

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहर प्रदूषण के हॉटस्पॉट बन गए हैं। भिवानी में एक्यूआई 336 तक पहुंच गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। पिछले 24 घंटों में भिवानी में प्रदूषण स्तर में 102 अंकों का उछाल देखा गया।
भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
गाजियाबाद और दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, जिससे स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
10 फरवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 181 (+12) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (325) दूसरे जबकि बागपत (310) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 284 अंकों के साथ यमुना नगर चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 279 और 276 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
दिल्ली (271) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (266), मुजफ्फरनगर (266), और अंगुल (264) भी शामिल हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 10 फरवरी 2026 को देश में भिवानी सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 09 फरवरी को भिवानी में एक्यूआई 234 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 102 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि भिवानी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
भिवानी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर भिवानी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति करीब 13 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में गाजियाबाद की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 289 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 36 अंकों के उछाल के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़कर 325 पर पहुंच गया है। मतलब कि स्थिति खराब से बेहद खराब हो गई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। हालांकि वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 249 दर्ज किया गया था, जो 10 फरवरी को 22 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 271 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 फरवरी 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 65.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 0.8 फीसदी का इजाफा हुआ है।
खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 27.8 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 181 (+12) रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (325) दूसरे जबकि बागपत (310) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 284 अंकों के साथ यमुना नगर चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी-गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 279 और 276 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
दिल्ली (271) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (266), मुजफ्फरनगर (266), और अंगुल (264) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार (गाजियाबाद, बागपत, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर) और हरियाणा के चार शहर (भिवानी, यमुना नगर, चरखी दादरी, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि भिवानी, गाजियाबाद, बागपत, यमुना नगर, चरखी दादरी, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, अंगुल, नोएडा, करनाल, हापुड़, मेरठ, भिवाड़ी, कुरुक्षेत्र, रोहतक, नांदेड़, पीथमपुर, जींद, नाहरलागुन, धारूहेड़ा, गुम्मिडीपूंडी, चेन्नई, महाड, मंडीदीप, मानेसर, बहादुरगढ़, उज्जैन, रीदाबाद, बेलापुर, तुमकुरु, पुणे, कोलकाता, हावड़ा, चित्तौड़गढ़, पानीपत, हाजीपुर, पटना, कोल्लम, पिंपरी-चिंचवाड़, गांधीनगर, इंदौर, झालावाड़, सहरसा, गुवाहाटी, भीलवाड़ा, वडोदरा, देहरादून, पाली, नलबाड़ी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, सिंगरौली, तालचेर, बीकानेर, बुलंदशहर, विशाखापत्तनम, बद्दी, श्री गंगानगर, प्रतापगढ़, नागौर, चूरू, बिलीपाड़ा, मालेगांव, बदलापुर, झुंझुनू, बारबिल, अहमदनगर, मंगुराहा, सिलीगुड़ी, रामनगर, भिवंडी, उदयपुर, उल्हासनगर, कुंजेमुरा, सीकर, टोंक, हनुमानगढ़, जोधपुर, रतलाम, अलवर, डूंगरपुर, पटियाला, अहमदाबाद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), कटिहार, परभनी, चंद्रपुर, अंकलेश्वर, देवास, तुमडीह, जलगांव, सोलापुर, छपरा, ब्रजराजनगर, राजमहेंद्रवरम, बठिंडा, मंडी गोबिंदगढ़, जालोर, अमरावती (महाराष्ट्र), पेरुंदुरई, राउरकेला, कटनी, तिरुवनंतपुरम, खन्ना, मंडीखेड़ा, बोइसर, ग्वालियर, धुले, कोटा, जैसलमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.3 फीसदी यानी महज 8 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, चिक्कमगलुरु, दमोह, मदिकेरी, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 74 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चित्तूर, धनबाद, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, पलवल, पंपोर, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई, रायपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 132 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, दौसा, देहरादून, देवास, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कैथल, कानपुर, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, भुवनेश्वर, ब्यासनगर, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नाहरलागुन, नांदेड़, नोएडा, पीथमपुर, रोहतक, सिंगरौली, यमुना नगर शामिल हैं।
इसी तरह तीन शहरों बागपत, भिवानी, गाजियाबाद में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 74 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 76 दर्ज किया गया था।
132 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज भिवानी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 336 पर पहुंच गया। इससे पहले कल भिवानी में एक्यूआई 234 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 102 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
कल गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 289 दर्ज किया गया था। जहां आज 36 अंकों के उछाल के साथ सूचकांक बढ़कर 325 पर पहुंच गया। मतलब कि आज गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता खराब से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में 10 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 249 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 271 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 22 अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 500 फीसदी अधिक खराब है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 181 (+12) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 फरवरी को यमुना नगर चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (325) दूसरे, जबकि बागपत (310) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 102, गाजियाबाद में 325, गुवाहाटी में 148, गुरूग्राम में 276, नोएडा में 261, ग्रेटर नोएडा में 266 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 99 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 141, चेन्नई में 191, चंडीगढ़ में 167, हैदराबाद में 85, जयपुर में 121 और पटना में 154 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, चिक्कमगलुरु, दमोह, मदिकेरी, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अकोला, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, छाल, चित्तूर, धनबाद, धारवाड़, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करौली, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मैसूर, पलवल, पंपोर, प्रयागराज, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई, रायपुर, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 74 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
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