

गाजियाबाद में वायु प्रदूषण का स्तर 384 एक्यूआई तक पहुंच गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़कर 305 एक्यूआई पर पहुंच गया है।
गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) हावी हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है। दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया।
दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज खराब से बेहद खराब हो गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 271 दर्ज किया गया था, जो 11 फरवरी को 34 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 305 पर पहुंच गया।
11 फरवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 32.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 188 (+7) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (328) दूसरे जबकि नोएडा (311) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 305 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 297 और 291 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 11 फरवरी 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 384 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 10 फरवरी को गाजियाबाद में एक्यूआई 325 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 59 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति करीब 16 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में भिवानी की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 336 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 90 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 246 पर पहुंच गया है। मतलब कि स्थिति बेहद खराब से खराब हो गई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता आज खराब से बेहद खराब हो गई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 271 दर्ज किया गया था, जो 11 फरवरी को 34 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 305 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 फरवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 32.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 5.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब पांच फीसदी की कमी आई है। हालांकि खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 13 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है। इसी तरह बेहद खराब हवा वाले शहरों की संख्या भी 33 फीसदी बढ़ी है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 188 (+7) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (328) दूसरे जबकि नोएडा (311) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 305 अंकों के साथ दिल्ली चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 297 और 291 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भिवाड़ी (282) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हापुड़ (277), मुजफ्फरनगर (271) और बागपत (264) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह (गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बागपत) और हरियाणा के दो शहर (चरखी दादरी, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, चरखी दादरी, भिवाड़ी, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, वातवा, भिवानी, मानेसर, धारूहेड़ा, बल्लभगढ़, करनाल, कुरुक्षेत्र, उज्जैन, पीथमपुर, रोहतक, बुलंदशहर, चूरू, जैसलमेर, कोलकाता, गुम्मिडीपूंडी, बालासोर, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, हावड़ा, जींद, बेलापुर, महाड, नागपुर, पुणे, नाहरलागुन, चित्तौड़गढ़, पटना, कोटा, बद्दी, हाजीपुर, इंदौर, मंडीदीप, एलूर, बाड़मेर, आसनसोल, लुधियाना, पिंपरी-चिंचवाड़, तुमकुरु, गुवाहाटी, लखनऊ, नागांव, नलबाड़ी, नारनौल, ब्रजराजनगर, सोनीपत, तिरुवनंतपुरम, बर्नीहाट, सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, बारीपदा, कानपुर, नागौर, हल्दिया, वडोदरा, बैरकपुर, जयपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, टोंक, चेन्नई, सिंगरौली, मंडी गोबिंदगढ़, झुंझुनू, विशाखापत्तनम, मालेगांव, बिलीपाड़ा, तालचेर, सीकर, श्री गंगानगर, बारबिल, भिवंडी, सवाई माधोपुर, नयागढ़, अहमदनगर, अलवर, तुमडीह, पानीपत, खुर्जा, बदलापुर, धुले, अहमदाबाद, प्रतापगढ़, उल्हासनगर, चंद्रपुर, देवास, हनुमानगढ़, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), पाली, रतलाम, कुंजेमुरा, बांसवाड़ा, धनबाद, सहरसा, उदयपुर, पटियाला, अमरावती (महाराष्ट्र), रामनगर, गांधीनगर, जोधपुर, मंगुराहा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), राजमहेंद्रवरम, विरार, ग्वालियर, कैथल, गया, मीरा-भायंदर, बोइसर, अंकलेश्वर, बठिंडा, कटिहार, रायरंगपुर, गोरखपुर, भरतपुर, परभनी, ठाणे आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 2.5 फीसदी यानी महज छह शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, पंपोर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 78 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, देहरादून, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कानपुर, काशीपुर, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वडोदरा, विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 26 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बल्लभगढ़, बेगूसराय, भिवाड़ी, भिवानी, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, चेन्नई, चूरू, कटक, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, हापुड़, करनाल, कुरुक्षेत्र, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीथमपुर, रोहतक, सिंगरौली, टोंक, उज्जैन, वातवा शामिल हैं।
इसी तरह चार शहरों दिल्ली, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज छह शहरों में हवा 'बेहतर' है। 78 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 74 दर्ज किया गया था।
126 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 384 पर पहुंच गया। इससे पहले कल गाजियाबाद में एक्यूआई 325 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 59 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
कल भिवानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 दर्ज किया गया था। जहां आज 90 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 246 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भिवानी में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में 11 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 271 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 305 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 34 अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,900 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 188 (+7) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 फरवरी को दिल्ली चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (328) दूसरे, जबकि नोएडा (311) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 111, गाजियाबाद में 384, गुवाहाटी में 144, गुरूग्राम में 297, नोएडा में 311, ग्रेटर नोएडा में 328 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 121 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 144, चेन्नई में 204, चंडीगढ़ में 116, हैदराबाद में 82, जयपुर में 129 और पटना में 165 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन छह शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, पंपोर, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बारां, बरेली, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटनी, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मदिकेरी, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 78 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
प्रदूषण का हॉटस्पॉट बने हरियाणा-उत्तर प्रदेश, भिवानी में 336 पर पहुंचा एक्यूआई