सांसों पर संकट: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण, गाजियाबाद में 289 तक पहुंचा एक्यूआई

दिल्ली में भी प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां 60 अंकों के उछाल के साथ एक्यूआई बढ़कर 249 पर पहुंच गया है
सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर कोहरे और वायु प्रदूषण के मिश्रण (स्मॉग) की चपेट में आ जाता है। फोटो: विकास चौधरी
सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर कोहरे और वायु प्रदूषण के मिश्रण (स्मॉग) की चपेट में आ जाता है। फोटो: विकास चौधरी
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सारांश
  • 09 फरवरी 2026 को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 289 तक पहुंच गया।

  • बीते 24 घंटों में यहां प्रदूषण स्तर में 101 अंकों का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।

  • दिल्ली में भी 60 अंकों के उछाल के साथ एक्यूआई 249 पर पहुंच गया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 234 शहरों के आंकड़ों के अनुसार केवल 3.8 फीसदी शहरों में हवा साफ रही, जबकि 63.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

  • मंडीदीप, गुरुग्राम और चरखी दादरी जैसे शहर भी प्रदूषण के शीर्ष स्तर पर रहे, वहीं शिलांग 27 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा।

विश्लेषण के मुताबिक 09 फरवरी 2026 को देश में गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 08 फरवरी को गाजियाबाद में एक्यूआई 188 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 101 अंकों का भारी उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि गाजियाबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गाजियाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 27 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 10 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता मध्यम से एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 189 दर्ज किया गया था, जो 09 फरवरी को 60 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 249 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 09 फरवरी 2026 को 234 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 32.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 63.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 30.8 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 3.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 0.8 फीसदी का इजाफा हुआ है।

खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 100 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 169 (+22) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मंडीदीप (263) दूसरे जबकि गुरुग्राम (260) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 253 अंकों के साथ चरखी दादरी चौथे स्थान पर है। दिल्ली-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 249 और 238 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (236) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भिवानी (234), भिवाड़ी (232) और हाजीपुर (231) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के दो (गाजियाबाद, नोएडा) और हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, भिवानी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, गुरुग्राम, चरखी दादरी, बल्लभगढ़, नोएडा, भिवानी, भिवाड़ी, हाजीपुर, धारूहेड़ा, यमुना नगर, बागपत, मानेसर, नांदेड़, समस्तीपुर, नाहरलागुन, बहादुरगढ़, बेगूसराय, बेलापुर, वातवा, देहरादून, मुजफ्फरनगर, रामनगर, पुणे, हापुड़, पीथमपुर, सहरसा, सिलीगुड़ी, भीलवाड़ा, करनाल, नलबाड़ी, बर्नीहाट, उल्हासनगर, तिरुमाला, कुरुक्षेत्र, महाड, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, कोलकाता, गोरखपुर, मुंगेर, रोहतक, कोयंबटूर, जींद, परभनी, सांगली, तुमकुरु, नागांव, अररिया, नारनौल, जालंधर, गुम्मिडीपूंडी, मुरादाबाद, अंकलेश्वर, हल्दिया, पूर्णिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं गाजियाबाद, दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, श्री गंगानगर, मेरठ, बीकानेर, सिंगरौली, फरीदाबाद, तालचेर, अंगुल, सीकर, जालोर, हावड़ा, झुंझुनू, बुलंदशहर, दौसा, नागौर, अहमदाबाद, पिंपरी-चिंचवाड़, तिरुवनंतपुरम, विशाखापत्तनम, बद्दी, जयपुर, विरार, गांधीनगर, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, उदयपुर, डूंगरपुर, लखनऊ, बिलीपाड़ा, पटना, राजकोट, भिवंडी, मंगुराहा, फतेहाबाद, कानपुर, बारबिल, सूरत, बेंगलुरु, चूरू, कोटा, खुर्जा, नवी मुंबई, चित्तौड़गढ़, जोधपुर, कुंजेमुरा, आगरा, बदलापुर, भोपाल, धुले, खन्ना, बाड़मेर, चेन्नई, जलगांव, नागपुर, अलवर, चंद्रपुर, कोल्हापुर, दुर्गापुर, मुंबई, मीरा-भायंदर, नासिक, रतलाम, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अहमदनगर, कटिहार, पाली, सिवान, बारां, बूंदी, पानीपत, करौली, राजमहेंद्रवरम, बालासोर, बांसवाड़ा, कटक, इंदौर, ठाणे, गया, पुदुकोट्टई, बोइसर, सोलापुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 3.8 फीसदी यानी महज 9 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में अगरतला, बागलकोट, चिक्कमगलुरु, मदिकेरी, पंचकुला, सासाराम, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 76 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, दमोह, देवास, धनबाद, धौलपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कटनी, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, कटक, दौसा, देहरादून, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंगुराहा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रामनगर, रतलाम, रोहतक, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, मंडीदीप, मानेसर, नांदेड़, नोएडा, समस्तीपुर, श्री गंगानगर, यमुना नगर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 234 में से महज नौ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 76 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 08 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 79 दर्ज किया गया था।

131 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गाजियाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 289 पर पहुंच गया। इससे पहले कल गाजियाबाद में एक्यूआई 188 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 101 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। 

कल चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 264 दर्ज किया गया था। जहां आज 11 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 253 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली में 09 फरवरी को प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 189 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 249 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का उछाल आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 450 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है, जहां सूचकांक 169 (+22) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 09 फरवरी को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं मंडीदीप (263) दूसरे, जबकि गुरुग्राम (260) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 93, गाजियाबाद में 289, गुवाहाटी में 144, गुरूग्राम में 260, नोएडा में 236, ग्रेटर नोएडा में 230 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 116 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 141, चेन्नई में 121, चंडीगढ़ में 100, हैदराबाद में 84, जयपुर में 148 और पटना में 137 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन नौ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, चिक्कमगलुरु, मदिकेरी, पंचकुला, सासाराम, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अकोला, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, छपरा, चित्तूर, दमोह, देवास, धनबाद, धौलपुर, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जैसलमेर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कटनी, किशनगंज, कोहिमा, कोरबा, लातूर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मैसूर, पलवल, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, रायपुर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, थूथुकुडी, त्रिशूर, टोंक, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 76 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

264 अंकों के साथ प्रदूषण में अव्वल हरियाणा का चरखी दादरी, दिल्ली-फरीदाबाद में सुधरी हवा

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