में पीथमपुर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 283 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 11 फरवरी को पीथमपुर में एक्यूआई 216 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 67 अंकों का भारी उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि पीथमपुर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पीथमपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,700 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 35 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पीथमपुर की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति करीब 8 गुणा खराब है।

गौरतलब है कि कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 384 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 223 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 161 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।   

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही आज वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से सीधे ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया था, जो 12 फरवरी को 141 अंकों के सुधार के साथ घटकर 164 पर पहुंच गया।

इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 फरवरी 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 37.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी करीब 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 50 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 149 दर्ज किया गया, जिसमें कल से 39 अंकों का सुधार आया है।       

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (275) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (255) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 251 अंकों के साथ किशनगंज चौथे स्थान पर है। वडोदरा-भुवनेश्वर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 237 और 228अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मंडी गोबिंदगढ़ (222) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुम्मिडीपूंडी (220), सिंगरौली (218) और बहादुरगढ़ (212) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के दो (पीथमपुर, सिंगरौली) और हरियाणा के दो शहर (बल्लभगढ़, बहादुरगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पीथमपुर, किशनगंज, वडोदरा, मंडी गोबिंदगढ़, गुम्मिडीपूंडी, बहादुरगढ़, गुरुग्राम, गुवाहाटी, धारूहेड़ा, नाहरलागुन, भिवाड़ी, बेलापुर, कोलकाता, सूरत, राजकोट, हावड़ा, यमुना नगर, नागपुर, दिल्ली, हाजीपुर, गाजियाबाद, महाड, मंडीखेड़ा, धुले, वातवा, सहरसा, गांधीनगर, फरीदाबाद, दुर्गापुर, राउरकेला, तालचेर, चित्तौड़गढ़, नलबाड़ी, बालासोर, हापुड़, अहमदाबाद, पटना, पुणे, मानेसर, धौलपुर, नवी मुंबई, अंकलेश्वर, कोटा, सोनीपत, देहरादून, जयपुर, एलूर, नोएडा, समस्तीपुर, बेगूसराय, इंदौर, पिंपरी-चिंचवाड़, नागांव, तिरुवनंतपुरम, आसनसोल, पाली, भिवानी, काशीपुर, चेन्नई, लखनऊ, मुंबई आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, सिंगरौली, टोंक, कुंजेमुरा, विशाखापत्तनम, हनुमानगढ़, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, सीकर, बारबिल, बीकानेर, चंद्रपुर, भिवंडी, झुंझुनू, अमरावती (आंध्रप्रदेश), क्योंझर, ग्वालियर, सिलीगुड़ी, अलवर, बदलापुर, देवास, बुलंदशहर, मालेगांव, सुआकाती, खुर्जा, जलगांव, रतलाम, अजमेर, डूंगरपुर, उदयपुर, लुधियाना, तुमकुरु, धनबाद, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, मंडीदीप, नागौर, उल्हासनगर, विरार, कुरुक्षेत्र, अमरावती (महाराष्ट्र), ब्रजराजनगर, चुरू, अकोला, कटिहार, नासिक, जालोर, कन्नूर, ठाणे, बागपत, छपरा, बारीपदा, प्रतापगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 2.6 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, मदिकेरी, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 87 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें दौसा, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झालावाड़, जींद, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नांदेड़, नारनौल, पलवल, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 127 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, कन्नूर, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेरठ, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नासिक, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 13 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भुवनेश्वर, कटक, धारूहेड़ा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, किशनगंज, मंडी गोबिंदगढ़, पीथमपुर, सिंगरौली, वडोदरा शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 87 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 78 दर्ज किया गया था।

127 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पीथमपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 283 पर पहुंच गया। इससे पहले कल पीथमपुर में एक्यूआई 216 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 67 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।   

कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 384 दर्ज किया गया था। जहां आज 223 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 161 पर पहुंच गया। मतलब कि आज गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है। 

दिल्ली में 12 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 164 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 141 अंकों की गिरावट आई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 900 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई, जहां सूचकांक 149 (-39) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 फरवरी को किशनगंज चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (275) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (255) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 130, गाजियाबाद में 161, गुवाहाटी में 205, गुरूग्राम में 211, नोएडा में 130, ग्रेटर नोएडा में 156 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 113 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 113, चेन्नई में 114, चंडीगढ़ में 72, हैदराबाद में 86, जयपुर में 135 और पटना में 141 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, मदिकेरी, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दमोह, दौसा, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झालावाड़, जींद, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, करनाल, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नांदेड़, नारनौल, पलवल, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, उज्जैन, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 87 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

एनसीआर में फिर बिगड़ी हवा, गाजियाबाद में 384, दिल्ली में 305 पर पहुंचा एक्यूआई

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