स्वच्छ हवा वाले क्षेत्रों में नियमित गतिविधि मृत्यु के खतरे को 30 फीसदी तक कम करती है, जबकि अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में यह लाभ 12-15 फीसदी रह जाता।
स्वच्छ हवा वाले क्षेत्रों में नियमित गतिविधि मृत्यु के खतरे को 30 फीसदी तक कम करती है, जबकि अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में यह लाभ 12-15 फीसदी रह जाता।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक

264 अंकों के साथ प्रदूषण में अव्वल हरियाणा का चरखी दादरी, दिल्ली-फरीदाबाद में सुधरी हवा

231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 60.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं
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सारांश
  • हरियाणा के चरखी दादरी में 08 फरवरी 2026 को वायु गुणवत्ता सूचकांक 264 दर्ज किया गया, जो उसे देश का सबसे प्रदूषित शहर बनाता है। चरखी दादरी की हवा में पीएम2.5 कणों की अधिकता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में प्रदूषण में सुधार देखा गया, जहां एक्यूआई क्रमशः 189 और 147 रहा।

  • दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 33 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।

  • 08 फरवरी 2026 को 231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

  • वहीं 34.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 (-13) रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (259) दूसरे जबकि मंडीदीप (249) तीसरे स्थान पर है।

  • इसी तरह 223 अंकों के साथ कटक चौथे स्थान पर है। हाजीपुर-मंडी गोबिंदगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 221 और 219 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

विश्लेषण के मुताबिक 08 फरवरी 2026 को देश में हरियाणा का चरखी दादरी सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 07 फरवरी को चरखी दादरी का एक्यूआई 266 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण स्तर में मामूली सुधार दर्ज किया गया है।

रुझानों में सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 33 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 227 दर्ज किया गया था, जो 08 फरवरी को 38 अंकों के सुधार के साथ घटकर 189 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 फरवरी 2026 को 231 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 34.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 60.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 7.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 9.2 फीसदी का इजाफा हुआ है।

खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 12.5 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 (-13) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में भिवानी (259) दूसरे जबकि मंडीदीप (249) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 223 अंकों के साथ कटक चौथे स्थान पर है। हाजीपुर-मंडी गोबिंदगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 221 और 219 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पीथमपुर (219) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नांदेड़ (215), गुरुग्राम (214) और उज्जैन (198) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में मध्य प्रदेश के तीन (मंडीदीप, पीथमपुर, उज्जैन) और हरियाणा के तीन शहर (चरखी दादरी, भिवानी, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, भिवानी, मंडीदीप, हाजीपुर, मंडी गोबिंदगढ़, पीथमपुर, नांदेड़, गुरुग्राम, उज्जैन, वातवा, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, बागपत, जयपुर, नाहरलागुन, भिवाड़ी, महाड, सिंगरौली, वडोदरा, बेलापुर, इंदौर, पाली, मुजफ्फरपुर, तिरुमाला, कोलकाता, पिंपरी-चिंचवाड़, झालावाड़, चेन्नई, फरीदाबाद, बर्नीहाट, गुवाहाटी, यमुना नगर, चंद्रपुर, कोटा, बेगूसराय, दुर्गापुर, गुम्मिडीपूंडी, नागांव, चित्तौड़गढ़, राजमहेंद्रवरम, धुले, नारनौल, अंकलेश्वर, मानेसर, सूरत, भीलवाड़ा, रोहतक आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं सीकर, विशाखापत्तनम, श्री गंगानगर, दौसा, सवाई माधोपुर, तालचेर, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, कुंजेमुरा, अंगुल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, अहमदाबाद, सिलीगुड़ी, भिवंडी, चुरू, जालोर, सहरसा, हनुमानगढ़, रामनगर, बदलापुर, फतेहाबाद, जलगांव, गांधीनगर, कुरुक्षेत्र, मीरा-भायंदर, अलवर, उल्हासनगर, रतलाम, डूंगरपुर, झुंझुनू, खुर्जा, अकोला, देवास, जैसलमेर, मुंबई, पटना, उदयपुर, परभनी, सिवान, कोल्हापुर, मालेगांव, विरार, कटनी, ठाणे, अहमदनगर, धनबाद, बारां, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 5.6 फीसदी यानी महज 13 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, छाल, कोरबा, मदिकेरी, पंपोर, पंचकुला, रूपनगर, सासाराम, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 79 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धारवाड़, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, पलवल, पानीपत, पेरुंदुरई, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चेन्नई, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मानेसर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नारनौल, नवी मुंबई, नोएडा, पाली, परभनी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुमाला, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के नौ शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में भिवानी, चरखी दादरी, कटक, गुरुग्राम, हाजीपुर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, नांदेड़, पीथमपुर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 231 में से महज 13 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 79 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 89 दर्ज किया गया था।

130 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 पर पहुंच गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में एक्यूआई 266 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में दो अंकों का मामूली सुधार आया है।

कल मंडीदीप में वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किया गया था। जहां आज 73 अंकों के भारी सुधार के साथ सूचकांक घटकर 249 पर पहुंच गया। मतलब कि आज मंडीदीप की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में 08 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 227 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 189 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 38 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 147 (-13) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 फरवरी को कटक चौथे स्थान पर है, वहीं भिवानी (259) दूसरे, जबकि मंडीदीप (249) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 98, गाजियाबाद में 188, गुवाहाटी में 141, गुरूग्राम में 214, नोएडा में 160, ग्रेटर नोएडा में 166 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 117 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 106, चेन्नई में 148, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 94, जयपुर में 179 और पटना में 117 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 13 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, भिलाई, छाल, कोरबा, मदिकेरी, पंपोर, पंचकुला, रूपनगर, सासाराम, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेलगाम, बेतिया, भागलपुर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धारवाड़, फिरोजाबाद, गंगटोक, ग्वालियर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मैसूर, नागपट्टिनम, नासिक, पलवल, पानीपत, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, टोंक, तुमडीह, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 79 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

मंडीदीप में सांस लेना बना खतरा, ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचा एक्यूआई

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